Ajab Gajab: बीकानेर में गजब का संयोग, एक ही कॉलेज में पति-पत्नी की 8 जोड़ियां, 4 कपल तो एक ही विभाग में कार्यरत

Ajab Gajab: बीकानेर में गजब का संयोग, एक ही कॉलेज में पति-पत्नी की 8 जोड़ियां, 4 कपल तो एक ही विभाग में कार्यरत


बीकानेर. पति-पत्नी के बीच बेहतर तालमेल और आपसी समझ किसी भी रिश्ते की मजबूती का आधार होती है. लेकिन जब जीवनसाथी घर के साथ-साथ कार्यस्थल पर भी साथ हो तो यह रिश्ता और खास बन जाता है. बीकानेर के संभाग के सबसे बड़े राजकीय डूंगर महाविद्यालय में कुछ ऐसा ही अनोखा नजारा देखने को मिलता है. यहां पढ़ाने वाले आठ ऐसे जोड़े हैं, जो आपस में पति-पत्नी हैं. ये सभी एक ही कॉलेज में विद्यार्थियों को शिक्षा देने का काम कर रहे हैं. खास बात यह है कि इनमें चार जोड़े ऐसे हैं, जो एक ही विभाग में साथ बैठकर काम करते हैं. यानी कॉलेज में पढ़ाने से लेकर विभागीय जिम्मेदारियां निभाने और घर लौटने तक इनका साथ बना रहता है.

ऐसे में इन जोड़ों के अनुभव भी खास हैं. इनका मानना है कि साथ काम करने से एक-दूसरे को समझने, सहयोग करने और बेहतर तालमेल बनाने में मदद मिलती है. जियोग्राफी विभाग में सह आचार्य डॉ. देवेश सहारण और उनकी पत्नी डॉ. श्वेता नेहरा भी इसी तरह का एक जोड़ा हैं. दोनों एक ही विभाग में कार्यरत हैं और पिछले 18 साल से साथ हैं. डॉ. श्वेता नेहरा बताती हैं कि उनके बीच बेहतर अंडरस्टैंडिंग है. वे प्रोफेशनल और पर्सनल लाइफ दोनों को अच्छे तरीके से संभाल रहे हैं. उनका मानना है कि युवाओं के रिश्तों में आपसी कोऑर्डिनेशन, म्यूचुअल अंडरस्टैंडिंग और धैर्य बहुत जरूरी है. आज की युवा पीढ़ी में धैर्य की कमी दिखाई देती है. कई बार किसी बात पर तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय शांत रहना चाहिए, क्योंकि कुछ चीजें समय के साथ अपने आप भी सुलझ जाती है.

साथ काम करने से आपसी समझ होती है और बेहतर

डॉ. देवेश सहारण बताते हैं कि एक ही जगह काम करने के कई फायदे हैं. दोनों को एक-दूसरे के काम करने के तरीके और जिम्मेदारियों की जानकारी रहती है. इससे प्रोफेशनल लाइफ में भी एक-दूसरे का सहयोग मिलता है. साथ काम करने से आपसी समझ और बेहतर होती है. शाम को चाय के समय साथ बैठकर दिनभर की बातें साझा करना भी अच्छा लगता है. उन्होंने बताया कि उनकी अरेंज मैरिज हुई थी और दोनों के परिवार एक-दूसरे को पहले से जानते थे. दोनों की जॉब पोस्टिंग भी साथ में हुई. घर के कामों में भी वे एक-दूसरे का सहयोग करते हैं. उनका कहना है कि घर और नौकरी दोनों की जिम्मेदारियों को आपसी सहयोग से अच्छे तरीके से संभाला जा सकता है.

एक ही विभाग में कार्यरत हैं डॉ. शेरसिंह कुड़ी और उनकी पत्नी डॉ. पूजा चौधरी

समाजशास्त्र विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. शेरसिंह कुड़ी और उनकी पत्नी डॉ. पूजा चौधरी भी एक ही विभाग में कार्यरत हैं. दोनों को इस प्रोफेशन में आए अभी छह महीने हुए हैं. डॉ. शेरसिंह बताते हैं कि एक ही जगह काम करने से दोनों एक-दूसरे की परिस्थितियों को बेहतर तरीके से समझ पाते हैं. वे घर की बात घर तक ही रखते हैं और कार्यस्थल की जिम्मेदारियों को अलग तरीके से निभाते हैं. उन्होंने बताया कि दोनों की अरेंज मैरिज हुई है. दोनों ने साथ में इंटरव्यू दिया था. इसी दौरान मुलाकात हुई और फिर परिवारों के बीच बातचीत के बाद शादी का फैसला हुआ. उनका मानना है कि आज महिलाएं घर और ऑफिस दोनों की जिम्मेदारियां निभा रही हैं, इसलिए पति-पत्नी के बीच सहयोग जरूरी है. नए जोड़ों में छोटी-मोटी तकरार होना सामान्य है, लेकिन इसका सबसे अच्छा समाधान बातचीत है। आपस में बैठकर बात करने से ही समस्याओं का हल निकलता है.

डूंगर कॉलेज में ये आठ जोड़े निभा रहे हैं जिम्मेदारी

प्राचार्य राजेंद्र पुरोहित और अनिला पुरोहित: राजेंद्र पुरोहित जूलॉजी विभाग में प्रोफेसर हैं, जबकि उनकी पत्नी अनिला पुरोहित इतिहास विभाग में प्रोफेसर हैं.

प्रोफेसर नरेंद्र नाथ और लीना शरण: नरेंद्र नाथ राजनीति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष हैं, जबकि उनकी पत्नी लीना शरण जूलॉजी विभाग में प्रोफेसर हैं.

प्रोफेसर अनु शर्मा और सुमनलता त्रिपाठी: अनु शर्मा जूलॉजी विभाग में प्रोफेसर हैं, जबकि उनकी पत्नी सुमनलता त्रिपाठी बॉटनी विभाग में कार्यरत हैं.

डॉ. देवेश सहारण और डॉ. श्वेता नेहरा: दोनों जियोग्राफी विभाग में सह आचार्य हैं.

प्रोफेसर सुखाराम और उषा लामरोर: दोनों इतिहास विभाग में प्रोफेसर हैं.

डॉ. महेंद्र थोरी और डॉ. सुनीता मंडा: दोनों समाजशास्त्र विभाग में सहायक आचार्य हैं.

डॉ. विजयप्रकाश और डॉ. विनीता मिर्धा: विजयप्रकाश जियोग्राफी विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं, जबकि उनकी पत्नी विनीता मिर्धा फिजिक्स विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं.

डॉ. शेरसिंह कुड़ी और डॉ. पूजा चौधरी: दोनों समाजशास्त्र विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं.

चार जोड़े एक ही विभाग में साथ कर रहे काम

कॉलेज के इन आठ जोड़ों में चार जोड़े ऐसे हैं, जो एक ही विभाग में कार्यरत हैं. इनमें डॉ. देवेश सहारण और डॉ. श्वेता नेहरा जियोग्राफी विभाग में, प्रोफेसर सुखाराम और उषा लामरोर इतिहास विभाग में, डॉ. महेंद्र थोरी और डॉ. सुनीता मंडा समाजशास्त्र विभाग में तथा डॉ. शेरसिंह कुड़ी और डॉ. पूजा चौधरी भी समाजशास्त्र विभाग में साथ काम कर रहे हैं.



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