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Greater Noida News : महागुन मायवुड्स सोसायटी गौर सिटी-2 से एक बुरी खबर सामने आ रही है. यहां पिता-बेटी की 23वीं मंजिल से गिरकर जान चली गई है. आइए जानते हैं पूरा मामला.
सांकेतिक तस्वीर.
ग्रेटर नोएडा : किसे पता था कि जिस घर में सुबह खाटू श्याम मंदिर जाने की तैयारियां चल रही थीं, वहां कुछ ही देर में मातम पसर जाएगा परिवार को मंदिर में दर्शन करने जाना था, लेकिन इससे पहले ही एक दर्दनाक हादसे ने परिवार की खुशियां छीन लीं. ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित बिसरख कोतवाली क्षेत्र स्थित महागुन मायवुड्स सोसायटी के टावर-23 में शुक्रवार सुबह बालकनी से गिरकर पिता और उनके 11 वर्षीय बेटे की मौत हो गई. घटना के बाद सोसायटी में शोक की लहर दौड़ गई.
पुलिस के मुताबिक, मृतकों की पहचान 40 वर्षीय रणदीप पात्रा पुत्र अमल कुमार पात्रा और उनके 11 वर्षीय बेटे आरव के रूप में हुई है. दोनों महागुन मायवुड्स सोसायटी गौर सिटी-2 में रहते थे. शुक्रवार सुबह पुलिस को पीआरवी के माध्यम से सूचना मिली कि सोसायटी के टावर-23 में दो लोग ऊंचाई से नीचे गिर गए हैं. सूचना मिलते ही बिसरख पुलिस मौके पर पहुंची और गंभीर रूप से घायल पिता-पुत्र को तत्काल अस्पताल पहुंचाया. हालांकि, अस्पताल में डॉक्टरों ने जांच के बाद दोनों को मृत घोषित कर दिया.
पूजा के लिए फूल तोड़ने गए थे पिता-पुत्र
पुलिस की शुरुआती जानकारी के अनुसार, परिवार को शुक्रवार सुबह जल्दी खाटू श्याम मंदिर के दर्शन के लिए जाना था. इसके लिए घर में तैयारियां चल रही थीं. इसी दौरान रणदीप अपने बेटे आरव के साथ पूजा के लिए फूल तोड़ने बालकनी में गए थे. बताया जा रहा है कि फूल तोड़ने के लिए सीढ़ी का इस्तेमाल किया जा रहा था. इसी दौरान दोनों का संतुलन बिगड़ गया और सीढ़ी से फिसलकर वे बालकनी से नीचे गिर गए.
पत्नी के सामने उजड़ गया परिवार
हादसे की जानकारी मिलते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई. जिस सुबह की शुरुआत मंदिर में दर्शन और पूजा की तैयारियों के साथ होनी थी, वह परिवार के लिए जिंदगी का सबसे दुखद दिन बन गई. पिता और बेटे की एक साथ मौत से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. सोसायटी के लोग भी इस घटना से स्तब्ध हैं.
पोस्टमार्टम के लिए भेजे गए शव
बिसरख पुलिस ने दोनों शवों का पंचायतनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. पुलिस मामले में आवश्यक कानूनी कार्रवाई कर रही है. इस हृदयविदारक हादसे ने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया है. जिस परिवार को कुछ देर बाद खाटू श्याम के दरबार में पहुंचना था, उसकी यात्रा हमेशा के लिए अधूरी रह गई.