क्या है दुलारचंद यादव हत्याकांड? जिसमें बाहुबली विधायक अनंत सिंह को फिर जाना पड़ेगा जेल

क्या है दुलारचंद यादव हत्याकांड? जिसमें बाहुबली विधायक अनंत सिंह को फिर जाना पड़ेगा जेल


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बिहार के मोकामा में पिछले साल विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान दुलारचंद यादव की हत्या हुई थी. इस मामले में बाहुबली विधायक अनंत सिंह को आरोपी बनाया गया था. सुप्रीम कोर्ट द्वारा जमानत रद्द होने के बाद उन्हें 1 दिसंबर तक सरेंडर करने का आदेश मिला है. ऐसे में उनकी दोबारा जेल वापसी तय है.

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दुलारचंद यादव हत्याकांड में अनंत सिंह की जमानत रद्द(फाइल फोटो)

पटनाः दुलारचंद यादव हत्याकांड में मोकामा विधायक अनंत सिंह को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट से मिली उनकी जमानत को रद्द कर दिया है. साथ ही उन्हें 1 दिसंबर तक अदालत में सरेंडर करने का आदेश दिया है. इस फैसले के बाद अब अनंत सिंह की जेल वापसी तय हो गई है. गौरतलब है कि साल 2025 में आज ही के दिन यानि 30 अक्टूबर को दुलारचंद की हत्या हुई थी. हाईकोर्ट से मिली जमानत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी. अब शीर्ष अदालत के इस फैसले के बाद अनंत सिंह की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं. कोर्ट के फैसले के बाद दुलारचंद हत्याकांड को लेकर एक बार फिर से चर्चा तेज हो गई है.

क्या है दुलारचंद हत्याकांड?
बता दें कि बिहार विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान पटना के मोकामा इलाके में एक बड़ी हिंसा हुई थी. जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार के समर्थन में प्रचार कर रहे दुलारचंद यादव की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.

ऐसे हुई थी हत्या
उस समय वर्ष 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव का माहौल गर्म था. मोकामा सीट से अनंत सिंह जदयू के टिकट पर चुनाव लड़ रहे थे. आरोप के अनुसार, चुनाव प्रचार के दौरान अचानक दोनों पक्षों के काफिले आमने-सामने आ गए थे. इस दौरान हुई हिंसक झड़प और गोलीबारी में दुलारचंद यादव की मौत हो गई थी.

अनंत सिंह पर लगा आरोप
इस हाई-प्रोफाइल हत्या मामले में मोकामा के बाहुबली नेता और विधायक अनंत सिंह पर सीधा आरोप लगा था. घटना के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अनंत सिंह को गिरफ्तार कर लिया था. गिरफ्तारी के बाद उन्हें जेल भेज दिया गया था.

मार्च 2026 में मिली थी जमानत
सबसे खास बात यह रही कि चुनाव के दौरान जेल में बंद रहने के बावजूद अनंत सिंह ने मोकामा सीट से अपनी चुनावी जीत दर्ज की थी. कानूनी प्रक्रिया और जांच के बाद मार्च 2026 में पटना हाईकोर्ट से उन्हें इस मामले में जमानत मिल गई थी. जिसके बाद वे जेल से बाहर आ गए थे. हालांकि, इस हत्याकांड को लेकर राजनीतिक सरगर्मी और कानूनी लड़ाइयां लगातार बनी रही.



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