इंडियन रनर या खाकी कैंपबेल, बत्तख पालन के लिए कौन है सबसे उत्तम नस्ल, यहां से लीजिए पूरी जानकारी

इंडियन रनर या खाकी कैंपबेल, बत्तख पालन के लिए कौन है सबसे उत्तम नस्ल, यहां से लीजिए पूरी जानकारी


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इंडियन रनर या खाकी कैंपबेल, बत्तख पालन के लिए कौन है सबसे उत्तम नस्ल, जानें

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बत्तख पालन के लिए इंडियन रनर और खाकी कैंपबेल दोनों बेहतरीन नस्लें हैं. खाकी कैंपबेल साल में 300 तक अंडे देती है. यह अंडा उत्पादन के लिए सबसे उत्तम है. वहीं, इंडियन रनर भी अच्छी कमाई देती है. किसान अपनी जरूरत के अनुसार सही नस्ल चुनकर शानदार मुनाफा कमा सकते हैं.

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पश्चिम चंपारणः भारत में बत्तख पालन तेजी से एक लाभ का सौदा बनता जा रहा है. ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कमर्शियल फार्मिंग, दोनों ही जगहों पर बत्तख पालन को बढ़ावा मिल रहा है. हालांकि, सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि किसान भाई अपनी जरूरतों और क्षेत्र के हिसाब से सही नस्ल का चुनाव करें. कुछ लोग बत्तख की इंडियन रनर नस्ल का पालन करते हैं, तो कुछ लोग खाकी कैंपबेल नस्ल का पालन करते हैं. आइए जानते हैं कि इन दोनों में क्या मुख्य अंतर है और किसानों के लिए कौन सी नस्ल अधिक फायदेमंद है.

इंडियन रनर: ज़िले के मझौलिया प्रखंड निवासी 25 वर्षीय आर्यन ने बत्तख की इंडियन रनर नस्ल का पालन किया है. उनका कहना है कि इस नस्ल की सबसे बड़ी पहचान इसकी अनोखी शारीरिक बनावट है. यह पेंगुइन की तरह बिल्कुल सीधी खड़ी होकर चलती है. इनका शरीर पतला, लंबा और गर्दन पतली होती है. यही वजह है कि इन्हें “पेंगुइन डक” भी कहा जाता है.एक इंडियन रनर बत्तख सालभर में लगभग 200 से 220 अंडे देती है.इसके अंडे आकार में अच्छे होते हैं.

खाकी कैंपबेल: इनकी बनावट सामान्य बत्तखों जैसी होती है. इनका शरीर चौड़ा, पीठ थोड़ी उठी हुई और कद मध्यम होता है. इनका रंग खाकी (हल्का भूरा और जैतून जैसा मिश्रण) होता है, जो इन्हें घास-फूस या खुले मैदान में आसानी से छिपने में मदद करता है. अंडा उत्पादन मामले में इस नस्ल का कोई मुकाबला नहीं है. इसे दुनिया की सबसे अच्छी अंडा उत्पादक बत्तखों में गिना जाता है. उचित देखभाल और सही पोषण मिलने पर एक खाकी कैंपबेल बत्तख सालभर में लगभग 250 से 300 अंडे तक दे सकती है.

कुल मिलाकर कहें तो अंडों के कारोबार के लिए इंडियन रनर की तुलना में खाकी कैंपबेल अधिक उन्नत और लाभप्रद चुनाव का सौदा है. हालांकि आर्यन सहित ज़िले के कुछ अन्य बत्तख पालक इंडियन रनर का पालन कर भी सालाना 50 लाख तक का इनकम बना रहे हैं.



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