बांग्‍लादेश पर आने वाली है नई आफत, डराने वाली है रिपोर्ट – bangladesh will be in big trouble economic crisis this winter millions of people life

बांग्‍लादेश पर आने वाली है नई आफत, डराने वाली है रिपोर्ट – bangladesh will be in big trouble economic crisis this winter millions of people life


Last Updated:

Bangladesh News: होर्मुज स्‍ट्रेट क्राइसिस ने दुनियाभर में उथल-पुथल मचा रखी है. ऊर्जा संकट की वजह से कई देशों की हालत बेहद नाजुक हो गई है. पड़ोसी मुल्‍क बांग्‍लादेश भी उन्‍हीं देशों में से एक है. अब एक ऐसी रिपोर्ट सामने आई है, जो ढाका के लिए किसी महासंकट से कम नहीं.

Zoom

बांग्‍लादेश की आर्थिक स्‍थ‍िति आने वाले दिनों में खराब होने की आशंका है.

Bangladesh News: बांग्लादेश में आगामी सर्दियों के दौरान महंगाई का नया दौर शुरू होने की आशंका है. वैश्विक स्‍तर पर तेल की कीमतों में वृद्धि और कृषि उत्पादन लागत बढ़ने से खाद्य पदार्थों के दाम बढ़ सकते हैं. बांग्लादेश की एक नई रिपोर्ट में यह चेतावनी देते हुए सरकार से कमजोर वर्गों को राहत देने के लिए सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और बाजार प्रबंधन में सुधार करने का आग्रह किया गया है. बांग्लादेश के समाचार पत्र ‘द डेली स्टार’ की रिपोर्ट के मुताबिक, अर्थशास्त्रियों ने कहा है कि बढ़ती जीवनयापन लागत से गरीब और कमजोर परिवारों को बचाने के लिए आर्थिक विकास का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुंचाना जरूरी है. उन्होंने चेतावनी दी कि आधिकारिक गरीबी आंकड़ों में शामिल नहीं होने वाले परिवार भी आर्थिक दबाव से जूझ सकते हैं. ऐसे परिवार दैनिक खर्च पूरे करने के लिए सोना, आभूषण और अन्य संपत्तियां बेचने या कर्ज लेने को मजबूर हो सकते हैं.

नागरिक समाज के एक मंच द्वारा आयोजित चर्चा में बांग्लादेश इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट स्टडीज (बीआईडीएस) के महानिदेशक एकेएम इनामुल हक ने कहा कि नीति निर्माताओं को यह मानकर नहीं चलना चाहिए कि आर्थिक स्थिति जल्द सुधर जाएगी. उन्होंने मौजूदा परिस्थितियों में और गिरावट की आशंका के लिए तैयार रहने की जरूरत बताई. हक के अनुसार, तेल की कीमतों में वृद्धि से उर्वरक, कीटनाशक और कृषि संबंधी अन्य सामग्री महंगी हो गई हैं. इससे खेती की उत्पादन लागत लगभग दोगुनी हो गई है और खाद्य कीमतों में वृद्धि की आशंका बढ़ गई है. उन्होंने ग्रामीण परिवारों की मौसमी आय में अनिश्चितता को देखते हुए सार्वजनिक खाद्य वितरण प्रणाली की समीक्षा करने का सुझाव दिया.

खतरनाक लेवल पर लोन का प्रतिशत

इनामुल हक ने आधिकारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में कर्ज का स्तर 51 प्रतिशत तक पहुंच गया है. महानगरों में यह 32 प्रतिशत और अन्य शहरी क्षेत्रों में 40 प्रतिशत है. हक ने कहा कि यदि सरकारी व्यवस्था का ध्यान मुख्य रूप से शहरी क्षेत्रों पर केंद्रित रहा, तो ग्रामीण परिवारों की वित्तीय परेशानियों और आय संबंधी अनिश्चितताओं को दूर करना मुश्किल होगा. उन्होंने बाजार निगरानी मजबूत करने और आपूर्ति श्रृंखला में सुधार की जरूरत पर भी जोर दिया. उनके मुताबिक, बाजार व्यवस्था ठीक से काम नहीं करेगी तो केवल मूल्य आयोग बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा.

खस्‍ताहाल इकोनोमी

ढाका विश्वविद्यालय की अर्थशास्त्र की प्रोफेसर सायमा हक बिदिशा ने कहा कि यदि आर्थिक विकास असमानता कम नहीं करता और समावेशी नहीं होता, तो वह खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा आम लोगों तक विकास का लाभ पहुंचाने में सक्षम नहीं होगा. उन्होंने विशेष रूप से अनौपचारिक क्षेत्र के श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन व्यवस्था लागू करने की मांग की. उनके मुताबिक, न्यूनतम वेतन का दायरा कपड़ा उद्योग से आगे बढ़ाकर अन्य क्षेत्रों के श्रमिकों तक भी पहुंचाया जाना चाहिए. इस बीच, एक अन्य रिपोर्ट में बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था के सामने धीमी वृद्धि, बढ़ते व्यापार घाटे और बैंकिंग क्षेत्र की कमजोरियों सहित तीन परस्पर जुड़ी चुनौतियों का उल्लेख किया गया है. विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में बांग्लादेश की आर्थिक वृद्धि दर घटकर 3.4 प्रतिशत रह गई. वित्त वर्ष 2026-27 में भी इसके लगभग इसी स्तर पर रहने का अनुमान है, जो सरकार के 6.5 प्रतिशत के लक्ष्य से काफी कम है.



Source link