फरीदाबाद: अचानक शरीर का संतुलन बिगड़ना, आंखों से दिखाई देने में परेशानी होना, चेहरे का एक तरफ झुक जाना या बोलने में दिक्कत होना स्ट्रोक के संकेत हो सकते हैं. ऐसी स्थिति में लापरवाही करना मरीज के लिए भारी पड़ सकता है. अक्सर लोग इन लक्षणों को सामान्य परेशानी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं और अस्पताल पहुंचने में देरी कर देते हैं. हालांकि, स्ट्रोक के मामले में समय सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होता है. अमृता अस्पताल फरीदाबाद के न्यूरोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. संजय पांडे ने बताया कि स्ट्रोक के 24 घंटे बाद भी मरीज का इलाज संभव है, लेकिन जितनी जल्दी उपचार शुरू होगा, उतना बेहतर परिणाम मिलने की संभावना रहती है.
स्ट्रोक होने पर तीन घंटे में लेकर पहुंचे अस्पताल
डॉ. संजय पांडे बताते हैं कि स्ट्रोक होने पर मरीज को तीन घंटे के अंदर अस्पताल पहुंचाना सबसे अच्छा रहता है. हालांकि, 24 घंटे के भीतर अस्पताल आने पर भी इलाज की संभावना बनी रहती है. इसके लिए जरूरी है कि परिवार के लोग बीमारी के शुरुआती संकेतों को पहचानें और बिना समय गंवाए मरीज को नजदीकी अस्पताल लेकर जाएं. स्ट्रोक के उपचार में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है. कुछ मरीजों के दिमाग की नसों में खून का थक्का जम जाता है. सीटी एंजियोग्राफी में LVO यानी बड़ी नस में रुकावट की पुष्टि होने पर विशेष मशीन की मदद से थक्का निकाला जा सकता है. इसे मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टॉमी कहा जाता है. इसके अलावा, मरीज की स्थिति और जांच के आधार पर दवाओं से थक्का घोलने की प्रक्रिया भी अपनाई जाती है.
डॉक्टर दे सकते हैं थ्राम्बोलिटिक थिरैपी
डॉ. संजय पांडे बताते हैं कि भारत में स्ट्रोक के मरीज देर से अस्पताल पहुंचते हैं, जिसकी सबसे बड़ी वजह लोगों में जागरूकता की कमी है. इसके लक्षण पहचानने के लिए B-FAST का तरीका याद रखना चाहिए. इसमें B का मतलब शरीर का संतुलन बिगड़ना, E का अर्थ आंखों की रोशनी या देखने में परेशानी, F का मतलब चेहरे की मांसपेशियों में कमजोरी, A का अर्थ हाथ में कमजोरी, S का मतलब बोलने में परेशानी और T का अर्थ समय है. इनमें से कोई भी संकेत दिखाई देने पर तुरंत अस्पताल पहुंचना चाहिए. योग्य मरीजों को डॉक्टर थ्रोम्बोलिटिक थेरेपी दे सकते हैं.
स्ट्रोक आने पर डॉक्टर करते हैं ये जांच
डॉ. संजय पांडे बताते हैं कि सीटी स्कैन और एमआरआई का इस्तेमाल स्ट्रोक की जांच के लिए किया जाता है. सीटी स्कैन आसानी से उपलब्ध होने वाली जांच है. इसके आधार पर कई अस्पतालों में इलाज शुरू किया जा सकता है. बड़े अस्पतालों में जरूरत के अनुसार एमआरआई भी की जाती है, लेकिन शुरुआती उपचार शुरू करने के लिए सीटी स्कैन पर्याप्त हो सकता है.
डॉ. संजय पांडे बताते हैं कि स्ट्रोक के मरीजों को आधुनिक उपचार नहीं मिल पाने के पीछे कई कारण हैं. कई लोग समय पर अस्पताल नहीं पहुंचते और कुछ जगहों पर बीमारी के लक्षणों की पहचान नहीं हो पाती. हार्ट अटैक की तरह स्ट्रोक में सीने में दर्द नहीं होता, इसलिए लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते. इसके अलावा दूरदराज के इलाकों में विशेषज्ञ डॉक्टर, सीटी स्कैन और एमआरआई जैसी सुविधाओं की कमी भी बड़ी समस्या है. खासकर उत्तर भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में यह परेशानी देखने को मिलती है.