पाकिस्तान सोना-तांबा बेचने के लिए बेताब, विदेशी कंपनियों को अपनी जमीन नीलाम करेंगे शहबाज शरीफ-मुनीर

पाकिस्तान सोना-तांबा बेचने के लिए बेताब, विदेशी कंपनियों को अपनी जमीन नीलाम करेंगे शहबाज शरीफ-मुनीर


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Pakistan Asim Munir: पाकिस्तान आर्थिक संकट से निकलने के लिए अपने खनिज भंडार विदेशी कंपनियों के लिए खोलने की तैयारी कर रहा है. शहबाज शरीफ सरकार खनन क्षेत्र में निवेश को आसान बनाने के लिए नया कानूनी ढांचा तैयार कर रही है. पहले चरण में खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान पर ध्यान दिया जाएगा. इसी बीच रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने माना है कि विदेश नीति और सरकार के अहम फैसलों में सेना की गहरी भूमिका है.

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पाकिस्तान अपने खनिजों को नीलाम करने जा रही है. (AI जेनेरेटेड इमेज)

Pakistan News: पाकिस्तान आर्थिक संकट से निकलने के लिए अब अपनी जमीन के नीचे छिपे खजाने को नीलाम करने की तैयारी कर रहा है. शहबाज शरीफ सरकार और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर मिलकर देश के विशाल खनिज भंडार में विदेशी कंपनियों को बेचने की तैयारी कर रहे हैं. पाकिस्तान 12 और 13 नवंबर को होने वाले पाकिस्तान मिनरल्स इनवेस्ट फोरम (PMIF) 2026 में दुनिया की बड़ी खनन कंपनियों और निवेशकों को अपने यहां कारोबार का न्योता देने वाला है. लेकिन इस पूरी कवायद के बीच एक बड़ा सवाल भी खड़ा हो रहा है कि पाकिस्तान के खनिज संसाधनों पर असल नियंत्रण किसका होगा? चुनी हुई सरकार का या उसकी सेना का, जिसका देश की नीतियों और फैसलों में लंबे समय से प्रभाव रहा है? पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के हालिया बयान ने इस बहस को और तेज कर दिया है. उन्होंने माना है कि विदेश नीति, कूटनीति और सरकार के अहम फैसलों में सेना की गहरी भूमिका है.

विदेशी कंपनियों के लिए कानून बनाने की तैयारी

CNN-News18 को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, शहबाज शरीफ सरकार ऐसा कानून तैयार कर रही है, जिससे पाकिस्तान के खनन क्षेत्र में आने वाली विदेशी कंपनियों और ठेकेदारों को कानूनी सुरक्षा और निवेश की गारंटी दी जा सके. सरकार चाहती है कि लंबे समय के खनन और खोज से जुड़े प्रोजेक्ट में विदेशी निवेशकों को भरोसा मिले. इसके पहले चरण में खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान के खनन क्षेत्रों को अंतरराष्ट्रीय निवेश और नीलामी के लिए खोले जाने की संभावना है. यहां तांबा, सोना और दूसरे महत्वपूर्ण खनिजों की खोज, खुदाई और विकास के लिए बड़ी विदेशी कंपनियों को आमंत्रित किया जा सकता है. पाकिस्तान के पास तांबा, सोना, क्रोमाइट, लौह अयस्क और कोयले जैसे कई खनिजों के बड़े भंडार हैं. बलूचिस्तान में मौजूद रेको डिक कॉपर-गोल्ड प्रोजेक्ट इसका बड़ा उदाहरण है. इसे दुनिया के सबसे बड़े ऐसे तांबा-सोना भंडारों में गिना जाता है, जहां अभी बड़े स्तर पर खनन शुरू होना बाकी है.

इमरान खान की पार्टी पर ठेकों में रुकावट डालने का आरोप

इस निवेश योजना का राजनीतिक पहलू भी अहम है. खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर शासन लागू होने के बाद PTI के नेतृत्व वाली प्रांतीय सरकार का कामकाज खत्म हो गया है. सूत्रों ने आरोप लगाया है कि इमरान खान की पार्टी की पिछली सरकार खनन से जुड़े ठेकों और निवेश प्रस्तावों को आगे बढ़ाने में बाधा बन रही थी. हालांकि, यह आरोप सूत्रों के हवाले से है. खनन परियोजनाओं को लेकर पाकिस्तान में पहले भी राजनीतिक विवाद, सुरक्षा चिंताएं और स्थानीय स्तर पर राजस्व के बंटवारे से जुड़े सवाल सामने आते रहे हैं. बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा जैसे इलाकों में सुरक्षा की स्थिति, कमजोर बुनियादी ढांचा और राजनीतिक अस्थिरता विदेशी कंपनियों के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं. इसके अलावा यह भी सवाल है कि खनन से होने वाली कमाई में स्थानीय लोगों को कितना हिस्सा मिलेगा.

पाकिस्तानी सेना देश चलाती है

खनिज निवेश की इस योजना के बीच पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ का बयान भी चर्चा में है. उन्होंने स्वीकार किया है कि पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व की विदेश नीति बनाने, दूसरे देशों से बातचीत करने और सरकार के अहम फैसलों में गहरी भागीदारी है. उनके इस बयान से पाकिस्तान के उस ‘हाइब्रिड सिस्टम’ पर फिर बहस शुरू हो गई है, जिसमें देश में चुनी हुई सरकार तो होती है, लेकिन सेना भी कई बड़े फैसलों पर प्रभाव रखती है. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार के साथ आसिम मुनीर के नेतृत्व वाला सैन्य प्रतिष्ठान भी देश की नीतियों में अहम भूमिका निभाता है.

पाकिस्तान के खनिजों का असली फायदा किसे मिलेगा?

पाकिस्तान सरकार की योजना है कि विदेशी निवेश से खनन बढ़े, रोजगार पैदा हों, निर्यात को बढ़ावा मिले और देश को आर्थिक संकट से निकलने में मदद मिले. लेकिन निवेशकों को आकर्षित करना ही काफी नहीं होगा. उन्हें सुरक्षा, स्थिर नीतियां और भरोसेमंद कानूनी व्यवस्था भी देनी होगी. इसके साथ यह सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा कि खनन से होने वाली कमाई का फायदा स्थानीय आबादी तक पहुंचे. खासकर बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में यह सवाल अहम है कि जिन इलाकों से खनिज निकाले जाएंगे, वहां के लोगों को रोजगार, विकास और राजस्व में कितना हिस्सा मिलेगा. 12 और 13 नवंबर को होने वाला पाकिस्तान मिनरल्स इन्वेस्टमेंट फोरम 2026 पाकिस्तान के लिए विदेशी निवेश जुटाने का बड़ा मौका हो सकता है.



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