Afghanistan Pakiatn War : पाकिस्तान को सबक सिखाएगी अफगानिस्तान की स्पेशल फोर्स, डूरंड लाइन पर चल क्या रहा है?

Afghanistan Pakiatn War : पाकिस्तान को सबक सिखाएगी अफगानिस्तान की स्पेशल फोर्स, डूरंड लाइन पर चल क्या रहा है?


डूरंड लाइन पर जारी पाकिस्तान के साथ भयंकर जंग के बीच अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने एक खतरनाक कदम उठाया है. अफगानिस्तान ने अपनी ‘स्पेशल डिफेंसिव फोर्सेज’ की घातक तैयारियों का एक वीडियो जारी कर इस्लामाबाद को खुली चुनौती दे दी है. इस वीडियो के जरिए तालिबान ने ये संदेश देने की कोशिश की है कि अगर पाकिस्तान ने सीमा पार करने या हमला करने की जुर्रत की, तो उसकी स्पेशल फोर्स करारा जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है.

तालिबान का ‘स्पेशल फोर्स’ वीडियो: पाकिस्तान को सीधा संदेश

हाल ही में जारी इस आधिकारिक वीडियो में तालिबान की स्पेशल डिफेंसिव फोर्सेज को आधुनिक हथियारों, हाई-टेक सैन्य रणनीतियों और सख्त ट्रेनिंग के साथ दिखाया गया है. तालिबानी रक्षा मंत्रालय का दावा है कि ये विशेष बल तेजी से स्ट्राइक करने, सटीक निशाना साधने और किसी भी आपात स्थिति में दुश्मन को ढेर करने में माहिर हैं. इस वीडियो के 3 बड़े मायने निकाले जा रहे हैं.

  1. पूर्वी सीमा का रक्षक: तालिबान ने इन विशेष दस्तों को अपनी इस्लामिक व्यवस्था और देश के पूर्वी हिस्से यानी पाकिस्तान सीमा का रक्षक घोषित किया है.
  2. साइकोलॉजिकल वॉर: डूरंड लाइन पर पाकिस्तान द्वारा लगातार की जा रही गोलाबारी और ड्रोन हमलों के बीच ये वीडियो जारी करके पाकिस्तान की सेना और जनमानस पर दबाव बनाने की कोशिश की गई है.
  3. सैन्य मुस्तैदी का सबूत: हालांकि इस वीडियो के जारी होने से किसी नए सैन्य अभियान की शुरुआत की पुष्टि तो नहीं होती, लेकिन ये साफ है कि तालिबान किसी भी बड़े हमले का जवाब देने के लिए हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठा है.

19 अक्टूबर से फिर दहक उठी डूरंड लाइन: तोपों और ड्रोन्स से हमले

पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सीमा पर हालात इतने खराब हैं कि 19 अक्टूबर के बाद से दोनों देशों के बीच कम से कम तीन बड़ी और खूनी सैन्य झड़पें दर्ज की जा चुकी हैं. 27 और 28 अक्टूबर को हुई हिंसा ने दोनों तरफ भारी दहशत फैला दी.

  • पक्तिका और वजीरिस्तान में गोलाबारी: अफगानिस्तान के पक्तिका प्रांत और पाकिस्तान के निचले दक्षिण वजीरिस्तान की सीमा पर भारी हथियारों से गोले दागे गए. स्थानीय लोगों का कहना है कि तालिबानी लड़ाके उन पुरानी चौकियों पर फिर से कब्जा जमाना चाहते थे, जिन्हें वे पिछले पाकिस्तानी हमलों के दौरान छोड़ चुके थे.
  • पाकिस्तानी ड्रोन स्ट्राइक: तालिबान के रक्षा मंत्रालय ने X पर पोस्ट करके आरोप लगाया कि पाकिस्तानी ड्रोन्स ने पक्तिका में उनके सुरक्षा ठिकानों को निशाना बनाया. जवाब में तालिबान ने पाकिस्तानी चौकियों पर हमला कर कई पाकिस्तानी सैनिकों को हताहत करने का दावा किया.
  • तोरखम बॉर्डर पर गोलीबारी: 28 अक्टूबर को दोनों देशों के मुख्य व्यापारिक और आवाजाही वाले ‘तोरखम बॉर्डर’ पर भी भारी गोलीबारी हुई, जिसमें एक मासूम बच्चा और राहत संस्था का कर्मचारी घायल हो गया.

