इस मंदिर में मां काली देती हैं संतान का आशीर्वाद! 7 दिन में पूरी होती मन्नत
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सीधी जिले का एक ऐसा मंदिर जहां लोगों की मान्यता है की मां काली के पास सच्चे मन से शीश झुकाने वाले लोगों की सभी मन्नतें पूर्ण होती हैं लोगों ने बताया कि मंदिर बनने के बाद मां काली का अचानक उद्गम हुआ और काफी मानता भी है.नीय लोगों का दावा है कि माता के आशीर्वाद से कई भक्तों की इच्छाएं पूरी हुई हैं.
मध्य प्रदेश के सीधी जिले के ग्राम शिवपुरवा में मां काली का एक ऐसा मंदिर है, जहां भक्तों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है. स्थानीय लोगों की मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से मां काली के दरबार में शीश झुकाता है, उसकी मनोकामना माता पूरी करती हैं. खास बात यह है कि यहां संतान की इच्छा लेकर आने वाले दंपती भी माता के दरबार में मन्नत मांगते हैं. स्थानीय लोगों का दावा है कि माता के आशीर्वाद से कई भक्तों की इच्छाएं पूरी हुई हैं. यही वजह है कि सीधी के अलावा दूसरे राज्यों से भी श्रद्धालु यहां दर्शन करने पहुंचते हैं.
सपने में मिला था मंदिर निर्माण का संकेत
लोकल 18 से बातचीत में स्थानीय निवासी निर्मला सिंह ने मंदिर के निर्माण से जुड़ी कहानी बताई. उनके मुताबिक, कुछ समय पहले उनके बेटे की तबीयत काफी खराब हो गई थी. इसी दौरान उन्हें स्वप्न आया कि मां काली के मंदिर का निर्माण कराया जाए. इसके बाद उन्होंने वर्ष 2014 में मंदिर निर्माण का कार्य शुरू कराया.निर्मला सिंह बताती हैं कि जैसे ही मंदिर का निर्माण कार्य पूरा हुआ, वहां मां काली की उपस्थिति को लेकर एक विशेष घटना हुई। इसके बाद से स्थानीय लोगों की आस्था मंदिर के प्रति लगातार बढ़ती चली गई. धीरे-धीरे यह मंदिर आसपास के गांवों के साथ दूसरे क्षेत्रों के श्रद्धालुओं के बीच भी प्रसिद्ध होने लगा.
सात दिन में पूरी होती है छोटी मन्नत की मान्यता
निर्मला सिंह के मुताबिक, भक्तों के बीच यह मान्यता भी प्रचलित है कि सच्चे मन से मांगी गई छोटी मनोकामना सात दिनों के भीतर पूरी हो जाती है. इसी विश्वास के चलते बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं. कोई परिवार की खुशहाली, कोई संतान सुख तो कोई अपनी दूसरी परेशानियों से मुक्ति की कामना लेकर माता के दरबार में माथा टेकता है.
कई राज्यों से दर्शन करने आते हैं श्रद्धालु
सीधी जिले के ग्राम शिवपुरवा स्थित मां काली का यह मंदिर अब आस्था का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है. यहां दूर-दूर से लोग दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। भक्त नारियल बांधकर अपनी मन्नत मांगते हैं और मनोकामना पूरी होने पर माता का आभार जताने दोबारा दर्शन करने आते हैं. स्थानीय लोगों की मान्यता और मंदिर से जुड़ी कहानी ने इसे क्षेत्र में विशेष पहचान दिलाई है.