UP Character Certificate Rules 2026: उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए अब चरित्र सत्यापन से जुड़े नियमों को समझना जरूरी हो गया है. प्रदेश सरकार ने सरकारी भर्तियों में उम्मीदवारों के पिछले रिकॉर्ड और चरित्र की जांच को लेकर नई नीति जारी की है. इसके बाद सवाल उठ रहा है कि आखिर कैरेक्टर सर्टिफिकेट कौन बनाता है, इसे कहां से बनवाया जाता है और क्या पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर सरकारी नौकरी रुक सकती है? उत्तर प्रदेश में सामान्य चरित्र प्रमाण पत्र पुलिस की जांच के बाद जारी किया जाता है. वहीं सरकारी नौकरी के लिए चयनित उम्मीदवारों का सत्यापन नियुक्ति करने वाला विभाग संबंधित पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के माध्यम से कराता है. नई व्यवस्था में पुलिस को 30 दिन के भीतर रिपोर्ट देनी होगी हालांकि सिर्फ एफआईआर दर्ज होने या राजनीतिक विचारधारा के कारण कोई उम्मीदवार अपने आप सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य नहीं होगा.
कैरेक्टर सर्टिफिकेट क्या होता है?
कैरेक्टर सर्टिफिकेट को हिंदी में चरित्र प्रमाण पत्र कहते हैं. यह एक ऐसा दस्तावेज है जिसके माध्यम से किसी व्यक्ति के चरित्र और उसके बारे में उपलब्ध रिकॉर्ड से संबंधित जानकारी का सत्यापन किया जाता है.उत्तर प्रदेश में पुलिस की ओर से चरित्र सत्यापन की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है. इस प्रक्रिया में संबंधित व्यक्ति के वर्तमान और स्थायी पते से जुड़े पुलिस रिकॉर्ड की जांच की जाती है.चरित्र प्रमाण पत्र का इस्तेमाल नौकरी और दूसरे निर्धारित कार्यों में किया जा सकता है. जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर भी बताया गया है कि चरित्र प्रमाण पत्र का उपयोग नौकरी और ठेकेदारी जैसे कार्यों में होता है हालांकि यह समझना जरूरी है कि चरित्र प्रमाण पत्र किसी व्यक्ति के पूरे जीवन में कभी कोई विवाद न होने की गारंटी नहीं है. यह निर्धारित प्रक्रिया और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर जारी किया जाने वाला दस्तावेज है.
यूपी में कैरेक्टर सर्टिफिकेट कौन बनाता है?
उत्तर प्रदेश में सामान्य पुलिस चरित्र सत्यापन प्रमाण पत्र संबंधित जिले की पुलिस की ओर से जारी किया जाता है.
राज्य सरकार की आधिकारिक जिला वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार आवेदन मिलने के बाद संबंधित थाने, स्थानीय अभिसूचना इकाई यानी एलआईयू और जिला अपराध अभिलेख ब्यूरो यानी डीसीआरबी से रिपोर्ट प्राप्त की जाती है.इन रिपोर्टों के आधार पर वर्तमान पते वाले जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक या पुलिस अधीक्षक की ओर से डिजिटल हस्ताक्षर वाला प्रमाण पत्र ऑनलाइन जारी किया जाता है.इसका मतलब है कि सामान्य पुलिस चरित्र प्रमाण पत्र बनाने की प्रक्रिया में थाना स्तर से लेकर जिला पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों तक की भूमिका होती है हालांकि सरकारी नौकरी में नियुक्ति से पहले होने वाले विभागीय चरित्र सत्यापन में नियुक्ति प्राधिकारी और जिला प्रशासन की भी अलग जिम्मेदारी होती है.
घर बैठे कैसे बनवा सकते हैं कैरेक्टर सर्टिफिकेट?
उत्तर प्रदेश पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट पर नागरिक सेवाओं के अंतर्गत चरित्र सत्यापन की सुविधा दी गई है.
इसके लिए उम्मीदवार उत्तर प्रदेश पुलिस के नागरिक सेवा पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. आवेदन के दौरान संबंधित व्यक्ति को अपनी जरूरी जानकारी दर्ज करनी होती है. इसके साथ फोटो, पहचान पत्र और पते से संबंधित दस्तावेज भी देने होते हैं.आवेदन जमा होने के बाद पुलिस की ओर से निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जांच की जाती है. जांच पूरी होने पर संबंधित अधिकारी की ओर से डिजिटल हस्ताक्षर वाला प्रमाण पत्र ऑनलाइन जारी किया जाता है.आवेदक को आवेदन और सत्यापन की स्थिति से जुड़ी सूचनाएं उसके पंजीकृत मोबाइल नंबर और ईमेल पर भी भेजी जाती हैं.
कैरेक्टर सर्टिफिकेट के लिए कौन-कौन से दस्तावेज चाहिए?