पाकिस्तानी हुक्मरान इस स्थिति से बेहद बौखलाए हुए हैं. खैबर पख्तूनख्वा के गवर्नर फैसल करीम कुंडी ने सख्त लहजे में कहा, ‘अफगान तालिबान सरकार किसी मुगालते में न रहे. पाकिस्तान अपने लोगों पर हमले या अपनी संप्रभुता का उल्लंघन कभी बर्दाश्त नहीं करेगा’.

टीटीपी (TTP) का डर और ‘ओपन वॉर’ का ऐलान

पाकिस्तान और तालिबान के बीच इस दुश्मनी की सबसे बड़ी वजह ‘तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान’ (TTP) है. पाकिस्तान का आरोप है कि काबुल पर कब्जा करने के बाद अफगान तालिबान टीटीपी के आतंकियों को सुरक्षित पनाहगाह दे रहा है. ये आतंकी अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल करके पाकिस्तान के भीतर आत्मघाती हमले अंजाम दे रहे हैं.

18 सितंबर को उत्तर-पश्चिम पाकिस्तान में एक बड़ा आत्मघाती हमला हुआ था, जिसमें 31 लोग मारे गए थे. इसकी जिम्मेदारी टीटीपी से जुड़े गुट ने ली थी. इसके बाद से ही दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है. पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ तो पहले ही सीमा पर संघर्ष के बाद तालिबान के खिलाफ ‘ओपन वॉर’ की घोषणा कर चुके हैं.

पाकिस्तान की नई चाल: तालिबान विरोधियों से मिला रहा हाथ?

इस तनाव के बीच एक और बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है. ‘द न्यू यॉर्क टाइम्स’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तानी सैन्य और खुफिया एजेंसी (ISI) के आला अधिकारियों ने गुप्त रूप से तालिबान विरोधी अफगान गुटों से मुलाकातें की हैं.

हालांकि पाकिस्तान ने इस रिपोर्ट को सिरे से खारिज किया है, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि तालिबान को बैकफुट पर धकेलने के लिए पाकिस्तान अब अफगानिस्तान के भीतर ही उसके दुश्मनों को खड़ा करने की खतरनाक रणनीति पर काम कर रहा है. लेकिन पाकिस्तान का ये दांव उल्टा भी पड़ सकता है, क्योंकि इससे पूरे क्षेत्र में गृहयुद्ध जैसी स्थिति पैदा हो सकती है.

95% व्यापार ठप: दोनों तरफ कंगाली का मंजर

युद्ध और सीमा बंद होने का सबसे भयानक खमियाजा आम जनता और व्यापारियों को भुगतना पड़ रहा है. सीमाएं सील होने से दोनों देशों के बीच व्यापार लगभग खत्म हो चुका है. ट्रेड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ पाकिस्तान (TDAP) के आंकड़े बताते हैं कि वित्त वर्ष 2026 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार में 95 प्रतिशत की भारी गिरावट आई है.

पाकिस्तान-अफगानिस्तान जॉइंट चैंबर ऑफ कॉमर्स के उपाध्यक्ष मोहम्मद यूनुस मोहम्मद के अनुसार, ‘पाकिस्तान के साथ हमारा व्यापार पूरी तरह बंद हो चुका है. पाकिस्तान के जरिए अफगानिस्तान का और अफगानिस्तान के रास्ते पाकिस्तान का मध्य एशिया से होने वाला ट्रांजिट ट्रेड पूरी तरह ठप पड़ा है’.

क्या डूरंड लाइन पर छिड़ेगी महाजंग?

अफगानिस्तान द्वारा अपनी स्पेशल फोर्सेज का वीडियो जारी करना महज एक प्रदर्शन नहीं है, बल्कि ये पाकिस्तान को ये बताने का तरीका है कि तालिबान अब किसी दबाव में झुकने वाला नहीं है. डूरंड लाइन को तालिबान कभी आधिकारिक सीमा नहीं मानता और पाकिस्तान की सैन्य कार्रवाइयों ने इस आग में घी का काम किया है.

जब तक पाकिस्तान टीटीपी के मुद्दे पर तालिबान को घेरता रहेगा और तालिबान सीमा पर अपनी मौजूदगी मजबूत करता रहेगा, तब तक डूरंड लाइन पर शांति संभव नहीं है. स्पेशल फोर्सेज की तैनाती और दोनों तरफ से जारी गोलाबारी इशारा कर रही है कि आने वाले दिनों में ये तनाव एक बड़े और विनाशकारी  युद्ध का रूप ले सकता है.



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