China Russia Secret Military Deal : चीन का सबसे बड़ा सीक्रेट लीक! रूस के वोल्गोग्राड शहर में क्या चल रहा है, अगले महायुद्ध का ब्लूप्रिंट आया सामने

China Russia Secret Military Deal : चीन का सबसे बड़ा सीक्रेट लीक! रूस के वोल्गोग्राड शहर में क्या चल रहा है, अगले महायुद्ध का ब्लूप्रिंट आया सामने


रूस के वोल्गोग्राड शहर के पास बने एक सीक्रेट मिलिट्री ठिकाने से ऐसी खबर लीक हुई है, जिसने अमेरिका से लेकर पूरे पश्चिमी देशों में हड़कंप मचा दिया है. अभी तक दुनिया ये लग रहा था कि यूक्रेन युद्ध के बीच चीन रूस को ड्रोन इंजन और पुर्जे बेचकर सिर्फ मुनाफा कमा रहा है. लेकिन अब परदे के पीछे असल में गेम सामने आया है. रूस और चीन मिलकर अगले महायुद्ध का ब्लूप्रिंट तैयार कर रहे हैं. इस ब्लूप्रिंट में सामने आया है कि दोनों देश कैसे सिर्फ 3 वार में अमेरिका को चारों खाने चित करने वाले हैं.

रूस से वोल्गोग्राड में चीन के साथ पक रही कौन सी खिचड़ी?

वोल्गोग्राड के इस सीक्रेट कैंप में चीन की लाल सेना (PLA) के फौजी रूस के बैटल-टेस्टेड जनरलों से जंग का असली अनुभव हासिल कर रही है. ताइवान पर कब्जे की तैयारी में जुटा चीन दशकों बाद रूसी तकनीक, खौफनाक मिलिट्री ट्रेनिंग और खुफिया सीक्रेट्स के दम पर खुद को आधुनिक युद्ध के लिए तैयार कर रहा है.

साल 1979 के वियतनाम युद्ध के बाद से चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने कोई ढंग की लड़ाई नहीं लड़ी है. लेकिन अब, व्लादिमीर पुतिन की जंग की भट्टी में तपी हुई सेना की उंगली पकड़कर चीनी सैनिक ताइवान फतह करने का खौफनाक पाठ पढ़ रहे हैं.

यूरोपीय खुफिया एजेंसियों के हाथ जो रिपोर्ट लगी है, उसने दुनिया को हिलाकर रख दिया है. साल 2024 से ही चीनी सैनिकों का एक खास दस्ता दक्षिण-पश्चिम रूस के वोल्गोग्राड शहर के पास एक गुप्त मिलिट्री कॉम्प्लेक्स में ट्रेनिंग ले रहा है. यहे ही खतरनाक बेस है जिसका इस्तेमाल रूस की मशहूर 8वीं आर्मी करती है, वही सेना जिसने पूर्वी यूक्रेन के मोर्चों पर सबसे भीषण खूनखराबा देखा है. यहां चीनी अफसरों को क्या सिखाया जा रहा है, इसकी एक-एक डीटेल दिल दहलाने वाली है.

  • शहरी गुरिल्ला वॉर: तंग गलियों, मलबे और बहुमंजिला इमारतों के बीच घुसकर दुश्मन का सफाया करने के पैंतरे.
  • ट्रेंच और माइनफील्ड्स का जाल: बंकरों को पलक झपकते नेस्तनाबूद करना और एंटी-टैंक तथा एंटी-पर्सनल बारूदी सुरंगों का खतरनाक इस्तेमाल.
  • एयर असॉल्ट और कमांड पोस्ट पर हमला: दुश्मन के सबसे सुरक्षित कंट्रोल रूम को रातों-रात तबाह करने की ट्रेनिंग.

यूक्रेन-रूस जंग ने ये साबित कर दिया है कि पुरानी किताबें अब किसी काम की नहीं हैं. चीनी अफसर अच्छी तरह जानते हैं कि अगर ताइवान के समंदर और मैदानों में उतरना है, तो उन रूसी जनरलों से सीखना होगा जो रोजाना मैदान में गोलियां खा रहे हैं.

समंदर के साइलेंट किलर: रूस दे रहा है परमाणु पनडुब्बियों की खामोशी का राज

ताइवान को लेकर अगर कल अमेरिका से सीधी टक्कर होती है, तो समंदर के नीचे का खेल सबसे अहम होगा. चीन को ऐसी न्यूक्लियर सबमरीन चाहिए जो अमेरिकी सोनार की रडार में आए बिना चुपचाप दुश्मन के बेड़े को डुबो सकें. और यहीं पर पुतिन ने चीन को वो दे दिया है जो पहले कभी नहीं दिया था.