उत्तर प्रदेश सरकार की आधिकारिक जिला वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार सामान्य पुलिस चरित्र सत्यापन के लिए आवेदक की हाल की पासपोर्ट आकार की फोटो जरूरी होती है.इसके अलावा पहचान का प्रमाण और पते का प्रमाण देना होता है.आधिकारिक सेवा विवरण में दस्तावेज अपलोड करने के लिए निर्धारित फाइल प्रारूप और आकार की शर्तें भी बताई गई हैं इसलिए आवेदन करने से पहले पोर्टल पर उपलब्ध दस्तावेज संबंधी निर्देश ध्यान से पढ़ने चाहिए.गलत जानकारी या अधूरे दस्तावेज देने से आवेदन की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है.
कैरेक्टर सर्टिफिकेट बनवाने में कितनी फीस लगती है?
उत्तर प्रदेश सरकार की जिला वेबसाइट पर उपलब्ध आधिकारिक सेवा विवरण के अनुसार पुलिस चरित्र सत्यापन के लिए 50 रुपये का ऑनलाइन शुल्क निर्धारित बताया गया है.यह शुल्क आवेदन जमा करते समय ऑनलाइन देना होता है.आधिकारिक विवरण के अनुसार शुल्क जमा नहीं होने पर आवेदन अधूरा माना जाएगा और उस पर आगे की कार्रवाई नहीं की जाएगी.
पुलिस कैरेक्टर सर्टिफिकेट बनाने से पहले क्या जांच करती है?
सामान्य पुलिस चरित्र सत्यापन में व्यक्ति के वर्तमान और स्थायी पते से संबंधित पुलिस रिकॉर्ड की जांच की जाती है.
आधिकारिक प्रक्रिया के अनुसार संबंधित थाने, स्थानीय अभिसूचना इकाई और जिला अपराध अभिलेख ब्यूरो से रिपोर्ट ली जाती है.इन रिपोर्टों के आधार पर संबंधित व्यक्ति के बारे में उपलब्ध जानकारी की जांच की जाती है.जांच पूरी होने के बाद वर्तमान पते के जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक या पुलिस अधीक्षक की ओर से डिजिटल हस्ताक्षर वाला प्रमाण पत्र जारी किया जाता है.इस प्रक्रिया में पुलिस के पास उपलब्ध रिकॉर्ड महत्वपूर्ण होते हैं.
सरकारी नौकरी में कैरेक्टर सर्टिफिकेट का क्या काम है?
सरकारी नौकरी के लिए चयनित उम्मीदवार का चरित्र सत्यापन नियुक्ति प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है.
इसका उद्देश्य नियुक्ति से पहले उम्मीदवार के पिछले रिकॉर्ड और उसके द्वारा दी गई जानकारी की जांच करना है.
उत्तर प्रदेश सरकार की नई नीति के अनुसार सरकारी नौकरी के लिए चयनित उम्मीदवारों का सत्यापन संबंधित नियुक्ति प्राधिकारी की ओर से कराया जाएगा.इसके लिए नियुक्ति प्राधिकारी उम्मीदवार का विवरण पुलिस और संबंधित जिला प्रशासन को भेजेंगे.यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है. सामान्य चरित्र प्रमाण पत्र बनवाने के लिए व्यक्ति स्वयं आवेदन कर सकता है, लेकिन सरकारी नौकरी में विभागीय सत्यापन नियुक्ति प्राधिकारी की प्रक्रिया का हिस्सा होता है इसलिए हर भर्ती में उम्मीदवार को अपने स्तर पर नया पुलिस चरित्र प्रमाण पत्र बनवाना ही होगा ऐसा मान लेना सही नहीं है. उम्मीदवारों को संबंधित भर्ती और नियुक्ति विभाग के निर्देशों का पालन करना चाहिए.
यूपी सरकार ने चरित्र सत्यापन को लेकर क्या नए निर्देश दिए हैं?
उत्तर प्रदेश सरकार ने सीधी भर्ती के तहत सरकारी नौकरी पाने वाले उम्मीदवारों के चरित्र सत्यापन के लिए नई नीति जारी की है.नियुक्ति विभाग के प्रमुख सचिव एम. देवराज की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार यह व्यवस्था सरकारी विभागों, निगमों, परिषदों और स्थानीय निकायों सहित संबंधित संस्थानों की सीधी भर्ती पर लागू होगी.नई नीति में उम्मीदवारों के पिछले रिकॉर्ड की जांच, पुलिस रिपोर्ट और नियुक्ति से संबंधित प्रक्रिया को स्पष्ट किया गया है.इसके साथ यह भी बताया गया है कि किन परिस्थितियों में किसी उम्मीदवार को सरकारी सेवा के लिए अनुपयुक्त माना जा सकता है.
सरकारी नौकरी के लिए कौन कराएगा चरित्र सत्यापन?
नई व्यवस्था में सरकारी नौकरी के लिए चयनित उम्मीदवार के सत्यापन की प्रक्रिया नियुक्ति प्राधिकारी शुरू करेगा.
