Pakistan Taliban India Tension: भारत रूस के खिलाफ पाकिस्तान ने रची साजिश, तालिबान ने मुंह काला कर लौटाया, कंधार की सीक्रेट मीटिंग में क्या हुआ?


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Afghanistan-Pakistan Tension: अफगानिस्तान के कंधार में 22 अक्टूबर को पाकिस्तान और तालिबान के बीच कथित गुप्त बैठक हुई. अफगानिस्तान के न्याय मंत्री फजल अहमद मेनई के सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान ने जलालाबाद में भारतीय कांसुलेट बंद करने और रूस की लॉजिस्टिक मदद ईरान तक पहुंचने से रोकने की मांग की. तालिबान ने जवाब में पाकिस्तानी कांसुलेट बंद करने की शर्त रखी और रूस-ईरान से जुड़े प्रस्ताव को खारिज कर दिया. दोनों पक्षों ने एक महीने की समयसीमा तय की.

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भारत-रूस के खिलाफ पाकिस्तान ने रची साजिश, तालिबान ने मुंह काला कर लौटायाZoom

पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ साजिश रचने की कोशिश की, लेकिन उसमें बुरी तरह हार गया.

Pakistan News: पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में भारत की राजनयिक मौजूदगी के खिलाफ साजिश रचने की कोशिश की है. इस बार इस्लामाबाद ने डिमांड की कि जलालाबाद में स्थित भारतीय कांसुलेट को बंद कराया जाए. पाकिस्तान की यह लंबे समय से डिमांड रही है. लेकिन तालिबान ने पाकिस्तान की इस मांग पर ऐसा जवाब दिया कि पूरा मामला ही पलट गया. तालिबान ने कहा कि अगर जलालाबाद से भारतीय कांसुलेट बंद होगा तो उसी शहर में पाकिस्तान का कांसुलेट भी बंद करना पड़ेगा.

कंधार में हुई इस सीक्रेट मीटिंग में पाकिस्तान ने रूस और ईरान के खिलाफ साजिश रचने की कोशिश की. पाकिस्तान ने तलिबान से मांग की कि रूस से ईरान को मिलने वाली लॉजिस्टिक मदद रोक दी जाए, जिसे तालिबान ने साफ तौर पर खारिज कर दिया. अफगानिस्तान के न्याय मंत्री फजल अहमद मेनई ने एक्स पर इससे जुड़ा पोस्ट किया. उन्होंने सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी देते हुए बताया कि 22 अक्टूबर को पाकिस्तान का एक सुरक्षा और डिप्लोमैटिक प्रतिनिधिमंडल कंधार पहुंचा था. इस मीटिंग में पाकिस्तान ने पांच बड़े मुद्दों पर बातचीत हुई.

कंधार में हुई सीक्रेट मीटिंग

अफगानिस्तान के न्याय मंत्री फजल अहमद मेनई ने बताया कि 22 अक्टूबर को जनरल इनायत हुसैन के नेतृत्व में पाकिस्तान का प्रतिनिधिमंडल कंधार पहुंचा था. इसमें सुरक्षा क्षेत्र के चार अधिकारी और पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय का एक प्रतिनिधि शामिल था. काबुल और कंधार में तैनात पाकिस्तानी कांसुलर मामलों के अधिकारी भी मीटिंग में मौजूद बताए गए. दावे के मुताबिक, पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल सुबह 9 बजे स्पिन बोल्डक के रास्ते अफगानिस्तान में दाखिल हुआ. इसके बाद कंधार में तालिबान के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की और रात 10 बजे क्वेटा लौट गया. इस बैठक में कंधार के गवर्नर मुल्ला शिरीन, मुल्ला तालिब, तालिबान प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद, उप गृह मंत्री सद्र इब्राहिम, रक्षा मंत्रालय के मुख्य निरीक्षक मुफ्ती लुत्फुल्लाह हकीमी और सैन्य खुफिया प्रमुख मुल्ला अब्दुल कादूस के शामिल हुए.