  1. अकुला-क्लास की साइलेंसिंग टेक्नोलॉजी: अमेरिकी पैसिफिक कमांड के प्रमुख एडमिरल सैमुअल पापाग्रो ने चेतावनी दी है कि रूस अपनी सबसे शांत और घातक ‘अकुला-क्लास’ पनडुब्बियों की आवाज दबाने वाली तकनीक चीन को ट्रांसफर कर रहा है.
  2. टाइप 095 और 096 का खौफ: साल 2026 की शुरुआत में ही चीन ने अपनी नई न्यूक्लियर अटैक सबमरीन ‘टाइप 095’ को पानी में उतार दिया है और ‘टाइप 096’ का निर्माण तेज कर दिया है. रूसी तकनीक के दम पर ये पनडुब्बियां समंदर की गहराइयों में भूत की तरह बिना आवाज किए तैर सकती हैं.
  3. अकॉस्टिक सिग्नेचर्स का डेटा: रूस के पास दशकों से अमेरिकी सबमरीन्स की आवाजों का पूरा डेटाबेस है. ये कीमती डेटा अब चीन के हाथों में पहुंच चुका है, जिससे अमेरिकी पनडुब्बियों को ढूंढना चीन के लिए बच्चों का खेल बन जाएगा.

ब्लैक सागर की तबाही से सबक: ताइवान के ‘हेलस्केप’ को मात देने की तैयारी

अमेरिका और ताइवान ने मिलकर एक खौफनाक रणनीति बनाई है, जिसे ‘हेलस्केप’ कहा जाता है. इसके तहत ताइवान जलडमरूमध्य में हजारों की संख्या में सस्ते हवाई, सतही और पानी के नीचे चलने वाले ड्रोन भर दिए जाएंगे ताकि चीनी जहाजों का बेड़ा समंदर में ही दफन हो जाए.

लेकिन चीन ने इसका भी तोड़ निकाल लिया है. हाल ही में जुलाई के महीने में चीन के पूर्वी तट पर दोनों देशों ने अब तक का सबसे बड़ा संयुक्त नौसैनिक अभ्यास किया. इसमें एंटी-ड्रोन युद्ध, सबमरीन हंटिंग और मानवरहित ड्रोनों को हवा में मार गिराने की लाइव ड्रिल की गई. काला सागर में यूक्रेनी ड्रोनों ने रूसी जहाजों की जो दुर्गति की थी, उससे सीख लेकर चीन अब अपने युद्धपोतों को पूरी तरह ड्रोन-प्रूफ बना रहा है.

स्टारलिंक को अंतरिक्ष में डिसेबल करने और मिसाइल डिफेंस का मास्टरप्लान

लीक हुए दस्तावेजों से ये भी सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि रूस और चीन ने मिलकर अमेरिकी अरबपति एलन मस्क के ‘स्टारलिंक’ सैटेलाइट नेटवर्क को अंतरिक्ष में ही जाम या तबाह करने का खतरनाक प्लान बनाया है.

इतना ही नहीं, दोनों देश मिलकर S-500 से भी ज्यादा खतरनाक एक नया एयर और मिसाइल डिफेंस सिस्टम तैयार कर रहे हैं, जो अमेरिका की हाइपरसोनिक मिसाइलों को आसमान में ही राख बना दे. रूस चीन को अपना ‘न्यूक्लियर अर्ली-वार्निंग सिस्टम’ बनाने में भी मदद कर रहा है, ताकि दुश्मन की मिसाइल जमीन पर गिरने से पहले चीन जवाबी परमाणु हमला कर सके.

पश्चिम के लिए खतरे की घंटी और बदलता ग्लोबल पावर गेम

ब्राउन यूनिवर्सिटी के जाने-माने एक्सपर्ट लाइल गोल्डस्टीन का कहना है कि ‘चीन अब रूस से वो सब मांग सकता है जो पुतिन ने पहले कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा.’ यूक्रेन युद्ध में पुतिन की चीन पर बढ़ती निर्भरता ने शी जिनपिंग के पंख और मजबूत कर दिए हैं.

रूस भले ही ताइवान की लड़ाई में सीधे तौर पर मैदान में न कूदे, लेकिन वो चीन को वो हर हथियार, हर कोडिंग, हर डेटा और हर पैंतरा दे रहा है जो इस महायुद्ध का नक्शा बदलने के लिए काफी है. अगर एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में रूस, चीन और उत्तर कोरिया का ये खौफनाक गठजोड़ इसी तरह परवान चढ़ता रहा, तो आने वाले दशकों में दुनिया की ताकत का संतुलन पूरी तरह से बदल जाएगा और पश्चिम देश लाचार खड़े देखते रह जाएंगे.



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