नई दिल्ली. घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छे प्रदर्शन और फिटनेस में सुधार के बावजूद लगातार भारतीय टीम से बाहर रहने पर सरफराज खान निराश हैं. मध्यक्रम में बल्लेबाजी करने वाले सरफराज खान ने अपनी हताशा जाहिर करते हुए कहा कि अब सुबह उठकर उनके मन में यही सवाल आता है कि आखिर उन्हें इतनी मेहनत क्यों करनी चाहिए. सरफराज ने फरवरी 2024 में भारतीय टेस्ट टीम में डेब्यू किया था. उन्होंने अपना आखिरी टेस्ट अक्टूबर 2024 में न्यूजीलैंड के खिलाफ मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेला था. इसके बाद से उन्हें भारतीय टेस्ट टीम में वापसी का इंतजार है.
‘बहुत कुछ हो चुका’
रेलवे के खिलाफ मुंबई के रणजी ट्रॉफी मुकाबले के पहले दिन का खेल समाप्त होने के बाद सरफराज ने पत्रकारों से कहा, ‘‘बहुत कुछ हो चुका है. अब मैं ज्यादा नहीं सोचता. हर सुबह उठकर खुद से एक ही सवाल पूछता हूं, ‘आखिर मुझे इतनी मेहनत क्यों करनी चाहिए’?’’ उन्होंने कहा,‘‘सुबह पांच बजे उठने के साथ वही पुरानी दिनचर्या शुरू हो जाती है. मैं भारत के लिए खेल चुका हूं. सामान्य दिनचर्या के साथ भी मुंबई के लिए रणजी ट्रॉफी खेल सकता हूं, क्योंकि मैं लगातार 30, 50 और 100 रन बना रहा हूं.’’
पिता हैं सबसे बड़ी प्रेरणा
आक्रामक बल्लेबाजी के लिए पहचाने जाने वाले सरफराज खान का न्यूजीलैंड के खिलाफ 2024 में पुणे और मुंबई टेस्ट की पिछली चार पारियों में प्रदर्शन निराशाजनक रहा था. इन पारियों में उन्होंने क्रमशः 11, 9, 0 और 1 रन बनाए थे. इसके बाद उन्हें भारतीय टेस्ट टीम से बाहर कर दिया गया था. सरफराज ने कहा कि मुश्किल समय में उनके पिता नौशाद खान ही उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा हैं. उन्होंने बताया कि जब कभी मन में निराशा के कारण मेहनत जारी रखने को लेकर सवाल उठता है तो पिता को कड़ी मेहनत करते देखकर उन्हें फिर से खेलने और रन बनाने की प्रेरणा मिलती है.
उन्होंने कहा, ‘‘कभी-कभी मन में यह सवाल जरूर उठता है, लेकिन जब मैं अपने पिता को मेहनत करते देखता हूं तो सोचता हूं कि ठीक है, मैं मैदान पर जाऊंगा और उनके लिए रन बनाऊंगा. मेरी दिनचर्या आज भी पहले जैसी ही है.’’ सरफराज ने अपनी नियमित अभ्यास की आदत का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘हर कोई जानता है कि अगर आपको सरफराज खान से मिलना है तो उसके घर का पता जानने की जरूरत नहीं है. आप सुबह छह बजे आजाद मैदान या क्रॉस मैदान पहुंच जाइए, मैं वहीं मिल जाऊंगा.’’
भविष्य की चिंता नहीं, क्रिकेट खेलने पर ध्यान
उन्होंने कहा कि फिलहाल उनका पूरा ध्यान सिर्फ क्रिकेट खेलने पर है और वह भविष्य को लेकर ज्यादा नहीं सोच रहे हैं. सरफराज ने बताया, ‘‘मुझे खुद भी पता नहीं था कि श्रीलंका दौरे के लिए मेरा बुलावा आएगा. मैं एनसीए में था तभी मुझे टीम में शामिल होने की सूचना मिली, लेकिन खेलने का मौका नहीं मिला. इसके बाद मैं वापस आया और मुंबई के लिए क्रिकेट खेलने लगा. अब मैं ज्यादा कुछ समझने की कोशिश नहीं करता, बस खेल रहा हूं.’’ उन्होंने कहा, ‘‘अगर राष्ट्रीय चयनकर्ता मुझे बुलाते हैं तो मैं भारत के लिए खेलने जाऊंगा. अगर वे नहीं बुलाते हैं तो यहां घरेलू क्रिकेट खेलता रहूंगा.’’
चौंकाने वाला दावा किया
सरफराज ने एक चौंकाने वाला दावा किया है कि भारतीय टीम उनकी सेवाएं केवल घरेलू टेस्ट मैचों के लिए ही देख रही है. हालांकि, उन्हें अभी तक अपनी भूमिका को लेकर टीम प्रबंधन या चयनकर्ताओं की तरफ से कोई स्पष्ट बात नहीं बताई गई है. फरवरी 2024 में अपना डेब्यू करने वाले सरफराज ने अपने करियर के अब तक के सभी छह टेस्ट मैच घरेलू मैदानों पर ही खेले हैं. उन्होंने रेलवे के खिलाफ रणजी मैच के पहले दिन 55 रन बनाने के बाद कहा, ‘‘जब मैं भारतीय टीम के साथ था तो मैंने यही सुना कि वे मुझे भारतीय परिस्थितियों में खेलने के लिए ज्यादा देख रहे हैं. किसी चयनकर्ता ने हालांकि मुझसे सीधे तौर पर ऐसा नहीं कहा है.’’
‘विदेशों में भी रन बनाए हैं’
सरफराज ने विदेशी दौरों के लिए टीम में चयन नहीं होने पर हैरानी जताई. उन्होंने दक्षिण अफ्रीका और इंग्लैंड में अभ्यास मैचों में बनाए गए शतकों का हवाला दिया. उन्होंने कहा, ‘‘जब मैं दक्षिण अफ्रीका गया था तो वहां अभ्यास मैच में भारत ए का प्रतिनिधित्व करते हुए भारतीय टीम के खिलाफ 63 गेंदों में शतक बनाया था. इसके बाद इंग्लैंड में भी मैंने 76 गेंदों में 101 रन की पारी खेली थी.’’ उन्होंने कहा, ‘‘ऐसा नहीं है कि मैंने भारत के बाहर रन नहीं बनाए हैं. मैंने वहां भी रन बनाए हैं. यह चयनकर्ताओं का नजरिया है और उनका फैसला है. मेरा काम क्रिकेट खेलना है.’’