लाल चूड़ी और पोस्टमार्टम रिपोर्ट बनी अहम सबूत, बगहा नाबालिग मर्डर केस में एक साल में फैसला, सास को उम्रकैद

लाल चूड़ी और पोस्टमार्टम रिपोर्ट बनी अहम सबूत, बगहा नाबालिग मर्डर केस में एक साल में फैसला, सास को उम्रकैद


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Bagha Minor Girl Murder Case: बड़ी खबर बगहा से है जहां 12 साल की नाबालिग बच्ची की हत्या के मामले में नए भारतीय न्याय संहिता कानून के तहत एक साल के भीतर ट्रायल पूरा करते हुए कोर्ट ने आरोपी महिला को आजीवन कारावास और एक लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है. पूरी खबर विस्तार से आगे पढ़िए.

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12 साल की बच्ची की गला घोंटकर हत्या, बगहा कोर्ट ने सास ज्ञांति देवी को सुनाई आजीवन कारावास की सजा

बेतिया. बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के बगहा में 12 वर्ष की नाबालिग की हत्या के मामले में अदालत ने उसकी सास ज्ञांति देवी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश-चतुर्थ मानवेंद्र मिश्रा की अदालत ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत एक साल के भीतर ट्रायल पूरा करते हुए दोषी को एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया. मिली जानकारी के अनुसार, मामले में परिस्थितिजन्य साक्ष्य और पोस्टमार्टम रिपोर्ट अहम साबित हुए.

बता दें कि पश्चिम चंपारण के जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश-चतुर्थ मानवेंद्र मिश्रा की अदालत ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के तहत आजीवन कारावास और एक लाख रुपये अर्थदंड लगाया है. इसके अलावा बीएनएस की धारा 137(2) के तहत सात साल की कैद और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा भी सुनाई गई है. अदालत ने सभी सजाएं साथ-साथ चलाने का आदेश दिया है.

बहला-फुसलाकर घर लाई गई थी नाबालिग बच्ची

अभियोजन के अनुसार, 12 वर्षीय लड़की को ज्ञांति देवी के बेटे ने बहला-फुसलाकर अपने घर लाया था. इसके बाद ज्ञांति देवी और स्वामीनाथ मांझी ने अपने बेटे की शादी नाबालिग बच्ची से करा दी. बाद में बच्ची की उसके ससुराल में गला घोंटकर हत्या कर दी गई. घटना के बाद आरोपी घर से फरार हो गए थे. मामले में पुलिस ने जांच की और अदालत में साक्ष्य पेश किए.

लाल चूड़ी और पोस्टमार्टम रिपोर्ट बनी अहम सबूत

मामले की सुनवाई के दौरान परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की अहम भूमिका रही. घटनास्थल से टूटी हुई लाल रंग की चूड़ी बरामद हुई थी. वहीं, गिरफ्तारी के समय ज्ञांति देवी के हाथ में उसी रंग की चूड़ी मौजूद थी. इसके अतिरिक्त पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी गला घोंटकर हत्या किए जाने की पुष्टि हुई. अभियोजन पक्ष ने इन साक्ष्यों के आधार पर अदालत में अपना पक्ष रखा. अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ज्ञांति देवी को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई.

एक साल में न्यायालय का फैसला

इस मामले में भारतीय न्याय संहिता के तहत एक साल के भीतर ट्रायल पूरा कर सजा सुनाई गई है. अभियोजन पक्ष की ओर से एपीपी जितेंद्र भारती ने मामले में पैरवी की. बगहा कोर्ट का यह फैसला नए आपराधिक कानून के तहत तेजी



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