पाकिस्तान की पांच मांगें क्या थीं

  1. TTP नेताओं को सौंपने की मांग: पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में मौजूद तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के नेताओं को उसके हवाले करने की मांग की. दावा है कि इस्लामाबाद ने उनके ठिकानों के पते और लोकेशन भी तालिबान को दिए.
  2. अफगान लड़ाकों की पाकिस्तान में एंट्री रोकना: पाकिस्तान चाहता था कि अफगान लड़ाके उसकी सीमा में दाखिल न हों और वहां की सरकार के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष में शामिल न हों.
  3. पाकिस्तान में तालिबान की संपत्ति बेचने की मांग: इस्लामाबाद ने पाकिस्तान में तालिबान से जुड़े मकानों और संपत्तियों को सरकार को बेचने और उनके मालिकों के देश छोड़ने की मांग रखी.
  4. जलालाबाद में भारतीय कांसुलेट बंद करना: पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के जलालाबाद में भारत के कांसुलेट को बंद करने की मांग की. ये जगह पाकिस्तानी सीमा के करीब है.
  5. रूस की मदद ईरान तक पहुंचने से रोकना: पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के रास्ते रूस की लॉजिस्टिक सहायता ईरान तक पहुंचने से रोकने को कहा.

इन मांगों में भारतीय कांसुलेट और रूस-ईरान से जुड़ा मुद्दा खास तौर पर अहम है. इससे संकेत मिलता है कि पाकिस्तान अफगानिस्तान के साथ अपने सुरक्षा विवादों के अलावा क्षेत्रीय कूटनीति में भी तालिबान से अपनी शर्तें मनवाना चाहता था.

भारतीय कांसुलेट बंद करने पर तालिबान का जवाब

पाकिस्तान लंबे समय से अफगानिस्तान में भारत की राजनयिक मौजूदगी से परेशान रहा है. खास तौर पर जलालाबाद और कंधार में भारतीय कांसुलेट को इस्लामाबाद अपनी सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं बताता है. पाकिस्तान का आरोप रहा है कि भारत के राजनयिक मिशनों का इस्तेमाल उसकी खुफिया गतिविधियों के लिए किया जा सकता है. इस बार भी पाकिस्तान ने जलालाबाद में भारतीय कांसुलेट बंद करने की मांग रखी. तालिबान ने पाकिस्तान की बात मानने के लिए एक शर्त रख दी. उसने कहा कि अगर भारतीय कांसुलेट बंद किया जाता है तो जलालाबाद में मौजूद पाकिस्तानी कांसुलेट को भी बंद करना होगा. यानी पाकिस्तान जिस शहर से भारत की राजनयिक मौजूदगी खत्म कराना चाहता था, वहां अपनी मौजूदगी बनाए रखने की उसकी कोशिश को तालिबान ने स्वीकार नहीं किया. इस जवाब से साफ संदेश गया कि भारत के कांसुलेट को तालिबान नहीं बंद करने वाला.

पाकिस्तान पहले भी उठाता रहा है सवाल

जलालाबाद और कंधार में भारतीय कांसुलेट को लेकर पाकिस्तान की आपत्ति नई नहीं है. 2007 की एक रिपोर्ट के मुताबिक तब भी तालिबान ने ऐसी ही मांग की थी. तब अफगानिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति हामिद करजई ने पाकिस्तान पर सवाल उठाया था. उन्होंने पूछा था कि अगर अफगानिस्तान में भारतीय राजनयिक मिशन पाकिस्तान की सुरक्षा के लिए खतरा हैं तो फिर पाकिस्तान ने अपनी जमीन पर भारतीय राजनयिक मिशन की मौजूदगी क्यों स्वीकार की है? उन्होंने सवाल किया था कि क्या इस्लामाबाद में भारतीय दूतावास नहीं है?

रूस और ईरान पर भी तालिबान ने किया इनकार

इस मीटिंग का दूसरा बड़ा मुद्दा रूस से मिलने वाली लॉजिस्टिक सहायता को ईरान तक पहुंचने से रोकना था. पाकिस्तान ने मांग की कि अफगानिस्तान के रास्ते रूस की मदद ईरान तक न पहुंचे. लेकिन तालिबान ने इस मांग को खारिज कर दिया. किस तरह की मदद रोकने की डिमांड की गई यह सामने नहीं आया. इसी वजह से ये नहीं मानना चाहिए कि पाकिस्तान की मांग हथियारों को लेकर रही है. वहीं TTP के नेताओं को सौंपने की मांग पर तालिबान ने सकारात्मक रुख दिखाया. लेकिन इसके बदले उसने पाकिस्तान से अपनी जमीन पर तालिबान विरोधी संगठनों के कार्यालय और ट्रेनिंग सेंटर बंद करने की मांग की.

तालिबान ने कथित तौर पर पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल को कुछ दस्तावेज भी दिखाए. उसके मुताबिक, इन दस्तावेजों में पाकिस्तान में तालिबान विरोधियों के कार्यालयों और प्रशिक्षण केंद्रों की मौजूदगी का जिक्र था. इस तरह TTP के मुद्दे पर भी तालिबान ने पाकिस्तान की मांग को बिना शर्त स्वीकार नहीं किया.



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