Pakistan Division Plan : टुकड़े-टुकड़े होने से बच गया पाकिस्तान, कब तक आसिम मुनीर को रोक पाएंगे शहबाज शरीफ?

Pakistan Division Plan : टुकड़े-टुकड़े होने से बच गया पाकिस्तान, कब तक आसिम मुनीर को रोक पाएंगे शहबाज शरीफ?


पाकिस्तान के टुकड़े होने की नौबत आ गई थी. सेना प्रमुख आसिम मुनीर देश को 20 हिस्सों में बांटने के लिए अपनी तलवार उठा चुके थे. लेकिन, जैसे ही इस ‘फेल्ड मार्शल’ का सीक्रेट प्लान लीक हुआ, सरकार के भीतर ही हड़कंप मच गया और गठबंधन दो-फाड़ हो गया. जो पीएम शहबाज शरीफ कभी मुनीर के नाम से कांपते थे, भारी दबाव में उन्हें अपने ही आर्मी चीफ के खिलाफ खड़ा होना पड़ा. बिलावल भुट्टो और शहबाज ने फिलहाल मुनीर के इस खतरनाक प्लान को रोक तो दिया है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि पाकिस्तान के सबसे ताकतवर बन चुके मुनीर को आखिर कब तक रोका जा सकेगा?

क्या था मुनीर-शहबाज का वो सीक्रेट मास्टरप्लान?

इस पूरी कहानी की शुरुआत 31 जुलाई को हुई थी, जब पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने इस्लामाबाद में एक कार्यक्रम के दौरान बड़ा बयान दिया. उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान का मौजूदा गवर्नेंस सिस्टम पूरी तरह फेल हो चुका है और अब इसे ‘रीसेट’ करने का वक्त आ गया है.

नकवी का ये बयान असल में रावलपिंडी और जनरल असीम मुनीर के उस सीक्रेट प्लान का इशारा था, जिसके तहत 25 करोड़ से ज्यादा आबादी वाले देश में बड़े सूबों की ताकत को कुचला जाना था. फौजी हुक्मरान ये चाहते थे कि सिंध और पंजाब जैसे ताकतवर प्रांतों को छोटे-छोटे 12 से 15 या 20 टुकड़ों में बांट दिया जाए, ताकि प्रांतीय सरकारों की ताकत खत्म हो और रावलपिंडी का सीधा कंट्रोल पूरे देश पर मजबूत हो सके.

संविधान की दीवार और आर्टिकल 239(4) का पेंच

इस प्लान को अमली जामा पहनाने में सबसे बड़ी रुकावट पाकिस्तान का संविधान खुद बन गया. संविधान के आर्टिकल 239(4) के मुताबिक, केंद्र सरकार बिना उस प्रभावित प्रांतीय विधानसभा की दो-तिहाई बहुमत वाली मंजूरी के बिना किसी भी प्रांत की सीमाओं को नहीं बदल सकती.

यही वजह थी कि सरकार इस नापाक मंसूबे को पूरा करने के लिए संसद में 28वां संवैधानिक संशोधन लाने की फिराक में थी. लेकिन इसके पहले कि फौजी तंत्र अपना खेल पूरा करता, देश के अंदर से ही बगावत के सुर उठने लगे.

सिंध असेंबली का दो टूक इनकार और बिलावल का बड़ा हमला

मोहसिन नकवी के बयान के बाद सबसे पहला और करारा झटका सिंध प्रांत से लगा. 4 सितंबर को सिंध विधानसभा ने एक सुर में प्रस्ताव पास कर दिया कि सिंध की भौगोलिक अखंडता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा. मुख्यमंत्री मुराद अली शाह ने साफ कह दिया कि सिंध के टुकड़े करने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

लेकिन असली धमाका तब हुआ जब पीपीपी (PPP) के चेयरमैन बिलावल भुट्टो जरदारी ने मीडिया के सामने आकर सरकार की पूरी पोल खोल दी. एक अस्पताल के उद्घाटन के दौरान बिलावल ने गुस्से में कहा, ‘नए प्रशासनिक यूनिट्स बनाने की ये बहस अब तुरंत बंद होनी चाहिए. सिंध के लोग अपनी तकदीर का फैसला खुद कर सकते हैं.’

बिलावल ने ये भी खुलासा कर दिया कि केंद्र सरकार ने 28वें संशोधन को लेकर उनकी पार्टी से कोई बात तक नहीं की है. चूँकि शहबाज शरीफ की सरकार पूरी तरह से बिलावल की पार्टी (PPP) की बैसाखियों पर टिकी है, इसलिए बिलावल के इस कड़े रुख ने मुनीर-शहबाज के सपनों पर पानी फेर दिया.

गृह मंत्री की धमकियां और अंदरूनी कलह

बिलावल के विरोध के बावजूद गृह मंत्री मोहसिन नकवी झुकने को तैयार नहीं थे. 6 सितंबर और फिर 3 अक्टूबर को नकवी ने दोबारा धमकी भरे लहजे में कहा कि देश का सिस्टम हर हाल में रीसेट होकर रहेगा और नए प्रशासनिक यूनिट्स बनाए जाएंगे.

लेकिन जानकारों का मानना है कि ये जिद पाकिस्तान को गृहयुद्ध या गंभीर जातीय संघर्ष की आग में झोंक सकती है. जानकारों की मानें तो नए सूबे बनाने से देश में विकास नहीं बल्कि नौकरशाही का भारी बोझ और प्रशासनिक अस्थिरता पैदा होगी.

कब तक आसिम मुनीर को रोक पाएंगे शहबाज शरीफ?

सबसे बड़ा सवाल ये है कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की क्या औकात रह गई है? क्या वो जनरल असीम मुनीर के हर गलत फैसले के खिलाफ खड़े हो सकते हैं? सच्चाई ये है कि शहबाज सरकार सिर्फ कठपुतली की तरह काम कर रही है, जिसे फौज के इशारे पर चलना पड़ता है.

जब-जब पाकिस्तान की सेना ने राजनीति में दखल देकर देश का नक्शा बदलने की कोशिश की है, तब-तब देश और ज्यादा टूटा है. इस बार भी 20 नए प्रांत बनाने का ख्वाब देखने वाली ये हुकूमत खुद अपने ही सहयोगियों के घेरे में आ गई है.

फिलहाल भारी राजनीतिक विरोध और संवैधानिक अड़चनों की वजह से पाकिस्तान के टुकड़े-टुकड़े करने वाला ये खतरनाक प्लान भले ही कुछ वक्त के लिए टल गया हो, लेकिन फौजी जनरल और सियासतदानों की चालबाजी थमी नहीं है. पाकिस्तान की जनता ये अच्छी तरह समझ चुकी है कि ‘सिस्टम रीसेट’ करने के नाम पर देश को असल में गर्त में धकेला जा रहा है. सवाल ये है कि कब तक शहबाज शरीफ सेना प्रमुख की इन जिद और साजिशों के आगे देश को टूटने से बचा पाएंगे?



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