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Haridwar Ardh Kumbh 2027: हरिद्वार में साल 2027 में होने वाले अर्धकुंभ की तैयारियां तेज हो गई हैं. श्रद्धालुओं को स्नान के दौरान परेशानी न हो और मुख्य स्नान पर्वों पर घाटों में भीड़ का दबाव कम रहे, इसके लिए गंग नहर के दोनों ओर नए घाट बनाए जा रहे हैं. खास बात यह है कि हर की पौड़ी समेत शहर में पहले से कई घाट होने के बावजूद मेला प्रशासन करोड़ों रुपये की लागत से नए घाट तैयार करा रहा है. अपर मेलाधिकारी दयानंद सरस्वती ने बताया कि करीब 1.75 किलोमीटर लंबे घाटों का निर्माण 15 नवंबर तक पूरा करने का लक्ष्य है. इसके अलावा छह नए पुल भी बनाए जा रहे हैं.
हरिद्वार: 14 जनवरी 2027 से हरिद्वार में अर्धकुंभ मेले की शुरुआत होने जा रही है. इसे लेकर मेला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं. मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए शहर में कई बड़े निर्माण कार्य किए जा रहे हैं. कहीं सड़कों को चौड़ा किया जा रहा है तो कहीं नए घाट और पुल बनाए जा रहे हैं. इसके अलावा मेला नियंत्रण भवन-2 का निर्माण भी चल रहा है. उत्तराखंड गंग नहर के दोनों किनारों पर भी नए घाट बनाए जा रहे हैं. दशहरे की रात नहर को साफ-सफाई, सिल्ट निकालने और पुराने घाटों की मरम्मत के लिए बंद किया गया था. इसके बाद शंकराचार्य चौक से आगे नहर के दोनों तरफ घाट बनाने का काम तेजी से शुरू किया गया.
अर्धकुंभ की तैयारियों के तहत उत्तराखंड गंग नहर के दोनों किनारों पर कुल 1.75 किलोमीटर लंबे नए घाट बनाए जा रहे हैं. अपर मेलाधिकारी दयानंद सरस्वती ने बताया कि इन घाटों का निर्माण 15 नवंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. इसके लिए काम तेजी से कराया जा रहा है. इन घाटों के बनने से अर्धकुंभ के दौरान श्रद्धालुओं को स्नान के लिए अतिरिक्त जगह मिल सकेगी. मुख्य स्नानों के समय घाटों पर भीड़ का दबाव कम करने के लिए भी इनका निर्माण कराया जा रहा है.
घाटों के साथ ही हरिद्वार में 6 नए पुलों का निर्माण भी किया जा रहा है. अपर मेलाधिकारी दयानंद सरस्वती के मुताबिक, ये पुल महत्वपूर्ण स्थानों पर बनाए जा रहे हैं. इनका काम 20 दिसंबर तक पूरा करने का लक्ष्य है. अर्धकुंभ के लिए चल रहे सभी स्थायी निर्माण कार्यों को 10 से 15 दिसंबर तक पूरा करने की तैयारी है.
मेला नियंत्रण भवन-2 और पुलों की तकनीकी जांच
अर्धकुंभ के लिए मेला नियंत्रण भवन-2 का निर्माण भी किया जा रहा है. इसके साथ ही निर्माणाधीन पुलों और सीसीआर भवन-2 की तकनीकी जांच आईआईटी रुड़की से कराई जा रही है. अपर मेलाधिकारी ने बताया कि सभी स्थायी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और उनकी प्रगति पर नजर रखी जा रही है. काम की जांच भी की जा रही है, ताकि निर्माण कार्य तय समय में पूरे किए जा सकें.
हरिद्वार में पहले से ही हरकी पौड़ी, ब्रह्मकुंड घाट, मालवीय घाट, सुभाष घाट और कुशावर्त घाट समेत कई घाट हैं. इसके बावजूद अर्धकुंभ के लिए नए घाट बनाए जा रहे हैं. इसकी वजह मुख्य स्नानों के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ है. अपर मेलाधिकारी दयानंद सरस्वती ने बताया कि अर्धकुंभ में बड़ी संख्या में श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचेंगे. ऐसे में सभी को स्नान करने की सुविधा मिल सके और किसी एक जगह भीड़ का ज्यादा दबाव न पड़े, इसके लिए नए घाट तैयार किए जा रहे हैं. नहर बंदी के दौरान घाटों से जुड़े सभी निर्माण कार्य समय पर पूरे करने का लक्ष्य रखा गया है.