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Jalore Famous Rabri: जालोर में राठी परिवार की 127 साल पुरानी रबड़ी आज भी अपने खास स्वाद के लिए मशहूर है. शुद्ध गाय के दूध से तैयार होने वाली इस रबड़ी को बनाने में घंटों की मेहनत लगती है. 18 से 20 किलो दूध पकाने के बाद सिर्फ 4.5 किलो रबड़ी तैयार होती है. जानिए इसकी खास रेसिपी, कीमत और स्वाद के पीछे छिपी दिलचस्प कहानी.
जालौर. आहोर की मशहूर रबड़ी का स्वाद लोगों को काफी पसंद आता है, लेकिन इसके पीछे होने वाली मेहनत भी उतनी ही खास है. राठी परिवार की यह रबड़ी पिछले 127 सालों से अपनी पहचान बनाए हुए है, शुद्ध गाय के दूध से तैयार होने वाली इस रबड़ी को बनाने में कई घंटे लगते हैं. करीब 20 किलो दूध को पकाने के बाद केवल 4.5 किलो रबड़ी तैयार होती है. रबड़ी बनाने की शुरुआत बड़ी कढ़ाई में दूध डालने से होती है. दूध को धीमी आंच पर लगातार पकाया जाता है, जैसे-जैसे दूध गर्म होता है, उसकी मलाई कढ़ाई के किनारों पर जमने लगती है. इस मलाई को धीरे-धीरे किनारों पर लगाया जाता है और बीच में दूध को पकाया जाता रहता है.
कई घंटे तक दूध को इसी तरह पकाने के बाद उसकी मात्रा कम होती जाती है और दूध गाढ़ा होने लगता है. इसके बाद कढ़ाई के किनारों पर जमा मलाई को सावधानी से वापस गाढ़े दूध में मिलाया जाता है. यही प्रक्रिया रबड़ी को उसका खास स्वाद और मलाईदार बनावट देती है. दुकान मालिक मुकेश कुमार राठी लोकल 18 को बताते हैं कि उनका प्रतिष्ठान करीब 127 साल पुराना है. यहां शुद्ध गाय के दूध से रबड़ी तैयार की जाती है. रोजाना करीब 10 से 12 किलो रबड़ी तैयार होती है, जबकि शादी समारोहों, पार्टियों और अन्य आयोजनों के लिए ऑर्डर मिलने पर ज्यादा मात्रा में भी रबड़ी बनाई जाती है. रबड़ी तैयार होने के बाद इसमें शक्कर मिलाई जाती है. इसके बाद इसे ठंडा किया जाता है और फिर ग्राहकों को परोसा जाता है.
करीब 18 से 20 किलो दूध से लगभग 4.5 किलो रबड़ी तैयार होती है. इसकी कीमत 450 रुपए प्रति किलो है, दुकान पर तैयार होने वाली इस रबड़ी की मांग स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहर से आने वाले ग्राहकों के बीच भी बनी रहती है. शादी और त्योहारों के सीजन में इसकी डिमांड और बढ़ जाती है. इन मौकों पर समारोहों और पारिवारिक आयोजनों के लिए बड़ी मात्रा में रबड़ी के ऑर्डर मिलते हैं. ऐसे में एक दिन में तैयार होने वाली रबड़ी की मात्रा भी बढ़ जाती है. रबड़ी की खासियत सिर्फ इसका स्वाद नहीं, इसे तैयार करने का पारंपरिक तरीका भी है. दूध को धीमी आंच पर घंटों पकाना, किनारों पर जमने वाली मलाई को संभालना और फिर उसे गाढ़े दूध में मिलाना ये पूरी प्रक्रिया रबड़ी को अलग पहचान देती है.