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Slugging Trend Side Effects: सोशल मीडिया पर स्किनकेयर के कई ट्रेंड आते रहते हैं,’स्लगिंग’ ऐसा ही एक ट्रेंड है. ये कोरियन ब्यूटी रूटीन का हिस्सा है. इसमें रात को सोने से पहले चेहरे पर वैसलीन या पेट्रोलियम जेली की मोटी परत लगाई जाती है. हालांकि इसका मकसद त्वचा में नमी को लॉक करना होता है, लेकिन ये सबके लिए कारगर उपाय नहीं है. यहां जानिए स्लगिंग क्या होती है, और इसके साइड इफेक्ट्स क्या हैं.
स्लगिंग के बारे में कहा जाता है कि इससे सुबह उठने पर स्किन मुलायम, चमकदार और हाइड्रेटेड नजर आती है. खासकर रूखी और बेजान त्वचा वाले लोगों को इससे फायदा मिल सकता है. हालांकि, स्लगिंग हर तरह की त्वचा के लिए सही नहीं है. कुछ लोगों के लिए ये तरीका मुंहासे, पोर्स बंद होने और त्वचा में जलन की वजह बन सकता है. इसलिए इसे अपनाने से पहले जानना जरूरी है कि किन लोगों को इस ट्रेंड से दूरी बनाकर रखनी चाहिए.
क्या है स्लगिंग? स्लगिंग में पेट्रोलियम जेली की मोटी परत लगाकर त्वचा पर एक सुरक्षात्मक कवच बनाया जाता है. ये त्वचा से नमी को बाहर निकलने से रोकता है. ऐसे में त्वचा ज्यादा हाइड्रेटेड, स्मूथ और शाइनी नजर आती है. ठंड के मौसम में ये उपाय काफी मददगार साबित हो सकता है.
इन 4 लोगों को नहीं करनी चाहिए स्लगिंग- अगर आपकी स्किन ऑयली है या चेहरे पर अक्सर पिंपल्स होते हैं, तो स्लगिंग से बचना चाहिए. वैसलीन की मोटी परत त्वचा पर मौजूद तेल, पसीने और डेड स्किन सेल्स को अंदर ही रोक सकती है. इससे मुंहासों की समस्या बढ़ सकती है और दर्द वाले पिंपल्स निकल सकते हैं.
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अगर आप रात में रेटिनॉल, ट्रेटिनॉइन, ग्लाइकोलिक एसिड, सैलिसिलिक एसिड या विटामिन सी वाले प्रोडक्ट्स लगाते हैं, तो उनके ऊपर वैसलीन लगाने से बचें. इससे इन एक्टिव इंग्रीडिएंट्स का असर बढ़ सकता है और त्वचा में जलन, लालिमा और पपड़ी निकलने जैसी समस्याएं हो सकती हैं.
मिलिया त्वचा पर होने वाले छोटे सफेद दाने होते हैं, जिनमें केराटिन जमा हो जाता है. खासकर आंखों के आसपास और गालों पर ये दिखाई देते हैं. वैसलीन जैसे भारी प्रोडक्ट्स कुछ लोगों में इस समस्या को बढ़ा सकते हैं.
अगर चेहरे पर खुले पिंपल्स, फुंसियां, घाव या कोल्ड सोर यानी वायरल इंफेक्शन है, तो स्लगिंग न करें. इससे प्रभावित जगह पर बैक्टीरिया या वायरस फंस सकते हैं और इंफेक्शन बढ़ने का खतरा हो सकता है.
स्लगिंग की जगह अपनाएं ये विकल्प- नियासिनमाइड, हायलूरोनिक एसिड और सेंटेला एशियाटिका वाले हल्के जेल मॉइश्चराइजर लगाएं. सेरामाइड्स, स्क्वालेन और फैटी एसिड वाले मॉइश्चराइजर इस्तेमाल करें. मारुला ऑयल और रोजहिप सीड ऑयल जैसे विकल्प चुन सकते हैं.