Om Banna Temple: पाली के ‘बुलेट वाले बाबा’ का रहस्य, जानें दुर्घटना के बाद क्यों बार-बार उसी जगह पहुंच जाती थी 7773 नंबर बुलेट

Om Banna Temple: पाली के ‘बुलेट वाले बाबा’ का रहस्य, जानें दुर्घटना के बाद क्यों बार-बार उसी जगह पहुंच जाती थी 7773 नंबर बुलेट


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Om Banna Bullet Baba Temple Pali History: राजस्थान के पाली जिले में जोधपुर-पाली हाईवे पर चोटिला गांव के पास स्थित ‘बुलेट वाले बाबा’ ओम बन्ना का मंदिर देश-विदेश में अपनी अनोखी मान्यता के लिए प्रसिद्ध है. 2 दिसंबर 1988 को एक सड़क हादसे में ओम सिंह राठौड़ की मृत्यु हो गई थी, जिसके बाद पुलिस द्वारा थाने ले जाई गई उनकी रॉयल एनफील्ड बुलेट (RNJ 7773) बार-बार गायब होकर खुद-ब-खुद दुर्घटनास्थल पर पहुंच जाती थी. इस अजूबे के बाद उनके पिता ने वहीं चबूतरा बनाकर बुलेट स्थापित करवा दी, जहां आज दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन व अकाल मृत्यु से रक्षा की मन्नत मांगने आते हैं.

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Om Banna Bullet Baba History Pali: जहां होती है रॉयल एनफील्ड की पूजा, जानें पाली के बुलेट बाबा मंदिर का रहस्य

Pali: भारत अनेक अजीबोगरीब और रहस्यमयी किस्से-कहानियों वाला देश माना जाता है, जहां कई ऐसी जगहें हैं जिन पर पहली बार में विश्वास कर पाना नामुमकिन सा लगता है. क्या आपने कभी किसी मंदिर में दोपहिया वाहन की बाकायदा पूजा होते और भक्तों को उसके आगे सिर झुकाते देखा है? अगर नहीं, तो राजस्थान के पाली जिले में एक ऐसा ही प्रसिद्ध धाम स्थित है, जिसे ‘बुलेट वाले बाबा का मंदिर’ या ‘ओम बन्ना धाम’ कहा जाता है. जोधपुर-पाली राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 65 पर चोटिला गांव के पास स्थित यह मंदिर किसी व्यक्ति द्वारा अपने वाहन के प्रति महज प्रेम जताने के लिए नहीं बनाया गया है, बल्कि इसके पीछे एक गहरी धार्मिक आस्था और अकाल मृत्यु से सुरक्षा से जुड़ा चमत्कारी इतिहास शामिल है.

चोटिला गांव के सरपंच ठाकुर जोगसिंह राठौड़ के घर 5 मार्च 1965 को जन्मे ओम सिंह राठौड़ (ओम बन्ना) अपनी रॉयल एनफील्ड बुलेट बाइक (RNJ 7773) से बेहद लगाव रखते थे. 2 दिसंबर 1988 (मार्गशीर्ष शुक्ला अष्टमी) की रात पाली से अपने गांव चोटिला लौटते समय उनकी बुलेट सड़क किनारे एक पेड़ से टकरा गई, जिससे मौके पर ही ओम बन्ना की दर्दनाक मौत हो गई. हादसे के बाद पुलिस ने बुलेट जब्त कर ली और थाने में खड़ी कर दी, लेकिन अगले ही दिन सुबह बाइक थाने से गायब होकर दुर्घटनास्थल पर खड़ी पाई गई. पुलिस ने फिर से बाइक को लाकर उसका पूरा पेट्रोल निकाल दिया और लोहे की जंजीरों से बांध दिया, लेकिन अगली सुबह बुलेट फिर से जंजीरें तोड़कर उसी पेड़ के पास पहुंच गई. इस चमत्कार ने पुलिस और स्थानीय लोगों को हैरान कर दिया.

यात्रियों के रक्षक बने ओम बन्ना: हाईवे पर खत्म हुआ हादसों का डर
थाने से बार-बार बुलेट के खुद-ब-खुद दुर्घटनास्थल पर पहुंचने की घटना के बाद पाली-जोधपुर मार्ग पर कई चालकों ने दावा किया कि रात के समय संकट में फंसे या हादसों का शिकार हुए लोगों की ओम बन्ना की आत्मा मदद करती है. लोगों की बढ़ती आस्था को देखते हुए ओम बन्ना के पिता जोगसिंह ने उसी पेड़ के पास एक चबूतरा बनवाया और बुलेट को हमेशा के लिए शीशे के बक्से में स्थापित करवा दिया. स्थानीय निवासियों और वाहन चालकों का मानना है कि जब से इस स्थान पर पूजा-अर्चना शुरू हुई है, तब से इस हाईवे पर होने वाली भीषण दुर्घटनाओं और अकाल मृत्यु में भारी कमी आई है.

देश-विदेश से पहुंचते हैं श्रद्धालु: जन्मतिथि और पुण्यतिथि पर लगता है विशाल मेला
आज शीशे के बक्से में फूलों की मालाओं से सजी रॉयल एनफील्ड बुलेट और वह ऐतिहासिक पेड़ लाखों श्रद्धालुओं की अगाध आस्था का केंद्र बन चुका है. यहां से गुजरने वाला हर वाहन चालक, चाहे वो बस हो, ट्रक हो या कार, रोककर बाबा ओम बन्ना का आशीर्वाद जरूर लेता है. हर साल मार्गशीर्ष शुक्ला अष्टमी को ओम बन्ना की पुण्यतिथि और जन्मोत्सव पर यहां भव्य मेले का आयोजन किया जाता है, जहां राजस्थान ही नहीं बल्कि देश के कोने-कोने और विदेशों से भी लोग अपनी समस्याओं का समाधान ढूंढने और मन्नतें मांगने के लिए पाली पहुंचते हैं.



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