Last Updated:
जमशेदपुर की 85 वर्षीय सुमित्रा त्रिपाठी आज भी पूरी तरह फिट और सक्रिय हैं. वे सुबह 3 बजे उठकर अपने सारे काम खुद करती हैं. वे पौष्टिक खानपान और नियमित पूजा-पाठ से स्वस्थ जीवन जी रही हैं. उनकी यह अनुशासित दिनचर्या सभी के लिए एक बड़ी मिसाल है.
जमशेदपुरः आज के दौर में जहां कम उम्र में ही लोग शारीरिक गतिविधियों से दूर होते जा रहे हैं, वहीं जमशेदपुर की करीब 85 वर्षीय सुमित्रा त्रिपाठी अपनी दिनचर्या से लोगों को स्वस्थ और सक्रिय रहने की प्रेरणा दे रही हैं. Local 18 की टीम को चलते-फिरते उनसे मुलाकात हुई, जिन्हें देखकर ऐसा लगा मानो समय उनके लिए थम सा गया हो.
सुमित्रा त्रिपाठी आज भी अपना ज्यादातर काम खुद करती हैं. उनकी दिनचर्या सुबह 3 बजे ही शुरू हो जाती है. सबसे पहले वह भगवान के लिए फूल तोड़ती हैं. इसके बाद सब्जी-भाजी काटने और नहाने-धोने जैसे काम निपटाती हैं. फिर दुर्गा पाठ, हनुमान चालीसा और पूजा-पाठ में समय बिताती हैं. उम्र के इस पड़ाव पर भी उनकी सक्रियता और अनुशासित दिनचर्या लोगों के लिए किसी मिसाल से कम नहीं है.
खानपान का भी रखती हैं खास ध्यान
सुमित्रा त्रिपाठी अपने खानपान का भी विशेष ध्यान रखती हैं. वह रोजाना सूखे मेवे, फल, मखाना, दूध, मलाई और खोवा खाती हैं. घर के छोटे-मोटे काम करने के बाद शाम के समय टहलने के लिए निकल जाती हैं. रात में दूध, रोटी या चावल खाने के बाद करीब 10 बजे तक सो जाती हैं. इस तरह उनकी पूरी दिनचर्या समय के अनुसार चलती है.
Local 18 से बातचीत में उन्होंने बताया कि आज भी उन्हें किसी तरह की बीमारी नहीं है और वह दवाइयों पर पैसे खर्च नहीं करती हैं. हालांकि, हर व्यक्ति का स्वास्थ्य अलग होता है और उनकी यह दिनचर्या उनकी व्यक्तिगत जीवनशैली का हिस्सा है.
पति के निधन के बाद पूजा-पाठ में मिला सहारा
सुमित्रा त्रिपाठी फिलहाल अपनी बेटी, दामाद और दो नातियों के साथ खुशी से जीवन बिता रही हैं. उन्होंने बताया कि पति के निधन के बाद उन्हें अकेलापन महसूस होने लगा था. लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने पूजा-पाठ को अपने जीवन का अहम हिस्सा बना लिया. अब वह भगवान को ही अपना परिवार मानकर उनसे जुड़ी रहती हैं और रोजाना काफी समय पूजा-अर्चना में बिताती हैं.
85 साल की उम्र में भी सुमित्रा त्रिपाठी का आत्मनिर्भर रहना, नियमित दिनचर्या का पालन करना और परिवार के साथ खुश रहना यह बताता है कि जीवन में अनुशासन, सकारात्मक सोच और अपनों का साथ कितना मायने रखता है. उनकी कहानी उम्र को केवल एक संख्या मानने और जीवन के हर पड़ाव को उत्साह के साथ जीने की प्रेरणा देती है.