अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव की सरगर्मियां चरम पर हैं और रैलियों के मंच से नेताओं के तीखे बयान आतिशबाजी की तरह छूट रहे हैं. लेकिन फ्लोरिडा के डेटोना बीच में आयोजित एक चुनावी रैली के दौरान पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कुछ ऐसा कह दिया कि पूरा अमेरिका सन्न रह गया. अपनी विरोधी और डेमोक्रेटिक पार्टी की सांसद इल्हान ओमर पर निशाना साधते-साधते ट्रंप अचानक अपने ही परिवार और अपनी सगी बहनों पर आ गए. ट्रंप ने रैली में भीड़ के सामने कहा कि भले ही उनकी बहनें बहुत खूबसूरत थीं, लेकिन उन्होंने कभी उनसे शादी करने या रोमांटिक होने के बारे में नहीं सोचा.
डेटोना बीच रैली में ट्रंप का वो बयान, जिसने सबको हैरान कर दिया
ट्रंप का ये अटपटा और अजीबोगरीब बयान असल में इल्हान ओमर पर सालों से लग रहे उन आरोपों का ताना था, जिनमें कहा जाता है कि ओमर ने अमेरिका की नागरिकता और वीजा हासिल करने के लिए अपने सगे भाई से शादी की थी. ट्रंप का ये बयान सिर्फ राजनीतिक कीचड़ उछालने तक सीमित नहीं है, बल्कि अब ये मामला कैपिटल हिल यानी अमेरिकी संसद से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक एक बड़ा संवैधानिक ड्रामा बनने जा रहा है.
30 अक्टूबर को फ्लोरिडा के डेटोना बीच में रिपब्लिकन समर्थकों को संबोधित करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने डेमोक्रेटिक सांसद इल्हान ओमर पर तीखा हमला बोला. ओमर पर लगे पुराने आरोपों का जिक्र करते हुए ट्रंप ने मंच से अपने परिवार का उदाहरण देने लगे.
ट्रंप ने क्या कहा ‘क्या आप यकीन कर सकते हैं? एक बार किसी ने मुझसे पूछा कि क्या मैंने अपनी बहन से शादी की है? जानते हैं मैंने क्या कहा? नहीं! मैं कसम खाता हूं, मैंने अपनी बहन से शादी नहीं की’.
ट्रंप इतने पर ही नहीं रुके, उन्होंने अपनी दो दिवंगत और जीवित बहनों का जिक्र करते हुए कहा, ‘मेरी दो प्यारी बहनें थीं, मैरिएन और एलिजाबेथ. एलिजाबेथ बहुत प्यारी हैं. लेकिन मैंने कभी उन दोनों में से किसी को प्रपोज नहीं किया’. वो आगे और भी ऊल-जलूल बातें हो गए, ट्रंप ने कहा कि ‘दोनों बहनें दिखने में काफी आकर्षक थीं लेकिन इसके बावजूद मेरे मन में कभी कोई रोमांटिक भावना नहीं आई’.
इल्हान ओमर पर क्या हैं आरोप और ‘भाई से शादी’ वाला विवाद क्या है?
ट्रंप का ये अजीबोगरीब बयान सीधे तौर पर इल्हान ओमर को कटघरे में खड़ा करने के लिए था, ताकि जनता के बीच ये संदेश दिया जा सके कि ओमर का अतीत कितना विवादित रहा है.
सोमालिया में जन्मीं और मिनेसोटा से डेमोक्रेटिक पार्टी की सांसद इल्हान ओमर अमेरिकी राजनीति की सबसे चर्चित और विवादित हस्तियों में से एक हैं. कंजर्वेटिव यानी रिपब्लिकन गुटों में सालों से ये दावा किया जाता रहा है कि ओमर ने इमिग्रेशन के नियमों का फायदा उठाने के लिए अपने पूर्व पति अहमद नूर सईद एल्मी से शादी की थी, जो कथित तौर पर उनका सगा भाई है.
हाल ही में 21 अक्टूबर को मशहूर पत्रकार क्रिस हेज को दिए इंटरव्यू में जब इल्हान ओमर से पूछा गया कि क्या उनके पूर्व पति का उनसे कोई खून का रिश्ता या पारिवारिक संबंध था, तो ओमर ने कहा, ‘जहां तक मुझे पता है, नहीं’.
ट्रंप ने ओमर के इसी जवाब को हथियार बना लिया. ट्रंप का कहना था कि ऐसे गंभीर सवाल का जवाब सीधा ‘हां’ या ‘ना’ में होना चाहिए. ‘जहां तक मुझे पता है’ कहना ही अपने आप में शक पैदा करता है. इसी के बाद ट्रंप ने अपनी बहनों वाला उदाहरण पेश किया.
