अपनी पत्नी को ही दे दी चुनौती… बेलारूस के विपक्ष में आखिर किस बात की रार?
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बेलारूस में विपक्ष की प्रमुख नेता स्वियातलाना त्सिखानौस्काया पर उनके पति सियारही त्सिखानौस्की ने ही सवाल उठाए हैं. सियारही अभी अमेरिका में हैं वहीं से ब्लॉग लिखते हैं. उन्होंने 2020 में गिरफ्तार कर 18 साल की सजा सुनाई गई थी, लेकिन 5 साल में ही उन्हें रिहा कर दिया गया.
बेलारूस में विपक्ष की नेता स्वियातलाना त्सिखानौस्काया, जिन पर उनके पति ने ही सवाल उठाए हैं. (फाइल फोटो-रॉयटर्स)
बेलारूस में राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको के खिलाफ लोकतंत्र की लड़ाई लड़ने वाले विपक्ष में ही रार बढ़ गई है. हैरानी की बात ये है कि यहां विपक्ष को लीड करने वाली प्रमुख नेता स्वियातलाना त्सिखानौस्काया के पति ने ही उनके खिलाफ बिगुल बजा दिया है.पति सियारही त्सिखानौस्की का कहना है कि उनकी पत्नी को विपक्ष के नेता के तौर पर आम लोगों ने नहीं चुना है. उन्होंने पत्नी की राजनीतिक भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं.
सियारही त्सिखानौस्की 48 साल के एक ब्लॉगर और राजनीतिक कार्यकर्ता हैं. लंबे समय से वह बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको के आलोचक रहे हैं. मई 2020 में उसे गिरफ्तार कर लिया गया था. अब रिहा होने के बाद उन्होंने आगामी राष्ट्रपति चुनाव में खुद लुकाशेंको को चुनौती देने का ऐलान किया.
सियारही त्सिखानौस्की की पत्नी स्वियातलाना त्सिखानौस्काया ही विपक्ष की नेता हैं. उन्होंने पति की गिरफ्तारी के बाद ही राजनीतिक मोर्चा संभाला था और उम्मीदवार बन गईं थीं. अगस्त 2020 में जब लुकाशेंको को विजेता घोषित किया गया था तो विपक्ष ने बड़े पैमाने पर चुनावी धांधली का आरोप लगाया था. उस समय जैसे प्रदर्शन हुए थे, वे बेलारूस के इतिहास में कभी नहीं हुए थे. हालांकि सरकार ने कार्रवाई कर इन्हें कुचल दिया था. बाद में स्वियातलाना त्सिखानौस्काया भी बेलारूस से बाहर चली गईं और निर्वासन में रहकर लोकतांत्रिक आंदोलन का प्रमुख चेहरा बन गईं. दिसंबर 2021 में सियारही को बड़े पैमाने पर अशांति फैलाने के आरोप में 18 साल जेल की सजा सुनाई गई. हालांकि पांच साल बाद ही जून 2025 में उन्हें रिहा कर दिया गया, लेकिन जबरन बेलारूस से बाहर भेज दिया गया.
जेल से बाहर आने के करीब 14 महीने बाद सियारही ने अपना यूट्यूब चैनल दोबारा सक्रिय कर लिया है. अपने लाइवस्ट्रीम के जरिए वह लगातार बेलारूस की लुकाशेंको सरकार की आलोचना कर रहे हैं. हालांकि अब उनके निशाने पर सिर्फ सरकार नहीं बल्कि विपक्ष भी है. उन्होंने बेलारूस की लोकतांत्रिक ताकतों के लिए एक नया निगरानी निकाय बनाने का सुझाव दिया है. इसे यूनाइटेड ऑफिस ऑफ डेमोक्रेटिक फोर्सेज नाम देने की बात कही है. उन्होंने कहा है कि इस बोर्ड में राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों विपक्षी नेताओं और 2020 आंदोलन के प्रमुख चेहरों कोशामिल करना चाहिए. उन्होंने खुद भी इस बोर्ड में शामिल होने और अपनी पत्नी को भी शामिल करने की इच्छा जताई.
सियारही ने अपनी पत्नी की राजनीतिक भूमिका पर भी तीखी टिप्पणी की है. उनका कहना है कि स्वियातलाना शुरुआत में केवल एक टेक्निकल कैंडिडेट थी. यानी ऐसी उम्मीदवार, जिसे लुकाशेंको के खिलाफ विपक्ष के सभी मतदाताओं का समर्थन मिल सके. उनके मुताबिक, 2020 के चुनाव से पहले स्वियातलाना की अपनी कोई बड़ी राजनीतिक पहचान नहीं थी. उन्हें चुनाव लड़ने की अनुमति इसलिए मिली, क्योंकि सरकार उन्हें गंभीर राजनीतिक चुनौती नहीं मानती थी.
DW की एक रिपोर्ट के मुताबिक सियारही फिलहाल अमेरिका में रह रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक वह अभी बेरोजगार हैं और लॉस एंजिल्स में रहकर अंग्रेजी सीख रहे हैं, विश्वविद्यालय में पढ़ाई की तैयारी कर रहे हैं और एक किताब लिख रहे हैं.उनके दोनों बच्चे, एक किशोर बेटा और छोटी बेटी, कुछ समय तक अमेरिका में उनके साथ रहे. हालांकि, अब वे पोलैंड में पढ़ाई कर रहे हैं, जहां उनकी मां स्वियातलाना रहती हैं.
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