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Lucknow E-Rickshaws: उत्तर प्रदेश में ई-रिक्शों की बेलगाम संख्या पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने बेहद सख्त रुख अपनाया है. अदालत ने राजधानी लखनऊ की सड़कों पर दौड़ रहे करीब 1.33 लाख ई-रिक्शों के संचालन पर चिंता जताते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि जरूरत से ज्यादा संख्या होने पर मोटर वाहन अधिनियम की धारा 39 के तहत नए पंजीकरणों पर रोक लगाने का फैसला चार सप्ताह के भीतर लिया जाए. इसके अलावा, प्रतिबंधित मार्गों पर ई-रिक्शों के संचालन के लिए एसआईटी को सख्त कार्रवाई करने और चाइनीज मांझा पर प्रभावी रोक न लगाने पर भी कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है.
लखनऊ हाईकोर्ट ने चाइनिज मांझा पर सरकार से सवाल. (फाइल फोटो)
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सड़कों पर बेलगाम दौड़ रहे ई-रिक्शों और भीषण ट्रैफिक जाम की समस्या को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने बेहद सख्त है. अदालत ने राजधानी में बेकाबू हो चुके ई-रिक्शों की संख्या को नियंत्रित करने और प्रतिबंधित मार्गों पर उनके संचालन पर प्रभावी रोक लगाने के कड़े निर्देश दिए हैं. न्यायालय ने साफ कहा कि लखनऊ की सड़कों पर लगभग 1.33 लाख ई-रिक्शों का संचालन ही आज शहर में भारी ट्रैफिक जाम का मुख्य कारण बन गया है. ऐसे में यदि इनकी संख्या निर्धारित सीमा से अधिक है, तो नए पंजीकरणों पर तुरंत रोक लगाने की आवश्यकता है.
न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति एके चौधरी की खंडपीठ ने स्थानीय अधिवक्ता सूरज सिंह विसेन द्वारा दाखिल एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह अहम आदेश पारित किया है. अदालत ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया है कि यदि लखनऊ या प्रदेश के किसी भी अन्य शहर में ई-रिक्शों की संख्या आवश्यकता से अधिक पाई जाती है, तो मोटर वाहन अधिनियम की धारा 39 के तहत नए ई-रिक्शों के पंजीकरण पर रोक लगाने का निर्णय लिया जाए. इस संबंध में सरकार को चार सप्ताह के भीतर उचित फैसला लेने को कहा गया है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार ने भले ही पंजीकरण शुल्क में छूट दी हो, लेकिन धारा 39 के तहत पंजीकरण की अनिवार्यता समाप्त नहीं की गई है, इसलिए बिना वैध पंजीकरण के ई-रिक्शा चलाना स्वीकार्य नहीं है.
एसआईटी को वैकल्पिक मार्गों की व्यवस्था
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि वर्ष 2022 के आदेश के बावजूद कई प्रतिबंधित मार्गों पर ई-रिक्शा धड़ल्ले से चल रहे हैं. इसे लेकर खंडपीठ ने विशेष जांच दल (SIT) को आदेशों का अक्षरशः अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा है. साथ ही, एसआईटी को यह निर्देश भी दिए गए हैं कि वे अन्य उपयुक्त क्षेत्रों में भी प्रतिबंध लगाने पर विचार करें. कोर्ट ने यह भी हिदायत दी कि प्रतिबंध लगाते समय आम नागरिकों की सुविधा के लिए वैकल्पिक मार्ग भी अनिवार्य रूप से निर्धारित किए जाएं ताकि जनता को आवागमन में परेशानी न हो. इसके अलावा, कमता चौराहे और पॉलीटेक्निक-कमता-चिनहट मार्ग पर यातायात की समस्या के स्थायी समाधान के लिए आईआईटी (IIT) बीएचयू तकनीकी और वित्तीय प्रस्तावों का स्वतंत्र मूल्यांकन कर कार्ययोजना तैयार करेगा.
चाइनीज मांझा मामले में सरकार को कोर्ट की कड़ी फटकार
इसी बीच, हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने प्रतिबंधित चाइनीज मांझा को लेकर राज्य सरकार द्वारा अब तक कोई भी प्रभावी कदम न उठाए जाने पर गहरी नाराजगी जताई है. न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने स्थानीय अधिवक्ता मोतीलाल यादव की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए इस मामले में अगली सुनवाई के लिए 6 नवंबर की तिथि तय की है और निर्देश दिया है कि इस याचिका को पहली प्राथमिकता पर सूचीबद्घ किया जाए. हालांकि, राज्य सरकार की ओर से अदालत को यह जानकारी दी गई है कि ऐसे खतरनाक मांझे की खरीद-बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के लिए नए कानूनी प्रावधान तेजी से तैयार किए जा रहे हैं. हाईकोर्ट के इन कड़े तेवरों से प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है.