इल्हान ओमर इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करती रही हैं और इसे राजनीतिक साजिश व इस्लाम-विरोधी मानसिकता का हिस्सा बताती हैं. आधिकारिक तौर पर अभी तक ऐसा कोई सार्वजनिक सबूत सामने नहीं आया है जो ये साबित कर सके कि उनके पूर्व पति उनके भाई थे.
कौन हैं डोनाल्ड ट्रंप की बहनें, जिनका जिक्र मंच से हुआ?
- मैरिएन ट्रंप बैरी: मैरिएन अमेरिका में कई सालों तक एक जानी-मानी फेडरल जज रहीं. 13 नवंबर 2023 को 86 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया था.
- एलिजाबेथ ट्रंप ग्राउ: एलिजाबेथ पूर्व में बैंकिंग सेक्टर में काम करती थीं. वह आमतौर पर लाइमलाइट और राजनीति से दूर ही रहती हैं.
ओमर की नागरिकता पर कसता शिकंजा: क्या जा सकती है सांसदी?
ट्रंप का हमला सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं है. अब फेडरल एजेंसियां इस बात की जांच कर रही हैं कि क्या इल्हान ओमर ने अमेरिका की नागरिकता हासिल करते समय अपने पिता के दस्तावोजों और इमिग्रेशन पेपर्स में कोई धोखाधड़ी की थी.
- संवैधानिक योग्यता पर सवाल: अमेरिकी संविधान के मुताबिक, हाउस ऑफ रिप्रिजेंटेटिव्स का सदस्य बनने के लिए कम से कम 25 साल की उम्र, 7 साल की अमेरिकी नागरिकता और संबंधित राज्य का निवासी होना जरूरी है.
- ‘हां या ना’ वाली स्थिति: कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि नागरिकता कोई ग्रे-एरिया नहीं है. ये एक बाइनरी स्थिति है, या तो आप अमेरिका के कानूनी नागरिक हैं, या फिर नहीं हैं. अगर जांच में ये साबित होता है कि उनके इमिग्रेशन पेपर्स फर्जी थे, तो उनकी नागरिकता ही अवैध ठहराई जा सकती है.
सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला और ‘पावोल केस’ का पेंच
रिपब्लिकन नेता इल्हान ओमर को संसद से बाहर का रास्ता दिखाने के लिए कानूनी रास्ते तलाश रहे हैं. लेकिन इसके रास्ते में 1967 का मशहूर ‘पावोल बनाम मेककोर्मेक’ सुप्रीम कोर्ट केस आ सकता है.
क्या था पावोल केस: 1967 में अमेरिकी संसद ने फंड के दुरुपयोग के आरोपों के चलते सांसद एडम क्लेटन पावोल को संसद में बैठने से रोक दिया था. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया था कि अगर कोई व्यक्ति संविधान में तय न्यूनतम योग्यताओं को पूरा करता है, तो संसद उसे चुने जाने के बाद बाहर नहीं रख सकती.
एक्सपर्ट्स की राय: पूर्व डिप्टी असिस्टेंट अटॉर्नी जनरल जॉन यू और कानूनी विद्वान कली स्टिमसन का मानना है कि पावोल केस ओमर को नहीं बचा पाएगा. पावोल केस संसद को मनमानी योग्यताएं जोड़ने से रोकता है, लेकिन ‘नागरिकता’ तो संविधान की मूल शर्त है. अगर ओमर कानूनी रूप से नागरिक ही साबित नहीं होती हैं, तो संसद उन्हें तुरंत बाहर कर सकती है.
निष्कासन का दूसरा रास्ता: ‘जॉर्ज सैंटोस’ वाला लॉजिक लागू करने की तैयारी
अगर नागरिकता के आधार पर ओमर को नहीं रोका जा सका, तो रिपब्लिकन के पास दूसरा रास्ता उन्हें ‘अनाचार या धोखाधड़ी’ के आरोप में वोटिंग कराकर निष्कासित करने का है. इसके लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होती है.
रैंडी फाइन की धमकी: फ्लोरिडा से रिपब्लिकन सांसद रैंडी फाइन ने साफ कहा है कि अगर ओमर की नागरिकता या कागजात फर्जी पाए जाते हैं, तो वो तुरंत उनके निष्कासन की मांग करेंगे.
सैंटोस केस का उदाहरण: साल 2023 में रिपब्लिकन सांसद जॉर्ज सैंटोस को चुनाव से पहले किए गए झूठ और वित्तीय धोखाधड़ी के लिए संसद से निष्कासित कर दिया गया था. एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर ओमर ने संसद में रहते हुए अपने पुराने झूठे दस्तावोजों को बनाए रखा तो उन पर भी सैंटोस वाला नियम लागू करके निष्कासन की कार्रवाई की जा सकती है.