Ground Report : दयालपुर से लढ़ौली तक…फरीदाबाद के इन गांवों में रेल लाइन बनी आफत, 15 दिनों में कटे कई पशु

Ground Report : दयालपुर से लढ़ौली तक…फरीदाबाद के इन गांवों में रेल लाइन बनी आफत, 15 दिनों में कटे कई पशु


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Ground Report Faridabad : फरीदाबाद के दयालपुर, लढ़ौली और फतेहपुर बिल्लौच समेत कई गांवों के ग्रामीण रेलवे लाइन की घेराबंदी की मांग कर रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि खुले ट्रैक पर आवारा पशु मालगाड़ियों की चपेट में आकर दम तोड़ रहे हैं. बीते 20 दिनों में भी कई हादसे हुए हैं. अधूरी चारदीवारी गांवों वालों के लिए आफत बन गई है. लोकल 18 से बबलू हुड्डा बताते हैं कि रेलवे लाइन के आसपास किसानों के खेत हैं, जिनमें तारबंदी की गई है. जब आवारा पशु खेतों में पहुंचते हैं तो किसान उन्हें वहां से भगाते हैं. ऐसे में पशुओं के सामने दूसरी जगह जाने की समस्या खड़ी हो जाती है. लढ़ौली के जगत सिंह कहते हैं कि एक साल पहले रेलवे लाइन पर पांच से छह गाय और दो सांड मालगाड़ी की चपेट में आ गए थे.

फरीदाबाद. हरियाणा के फरीदाबाद में दयालपुर, लढ़ौली और फतेहपुर बिल्लौच समेत कई गांवों के ग्रामीण रेलवे लाइन की घेराबंदी नहीं होने से परेशान हैं. गांवों के बीच से गुजरने वाली इस रेलवे लाइन पर केवल मालगाड़ियां चलती हैं, लेकिन इसके आसपास सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं. रेलवे ट्रैक तक आवारा पशु आसानी से पहुंच जाते हैं और कई बार मालगाड़ियों की चपेट में आकर उनकी मौत हो चुकी है. पशुपालकों के भी पशुओं को चराने के लिए रेलवे लाइन तक पहुंचने से हादसों का खतरा बना रहता है. ग्रामीणों का कहना है कि रेलवे लाइन के किनारे तारबंदी या चारदीवारी कर दी जाए तो पशुओं के साथ-साथ लोगों की जान भी बचाई जा सकती है. लोकल 18 से बबलू हुड्डा बताते हैं कि रेलवे लाइन के आसपास किसानों के खेत हैं, जिनमें तारबंदी की गई है. जब आवारा पशु खेतों में पहुंचते हैं तो किसान उन्हें वहां से भगाते हैं. ऐसे में पशुओं के सामने दूसरी जगह जाने की समस्या खड़ी हो जाती है. गायों के लिए रेलवे लाइन पर बनी सीढ़ियां चढ़ना आसान है, लेकिन नीचे उतरते समय उन्हें परेशानी होती है. कई बार पशु सीधे रेलवे ट्रैक पर पहुंच जाते हैं और मालगाड़ी की चपेट में आकर कट जाते हैं. पिछले 15 से 20 दिनों में भी ऐसी घटनाएं हुई हैं. यहां करीब 100 की रफ्तार से मालगाड़ियां गुजरती हैं. बबलू हुड्डा ने बताया कि कुछ जगह सरकार ने चारदीवारी बनवानी शुरू की थी, लेकिन काम अधूरा छोड़ दिया गया. हमारी मांग है कि पूरे रेलवे ट्रैक के किनारे तारबंदी कराई जाए, ताकि पशु और लोग ट्रैक तक न पहुंच सकें.

लढ़ौली गांव निवासी जगत सिंह कहते हैं कि करीब एक साल पहले रेलवे लाइन पर दो बार हादसे हुए थे. दस दिनों के भीतर पांच से छह गाय और दो सांड मालगाड़ी की चपेट में आ गए थे. कुछ पशुओं को चोट भी लगी थी. एक घायल सांड को अपनी गाड़ी से सरकारी अस्पताल लेकर गए थे, लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी. बाद में पुलिस प्रशासन की मदद से जेसीबी से गड्ढा खुदवाकर मृत पशुओं को दफनाया गया था. जगत सिंह ने बताया कि बाउंड्री बनाने का काम शुरू हुआ था, लेकिन आज तक पूरा नहीं हुआ. हमारी मांग है कि रेलवे लाइन के किनारे पूरी बाउंड्री बनाई जाए.

आदमी की भी मौत

दयालपुर गांव निवासी दीपक बताते हैं कि यह रेलवे लाइन कई गांवों से होते हुए गुजरती है और दादरी से मुंबई की तरफ जाती है. इस पर मालगाड़ियां चलती हैं. पशुओं को इतनी समझ नहीं होती कि उन्हें रेलवे ट्रैक पर नहीं जाना चाहिए. कई बार वे ऊंचाई पर चढ़कर मालगाड़ी की चपेट में आ जाते हैं. अगर कोई बड़ा पशु मालगाड़ी से टकराता है तो ट्रेन के दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा भी हो सकता है. दीपक के मुताबिक, रेलवे की जमीन पर कई जगह तारबंदी है, लेकिन पूरे रास्ते में ऐसा इंतजाम नहीं है. कुछ दिन पहले एक अंजान व्यक्ति भी रेलवे ट्रैक पर पहुंच गया था और अगले दिन उसकी ट्रेन से कटकर मौत होने की जानकारी मिली. उन्होंने कहा कि रेलवे लाइन की पूरी घेराबंदी होने से पशुपालक और आवारा पशु ट्रैक तक नहीं पहुंचेंगे. इससे बेजुबान पशुओं की जान बचने के साथ मालगाड़ियों और रेलवे की संपत्ति को भी नुकसान से बचाया जा सकेगा.



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