IRAN-US Deal: Hormuz Opening Plan| ईरान-अमेरिका में 4 दिन में समझौता या जलेगी खाड़ी? तुर्की-कतर लगा रहे हैं जोर, नजरें टिकीं तेहरान पर


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Iran-US Peace Deal: ईरान-अमेरिका के बीच तनाव के बीच एक खबर ये भी है कि जल्द ही हो सकता है कि दोनों देश समझौते पर सहमत हो जाएं. मिड टर्म चुनाव से पहले जेडी वेंस ने ईरान के पास समझौते के लिए संदेश भेजा और अब उम्मीद है कि अगले 4 दिन के अंदर तुर्की में इससे जुड़ी मीटिंग होने वाली है.

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ईरान-अमेरिका में 4 दिन में समझौता या जलेगी खाड़ी? तुर्की-कतर लगा रहे हैं जोरZoom

ईरान-अमेरिका के बीच होगी डील या बढ़ेगी जंग? (रॉयटर्स)

Iran-US Peace Deal: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए बातचीत तेज हो गई है. ईरान अब जल्द से जल्द समझौता करना चाहता है. इसके लिए उसने सात दिन में लागू होने वाले प्रस्ताव को चार दिन में पूरा करने की मांग रखी है. तुर्की समेत कई देश दोनों देशों के बीच बैठक कराने की कोशिश कर रहे हैं और इसका मुख्य मकसद अमेरिका और इजरायल के संभावित सैन्य हमलों को रोकना है.

इस बीच इजरायल में अमेरिका के कुल 10 एयरक्राफ्ट 24 घंटे के अंदर-अंदर जमा हो गए हैं. वहीं सऊदी अरब, कतर और जॉर्डन में भी एयरलिफ्टिंग का इंतजाम हुआ, जिसके बाद ये हलचल तेज हो गई है कि अगर ये समझौता नहीं होता है, तो अमेरिका-इजरायल एक बार फिर ईरान पर हमला कर सकते हैं. डोनाल्ड ट्रंप से लेकर अमेरिकी राजनयिक तक इस बात को कई बार कह चुके हैं.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने पर होगा जोर

प्रस्ताव में सबसे अहम मुद्दा होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलना है. दुनिया के करीब 20 फीसदी तेल और एलएनजी की आपूर्ति इसी समुद्री रास्ते से होती है. युद्ध शुरू होने के बाद ईरान ने यहां जहाजों की आवाजाही रोक दी थी. इसके जवाब में अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी कर दी. अब समझौते के तहत अमेरिका से नाकाबंदी हटाने और ईरान से समुद्री रास्ता खोलने की मांग की जा रही है. इसके अलावा ईरान के परमाणु ठिकानों पर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के निरीक्षकों को पहुंच देने का प्रस्ताव भी है.

मध्यस्थता करा रहे हैं कई देश 

इस समझौते की कोशिशों में कतर सबसे आगे है. सऊदी अरब, पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की भी इसमें मदद कर रहे हैं. कतर के प्रतिनिधि कई बार ईरान का दौरा कर चुके हैं. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने भी कहा है कि उनका देश मध्यस्थ देशों के संपर्क में है और समझौते को जल्द लागू करने के रास्ते तलाश रहा है.

किन शर्तों पर फंसी है बात?

समझौते में सबसे बड़ी परेशानी अमेरिका और ईरान की अलग-अलग मांगें हैं. अमेरिका चाहता है कि ईरान पहले अपना समृद्ध यूरेनियम भंडार सौंपे. वहीं ईरान की मांग है कि पहले अमेरिकी नाकाबंदी हटाई जाए और विदेशों में जमा उसका पैसा वापस किया जाए. मध्यस्थ देश दोनों पक्षों के बीच सहमति बनाने की कोशिश कर रहे हैं. हालांकि, किसी भी प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी देने के लिए ईरान के सर्वोच्च नेता की सहमति जरूरी होगी.

समझौता नहीं हुआ तो क्या होगा?

इस बीच सैन्य टकराव का खतरा भी बना हुआ है. खबरों के मुताबिक अमेरिका और इजरायल संभावित सैन्य कार्रवाई की तैयारियों पर चर्चा कर रहे हैं. इसमें ईरान के सैन्य ठिकानों, ऊर्जा सुविधाओं और परमाणु केंद्रों को निशाना बनाया जा सकता है. सऊदी अरब ने अमेरिका से बातचीत को और समय देने की अपील की है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कहा है कि मध्यस्थों के जरिए बातचीत जारी है, लेकिन समझौते को लेकर अभी कुछ तय नहीं है.

फिलहाल दोनों देशों के बीच तीन बड़े मुद्दे हैं- होर्मुज जलडमरूमध्य खोलना, अमेरिकी प्रतिबंध हटाना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर निगरानी. अगर इन पर सहमति बन जाती है तो तनाव कम हो सकता है लेकिन बातचीत नाकाम रही तो इलाके में एक बार फिर बड़े सैन्य संघर्ष का खतरा बढ़ सकता है.



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