Equitas Small Finance Bank Share: इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक के शेयर में लगातार दूसरे दिन भारी बिकवाली देखने को मिली. दो कारोबारी सत्रों में शेयर करीब 24% तक टूट चुका है. एक दिन पहले के हाई से शुक्रवार के इंट्राडे लो तक गिरावट करीब 32% पहुंच गई. इस बीच बैंक के निवर्तमान मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO पीएन वासुदेवन ने साफ कर दिया है कि वह अपना इस्तीफा वापस नहीं लेंगे. CNBC-TV18 के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत में पीएन वासुदेवन ने कहा, मेरी बेटी की कंपनी को लेकर कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंट्रेस्ट की बातें सिर्फ परसेप्शन है, हकीकत का इनसे कोई वास्ता नहीं. बैंक और इन्वेस्टर्स के हित में पद छोड़ने का फैसला लिया है.
इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक के शेयर में गुरुवार को करीब 12.2% की गिरावट आई थी. शुक्रवार को भी बिकवाली जारी रही. शुक्रवार को देर सुबह शेयर करीब 13% गिरकर 49.74 रुपये पर कारोबार कर रहा था. कारोबार के दौरान पिछले दिन के हाई से शुक्रवार के निचले स्तर तक इसमें करीब 32% की गिरावट दर्ज की गई. अलग-अलग समय पर कारोबार के आंकड़ों में गिरावट का प्रतिशत बदलता रहा.
क्या है बेटी का मामला
शेयर में इस गिरावट की बड़ी वजह CEO पीएन वासुदेवन का इस्तीफा है. उन्होंने गुरुवार को पद छोड़ने का ऐलान किया था. इसकी वजह उनकी बेटी वर्षिणी वासुदेवन पथांगी की एक गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) से जुड़ी भूमिका को लेकर निवेशकों की चिंताएं बताई गईं. वर्षिणी ने 2023 में यूनिको हाउसिंग फाइनेंस की स्थापना की थी. यह एक गैर-सूचीबद्ध NBFC है. निवेशकों के बीच इस बात को लेकर सवाल उठ रहे थे कि बैंक के CEO के परिवार का दूसरी वित्तीय कंपनी से जुड़ाव कहीं हितों के टकराव की स्थिति तो नहीं बनाता.
इस्तीफा वापस लेने पर क्या बोले वासुदेवन?
वासुदेवन ने कहा कि उनका इस्तीफा अचानक लिया गया फैसला नहीं है. पिछले दो-तीन साल से इस मुद्दे पर सवाल उठ रहे थे. उन्होंने कहा कि वह और बैंक इस धारणा को दूर करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन इसमें सफलता नहीं मिली. उनके मुताबिक, इस बार इस्तीफा वापस लेने का सवाल नहीं है. उन्होंने कहा कि वह अपने फैसले पर कायम हैं, क्योंकि उनका मानना है कि यह बैंक, उसके कर्मचारियों और निवेशकों के हित में है. वासुदेवन ने कहा कि वास्तविकता में कोई हितों का टकराव नहीं है, बल्कि यह केवल एक धारणा है. उनका मानना है कि इस धारणा के कारण बैंक के शेयर का प्रदर्शन प्रभावित हो रहा था. इसलिए इस मुद्दे को खत्म करने के लिए पद छोड़ना जरूरी समझा. उन्होंने यह भी कहा कि 2022 में भी उन्होंने इस्तीफा देने का फैसला किया था, लेकिन तब बोर्ड के आग्रह पर अपना फैसला वापस ले लिया था. इस बार ऐसा नहीं होगा.
बेटी की कंपनी से क्या है कनेक्शन?
वासुदेवन की बेटी वर्षिणी वासुदेवन पथांगी यूनिको हाउसिंग फाइनेंस की सह-प्रवर्तक हैं. CEO का कहना है कि उनके बैंक और बेटी की NBFC के बीच कोई वास्तविक कारोबारी हितों का टकराव नहीं है. उन्होंने बताया कि इस संबंध की जानकारी बैंक के बोर्ड और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) को दी गई थी. उनके मुताबिक, इक्विटास बैंक और यूनिको के बीच करीब ढाई साल पहले एक छोटी अवधि की जमा का लेनदेन हुआ था, जो मैच्योरिटी पर वापस कर दिया गया. इसके अलावा दोनों संस्थाओं के बीच कोई दूसरा लेनदेन या कर्ज नहीं हुआ. उन्होंने यह भी कहा कि उनकी बेटी की कंपनी में उनकी कोई हिस्सेदारी नहीं है. बैंक का कहना है कि उसने अगस्त तक यूनिको के साथ केवल एक डिपॉजिट ट्रांजैक्शन किया था.
4-6 महीने में आएंगे नए CEO
इक्विटास बैंक में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. वासुदेवन के मुताबिक, अगले चार से छह महीने में नए CEO की नियुक्ति पूरी हो सकती है. बैंक के बोर्ड ने नॉमिनेशन एंड रेम्यूनरेशन कमेटी को उत्तराधिकारी तलाशने की जिम्मेदारी दी है. बैंक आंतरिक और बाहरी दोनों तरह के उम्मीदवारों पर विचार करेगा. वासुदेवन ने कहा कि जब तक नया उत्तराधिकारी पदभार नहीं संभालता, वह बैंक के साथ बने रहेंगे. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि नेतृत्व परिवर्तन के दौरान बैंक के रोजमर्रा के कामकाज और कारोबार पर असर न पड़े.
क्या बैंक की वित्तीय सेहत खराब है?
शेयर में भारी गिरावट के बीच वासुदेवन ने बैंक की वित्तीय स्थिति का भी बचाव किया. उन्होंने कहा कि बैंक ग्रोथ, मुनाफे और एसेट क्वालिटी जैसे सभी प्रमुख पैमानों पर अच्छा प्रदर्शन कर रहा है. इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में 218 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया है. पिछले साल की समान तिमाही में यह 24.14 करोड़ रुपये था. इस तरह मुनाफे में करीब नौ गुना बढ़ोतरी हुई. बैंक की कुल आय भी सालाना आधार पर करीब 28% बढ़कर 2,358 करोड़ रुपये पहुंच गई.
वासुदेवन ने यह भी बताया कि बैंक के कुल कर्ज में माइक्रोफाइनेंस का हिस्सा घटकर करीब 10-11% रह गया है. बाकी कर्ज का बड़ा हिस्सा सिक्योर्ड लेंडिंग यानी ऐसी उधारी का है, जिसके बदले बैंक के पास कोई संपत्ति या दूसरी गारंटी होती है. उनका कहना है कि बैंक की वित्तीय स्थिति मजबूत है और प्रबंधन में बदलाव के बाद शेयर को उसके कारोबारी प्रदर्शन के हिसाब से वैल्यूएशन मिल सकेगा.
अब निवेशकों की नजर दो बातों पर रहेगी. पहली, बैंक नए CEO की नियुक्ति कितनी जल्दी करता है और दूसरी, क्या प्रबंधन से जुड़ी अनिश्चितता खत्म होने के बाद शेयर में गिरावट थमती है. फिलहाल मजबूत तिमाही नतीजों के बावजूद नेतृत्व परिवर्तन और हितों के कथित टकराव की धारणा ने निवेशकों की चिंता बढ़ा रखी है.