नियुक्ति प्राधिकारी उम्मीदवार का विवरण पुलिस महानिदेशक (अभिसूचना), उसके गृह जिले के जिलाधिकारी और उन जिलों के जिलाधिकारियों को भेजेंगे जहां उम्मीदवार पिछले पांच वर्षों के दौरान किसी भी समय एक वर्ष से अधिक रहा हो.इसके बाद संबंधित जिलाधिकारी जिला पुलिस प्रमुख से रिपोर्ट प्राप्त करेंगे और अपनी आख्या नियुक्ति प्राधिकारी को भेजेंगे.इस तरह सरकारी नौकरी के लिए चरित्र सत्यापन में नियुक्ति विभाग, पुलिस और जिला प्रशासन की अलग-अलग भूमिकाएं होंगी.
पुलिस को कितने दिन में देनी होगी रिपोर्ट?
नई नीति के अनुसार जिला पुलिस और स्थानीय अभिसूचना इकाई को चरित्र सत्यापन की रिपोर्ट 30 दिन के भीतर देनी होगी.इस व्यवस्था का उद्देश्य सत्यापन की प्रक्रिया को निर्धारित समय में पूरा करना है.रिपोर्ट भेजने में देरी होने पर गृह विभाग की ओर से निगरानी की व्यवस्था भी बताई गई है.इससे उन उम्मीदवारों को राहत मिल सकती है जिनकी नियुक्ति प्रक्रिया चरित्र सत्यापन की रिपोर्ट लंबित होने के कारण आगे नहीं बढ़ पा रही थी.
क्या पुलिस घर आकर जांच करेगी?
नई सरकारी भर्ती सत्यापन नीति में सामान्य मामलों के लिए उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर जांच की व्यवस्था बताई गई है.इसके अनुसार सामान्य मामलों में पुलिस और स्थानीय अभिसूचना इकाई को उम्मीदवार के घर जाकर जांच करने की जरूरत नहीं होगी.उम्मीदवार की व्यक्तिगत उपस्थिति भी अनिवार्य नहीं होगी.विशेष परिस्थितियों में नियुक्ति प्राधिकारी के निर्देश पर मौके पर जांच कराई जा सकती है इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि हर उम्मीदवार के घर पुलिस जरूर आएगी या हर उम्मीदवार को थाने जाकर पूछताछ में शामिल होना होगा.
पुलिस की रिपोर्ट प्रतिकूल आई तो क्या होगा?
अगर किसी उम्मीदवार के चरित्र सत्यापन में पुलिस की ओर से प्रतिकूल रिपोर्ट दी जाती है तो उसके मामले में आगे जांच और निर्धारित प्रक्रिया अपनाई जाएगी.नई नीति के अनुसार जिलाधिकारी संबंधित उम्मीदवार को अपना पक्ष रखने का अवसर देंगे.यह सुनवाई ऑनलाइन या व्यक्तिगत रूप से हो सकती है.इसका मतलब है कि प्रतिकूल पुलिस रिपोर्ट आने पर उम्मीदवार को अपनी बात रखने का मौका मिलेगा इसलिए केवल पुलिस रिपोर्ट प्रतिकूल होने को अपने आप अंतिम अयोग्यता नहीं माना जाना चाहिए.
क्या एफआईआर दर्ज होने पर नहीं मिलेगा कैरेक्टर सर्टिफिकेट?
यह सवाल उन उम्मीदवारों के लिए महत्वपूर्ण है जिनके खिलाफ कभी एफआईआर दर्ज हुई है.नई सरकारी भर्ती सत्यापन नीति में स्पष्ट किया गया है कि केवल एफआईआर दर्ज होने या किसी मामले की जांच लंबित होने से उम्मीदवार अपने आप सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य नहीं होगा.ऐसे मामलों में संबंधित तथ्यों और परिस्थितियों की जांच की जाएगी.सरकारी नौकरी में अंतिम निर्णय संबंधित नियमों, मामले की स्थिति और सत्यापन के आधार पर होगा.
क्या प्रदर्शन में शामिल होने से सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी?
नई नीति में हिंसक गतिविधियों से जुड़े संगठनों की सदस्यता को लेकर भी प्रावधान किया गया है.इसके अनुसार ऐसे संगठन जिनका घोषित उद्देश्य हिंसक तरीके से मौजूदा सामाजिक व्यवस्था को बदलना है.उनके सदस्य सरकारी सेवा के लिए अनुपयुक्त माने जा सकते हैं.यदि कोई उम्मीदवार 21 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद और सत्यापन की तारीख से पिछले तीन वर्षों के भीतर ऐसी गतिविधियों में शामिल रहा है तो इसे उसकी सक्रिय संलिप्तता का प्रमाण माना जाएगा हालांकि इस दौरान उसके व्यवहार में बदलाव के ठोस और सकारात्मक प्रमाण उपलब्ध होने पर उन पर भी विचार किया जाएगा.सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल राजनीतिक विचारधारा के आधार पर किसी व्यक्ति को सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य नहीं माना जाएगा इसलिए किसी शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होने और हिंसक तरीके से व्यवस्था बदलने का उद्देश्य रखने वाले संगठन से जुड़ने को एक जैसा नहीं माना जाना चाहिए.