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Haridwar News: विश्व प्रसिद्ध धर्मनगरी हरिद्वार में वार्षिक गंगा नहर बंदी के चलते इस समय आस्था प्रशासनिक बदइंतजामी के आगे लाचार दिखाई दे रही है. मोक्षदायिनी गंगा की पावन अविरल धारा की जगह हर की पौड़ी समेत तमाम प्रमुख घाटों पर केवल सूखी रेत और सिल्ट का अंबार फैला है. गुजरात, बिहार और देश के कोने-कोने से सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय कर अपने पितरों के मोक्ष और गंगा स्नान की आस लेकर पहुंचे श्रद्धालुओं के धार्मिक अनुष्ठान अधर में लटक गए हैं, जिससे तीर्थयात्रियों में गहरा आक्रोश और मायूसी है.
Haridwar News: विश्व प्रसिद्ध तीर्थनगरी हरिद्वार में वार्षिक गंगा बंदी के दौरान हर की पौड़ी समेत सभी प्रमुख घाटों पर इन दिनों आस्था प्रशासनिक व्यवस्था के आगे बेबस नजर आ रही है. मोक्षदायिनी गंगा की अविरल धारा की जगह घाटों पर केवल सूखी रेत और सिल्ट का अंबार फैला हुआ है. गुजरात, बिहार समेत देश के दूर-दराज के राज्यों से सैकड़ों किलोमीटर का लंबा सफर तय कर हरिद्वार पहुंचे तीर्थयात्रियों को निराशा का सामना करना पड़ रहा है.
अपने दिवंगत परिजनों के अस्थि विसर्जन, पिंडदान, श्राद्ध कर्म और गंगा स्नान की आस लेकर आए श्रद्धालु बहते गंगाजल की एक-एक बूंद के लिए तरस रहे हैं. कुछ घाटों पर रेत की दीवार बनाकर पानी रोका गया है जो आचमन और तर्पण के नियमों के विपरीत है. घाटों पर बहता जल नहीं मिलने से भक्तों के धार्मिक अनुष्ठान अधर में लटक गए हैं जिससे धर्मनगरी पहुंचे श्रद्धालुओं में मायूसी साफ देखी जा रही है.
वैकल्पिक व्यवस्था न होने से भड़के तीर्थयात्री
नहर बंदी के बीच हर की पौड़ी के जमीनी हालात जानने के लिए जब हम ग्राउंड जीरो पर पहुंचे तो दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं का दर्द खुलकर सामने आया. नैनीताल से हरिद्वार गंगा स्नान के लिए पहुंचे श्रद्धालु शैलेंद्र ने बातचीत में बताया कि वह नैनीताल से हरिद्वार में हर की पौड़ी पर गंगा स्नान करने के लिए आए थे, लेकिन हरिद्वार में पानी नहीं होने से उन्हें बहुत निराशा हुई है. हरिद्वार की पौड़ी विख्यात है और हर कोई हर की पौड़ी पर ही गंगा स्नान के लिए आता है, लेकिन हरिद्वार में इस समय पानी नहीं होने से यहाँ की स्थिति बहुत खराब है.
उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन ने हर की पौड़ी पर पानी नहीं होने पर इसकी कोई व्यवस्था की होगी, लेकिन यदि प्रशासन द्वारा कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है तो यह बेहद ही खेद का विषय है. हर की पौड़ी पर गंगाजल नहीं है. बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के स्नान करने के लिए कहीं और स्नान की व्यवस्था की गई है तो उसके लिए प्रशासन को हरिद्वार आने वालों को पहले ही बता देना चाहिए जिससे श्रद्धालु परेशान न हों. उन्होंने आगे कहा कि पूर्व में जो पैक्ट हुआ था उसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं है लेकिन यह बेहद ही दुर्भाग्य की बात है कि हर की पौड़ी और सभी घाटों पर इस समय गंगा की धारा यानी गंगाजल नहीं है.
ब्रह्मकुंड पर अधूरी रह गई अस्थि विसर्जन की मन्नत, चंडी घाट पर पूरा किया कर्मकांड
गुजरात के पाटन से आए श्रद्धालु अमिताभ ने बताया कि दो महीने पहले उनके पिताजी का देहांत हो गया था और वे उनकी अस्थियों को विसर्जित करने के लिए हरिद्वार आए थे. उन्हें अपने पिताजी की अस्थि हर की पौड़ी के ब्रह्मकुंड घाट पर विसर्जित करनी थी. ट्रेन में सफर के दौरान सोशल मीडिया पर रील्स के माध्यम से उन्हें मालूम हुआ था कि हरिद्वार में सफाई अभियान के चलते गंगा का पानी बंद किया गया है. यह सब जानकर उन्हें बहुत निराशा हुई. उन्होंने बताया कि हरिद्वार पहुंचने पर जब ब्रह्मकुंड में पानी नहीं मिला तो उन्होंने चंडी घाट पर जाकर अपने दिवंगत पिताजी के अस्थि विसर्जन और कर्मकांड को पूरा किया.
उन्होंने कहा कि प्रशासन को सफाई के साथ-साथ ऐसी ठोस व्यवस्था भी करनी चाहिए जिससे श्रद्धालुओं की धार्मिक भावना और आस्था को ठेस न पहुंचे. उन्होंने कहा कि सभी को पहले से सही जानकारी दी जानी चाहिए ताकि हरिद्वार आने वाले श्रद्धालु परेशान न हों. उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि गंगा तो सभी जगह बहती हैं जिससे उनके पिताजी की अस्थि गंगा में विसर्जित हो गई लेकिन हर की पौड़ी ब्रह्मकुंड पर ही अस्थि विसर्जन करने की उनकी मुख्य आस्था और मन्नत थी वह गंगा के बंद होने से अधूरी रह गई जिस कारण उन्हें हरिद्वार से मायूस होकर वापस लौटना पड़ रहा है.