पटना. सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के विधान परिषद चुनाव परिणाम और पूरे चुनावी घटनाक्रम के बाद जदयू के प्रत्याशी आनंद पुष्कर ने सोशल मीडिया पर लंबा पोस्ट लिखकर बीजेपी के कुछ नेताओं की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं. आनंद पुष्कर इस सीट पर हार गए हैं और यहां से निर्दलीय राहुल राज जीते हैं. हार के बाद उन्होंने सांसद राजीव प्रताप रूडी और राधा मोहन सिंह का नाम लेकर पूछा है कि जब वोट लेना हो तो नीतीश कुमार के विकास के नाम पर वोट मांगते हैं, लेकिन जब गठबंधन के कार्यकर्ता के साथ खड़े होने की बारी आती है तो गठबंधन धर्म कहां चला जाता है. आनंद पुष्कर ने चुनाव के दौरान अपने साथ राजनीतिक छल, प्रपंच और साजिश किए जाने की बात कही है. उन्होंने साफ कहा है कि नीतीश कुमार के प्रति उनकी निष्ठा आज भी अटूट है, लेकिन भाजपा के कुछ नेताओं के रवैये पर उनके सवाल भी उतने ही स्पष्ट हैं.
क्या लिखा आनंद पुष्कर ने – BJP नेताओं पर सीधा निशाना?
आनंद पुष्कर ने लिखा, सबसे पहले माननीय सांसद श्री राजीव प्रताप रूडी जी की भूमिका पर बात करना चाहूंगा. जब स्वयं चुनाव में वोट लेने की बारी आती है, तब आदरणीय नीतीश कुमार जी के नेतृत्व में बिहार में हुए विकास कार्यों को आगे रखकर जनता से समर्थन मांगा जाता है. लेकिन जब गठबंधन के एक समर्पित कार्यकर्ता और जदयू समर्थित प्रत्याशी के साथ खड़े होने की बारी आती है, तब गठबंधन धर्म की मर्यादा कहां चली जाती है. इसी प्रकार मोतिहारी के माननीय सांसद श्री राधा मोहन सिंह जी की भूमिका भी आज चर्चा और समीक्षा का विषय है.
मैं कम्युनिस्ट नहीं, कल भी JDU का सिपाही था-आनंद पुष्कर
अपनी विचारधारा पर उठ रहे सवालों पर आनंद पुष्कर ने लिखा, मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि आनंद पुष्कर कोई ऐसा व्यक्ति नहीं है, जो आज जदयू का सिपाही बना हो. मैं कल भी जदयू का सिपाही था, आज भी हूं और आगे भी रहूंगा. मेरा राजनीतिक जुड़ाव वर्षों पुराना है. मुझे नीतीश कुमार जी का बिहार पसंद है. जो लोग मुझे कम्युनिस्ट विचारधारा से जोड़ रहे हैं, वे इतिहास के पन्ने पलट लें. मेरे पूज्य पिताजी स्वर्गीय केदारनाथ पांडेय जी ने पूरा जीवन शिक्षक समाज की सेवा में दिया. नीतीश कुमार, स्वर्गीय सुशील मोदी के साथ उनके संबंध इतिहास में दर्ज हैं. विधान परिषद की कार्यवाही उठाकर देख लीजिए.
वामपंथी होने के आरोपों पर आनंद पुष्कर ने जदयू का पुराना पत्र जारी किया.
चुनाव में क्या खेल हुआ, पर्दे के पीछे की बात
आनंद पुष्कर ने बड़ा खुलासा करने का दावा करते हुए लिखा, चुनाव के दौरान लगातार आश्वासन दिया जाता रहा कि वर्तमान विधान पार्षद से बातचीत चल रही है, उन्हें चुनाव लड़ने से रोका जाएगा और वे गठबंधन के निर्णय को स्वीकार कर लेंगे. लेकिन अंततः वे निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतर गए. आज उन्हें भाजपा में शामिल कराया जा रहा है तो क्या यह सब पहले से तय था? गठबंधन साथियों को अंधेरे में क्यों रखा गया? एनडीए बैठक के फैसले का पालन नहीं हुआ? उन्होंने आगे लिखा, एनडीए की बैठक में निर्णय लिया गया था कि सभी नेता और जनप्रतिनिधि विद्यालयों का भ्रमण करेंगे, शिक्षकों से संवाद करेंगे और NDA प्रत्याशी के पक्ष में समर्थन जुटाएंगे. लेकिन भाजपा के अनेक सांसदों और विधायकों ने इस निर्णय के अनुरूप सक्रियता नहीं दिखाई. न विद्यालयों का अपेक्षित भ्रमण हुआ और न ही शिक्षकों के बीच वैसी उपस्थिति दिखी.
सम्राट चौधरी सरकार भी नीतीश की देन
आनंद पुष्कर ने अंत में लिखा, आज बिहार में माननीय मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी जी के नेतृत्व वाली सरकार भी नीतीश कुमार जी के राजनीतिक योगदान और उनके नेतृत्व से बनी परिस्थितियों का परिणाम है. ऐसे में सहयोगी दलों के सम्मान, आपसी विश्वास और गठबंधन की मर्यादा बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है. मुझे सबसे अधिक पीड़ा इस बात की है कि भाजपा के कुछ नेताओं ने चुनाव में नीतीश जी के नाम का सहारा लेकर समर्थन प्राप्त किया, लेकिन जब उन्हीं के सहयोगी दल के कार्यकर्ता के साथ खड़े होने की बारी आई, तब वैसा सहयोग नहीं दिखा. यह केवल आनंद पुष्कर का सवाल नहीं, बल्कि गठबंधन में काम करने वाले हर समर्पित कार्यकर्ता के सम्मान का सवाल है.
नीतीश कुमार, संजय झा और उमेश कुशवाहा को भी किया टैग
सबसे खास बात यह है कि आनंद पुष्कर ने अपनी पोस्ट में जदयू के शीर्ष नेतृत्व को भी टैग किया है. इनमें पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार, राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा और बिहार प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा शामिल हैं. इसके अलावा उन्होंने जदयू और एनडीए से जुड़े अन्य नेताओं को भी टैग किया है. यानी साफ है कि अपने पोस्ट के जरिए उन्होंने अपनी नाराजगी सीधे पार्टी नेतृत्व तक पहुंचाई है. खास बात यह है कि भाजपा के कुछ नेताओं पर सवाल उठाने के साथ ही उन्होंने नीतीश कुमार के प्रति अपनी अटूट निष्ठा भी दोहराई है.