क्या अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद से अमेरिका के ट्रांसजेंडर बच्चों के माता-पिता की टेंशन, एंजायटी और डिप्रेशन बढ़ गया है? आंकड़े कुछ ऐसा ही बता रहे हैं. एक नई स्टडी में सामने आया है कि ट्रंप के जनवरी 2025 में राष्ट्रपति पद संभालने के बाद ट्रांसजेंडर बच्चों के माता-पिता में डिप्रेशन बढ़ा और खुशी जैसी सकारात्मक भावनाएं कम हुईं हैं. शोधकर्ताओं के मुताबिक इन बच्चों के पैरेंट्स में उनके भविष्य को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं और उनके बिगड़ते मानसिक स्वास्थ्य का कारण है.
यह ताजा स्टडी Psychological Science नाम की रिसर्च जर्नल में प्रकाशित हुई है. इसके लेखकों का कहना है कि मौजूदा राजनीतिक माहौल का असर उन माता-पिता पर जल्दी दिखाई देने लगा, जो अपने ट्रांसजेंडर बच्चों का समर्थन करते हैं.
कैसे की गई स्टडी?
इस रिसर्च में वैज्ञानिकों ने 2022 से 2024 के बीच जुटाए गए आंकड़ों का इस्तेमाल किया. इसमें 73 ट्रांसजेंडर बच्चों और 87 सिजेंडर बच्चों के साथ उनके माता-पिता को शामिल किया गया था. ट्रांसजेंडर वे लोग होते हैं, जिनकी जेंडर पहचान जन्म के समय तय किए गए लिंग से अलग होती है. वहीं, सिजेंडर वे लोग होते हैं, जिनकी जेंडर पहचान जन्म के समय तय किए गए लिंग से मेल खाती है.
डोनाल्ड ट्रंप के जनवरी 2025 में राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के बाद शोधकर्ताओं ने सात हफ्तों तक हर सप्ताह सर्वे किया. इसमें लोगों से उनकी जेंडर पहचान और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े सवाल पूछे गए. खास तौर पर डिप्रेशन, एंग्जायटी यानी बेचैनी और चिंता, और सकारात्मक भावनाओं का आकलन किया गया.
ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के क्यों दिखा ये बदलाव?
स्टडी के नतीजों में पाया गया कि ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद ट्रांसजेंडर बच्चों के माता-पिता में डिप्रेशन के लक्षण बढ़े. वहीं, उनकी सकारात्मक भावनाओं में कमी आई. 2024 के राष्ट्रपति चुनाव से पहले इन माता-पिता का मानसिक स्वास्थ्य सिजेंडर बच्चों के माता-पिता के लगभग बराबर था. शोधकर्ताओं ने इन माता-पिता में एंग्जायटी बढ़ने की बात भी दर्ज की. यानी बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता और बेचैनी बढ़ती दिखाई दी.
ट्रांसजेंडर बच्चों के अधिकारों और उन्हें मिलने वाले समर्थन में आई कमी माता-पिता के तनाव की बड़ी वजह थी. (Image- REUTERS)
माता-पिता में बच्चों के अधिकारों को लेकर बढ़ी चिंता
शोधकर्ताओं के मुताबिक, ट्रांसजेंडर बच्चों के अधिकारों और उन्हें मिलने वाले समर्थन में आई कमी माता-पिता के तनाव की बड़ी वजह थी. उन्हें चिंता थी कि नई सरकार की नीतियों का उनके बच्चों की जिंदगी, सुरक्षा और भविष्य पर क्या असर पड़ेगा. न्यूजवाइज की रिपोर्ट के मुताबिक, एक अभिभावक ने राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण के बाद सर्वे में लिखा, ‘पिछला हफ्ता मेरे जीवन के सबसे खराब हफ्तों में से एक रहा.’ वहीं एक और पैरंट ने अपनी भावनाओं को रिजेक्शन और दुख से जुड़ा बताया. इन लोगों को घबराहट महसूस हुई.
दिलचस्प बात ये है कि इस स्टडी में जहां माता-पिता में एंजायटी और डिप्रेशन बढ़ा वहीं ट्रांसजेंडर बच्चों की मेंटल हेल्थ में ऐसा कोई बड़ा बदलाव नहीं नजर आया. हालांकि, दूसरे बच्चों की तुलना में उनमें सकारात्मक भावनाएं कम थीं और एंग्जायटी ज्यादा थी. शोधकर्ताओं का मानना है कि माता-पिता अपने बच्चों के सामने आने वाले खतरों को लेकर पहले से चिंतित हो जाते हैं. उन्हें आशंका हो सकती है कि आने वाले समय में बच्चों को किन मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा. यही वजह है कि माता-पिता की मेंटल हेल्थ खराब हुई पर बच्चों पर तुरंत असर नहीं दिखा.
ट्रंप प्रशासन ने ट्रांसजेंडर लोगों को लेकर क्या फैसले किए?
जनवरी 2025 में राष्ट्रपति बनने के बाद डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने ट्रांसजेंडर लोगों से जुड़े कई कार्यकारी आदेश जारी किए. इनका असर सरकारी नीतियों, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और सैन्य सेवा जैसे क्षेत्रों पर पड़ सकता है. ट्रंप के इन फैसलों में नाबालिगों के लिए जेंडर-पुष्टि करने वाले मेडिकल इलाज को कंट्रोल करना जैसी चीजें भी शामिल हैं. इस तरह के इलाज में व्यक्ति की जेंडर पहचान के अनुरूप उसे मेडिकल सहायता दी जाती है. इसके अलावा, ट्रंप के राष्ट्रपति बनते ही ट्रांसजेंडर स्टूडेंटों का समर्थन करने वाले स्कूलों की सरकारी फंडिंग रोकने के कोशिश भी की गई. ट्रांसजेंडर लड़कियों और महिलाओं को महिला खेल श्रेणियों में हिस्सा लेने से रोकने की नीति भी प्रशासन के एजेंडे में शामिल रही. ट्रंप की इन नीतियों का भले ही कुछ लोगों ने समर्थन किया हो, लेकिन इन्होंने ट्रांसजेंडर लोगों और उनके परिवारों की मुश्किलें बढ़ाई.
हालांकि ये स्टडी पूरी हकीकत या कहानी साफ रखती है, इसपर शक है. सर्वे काफी कम लोगों पर किया गया है. साथ ही इसमें शामिल परिवारों का राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण के बाद केवल सात हफ्तों तक सर्वे किया गया. इसलिए इन नतीजों के आधार पर अमेरिका के सभी ट्रांसजेंडर बच्चों और उनके माता-पिता के बारे में निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता. ऐसे में शोधकार्ताओं का कहना है कि इसपर बड़े स्तर पर शोध होना चाहिए ताकि ये पता चले कि बदलती सरकारी नीतियों और राजनीतिक माहौल का परिवारों पर लंबे समय में क्या असर पड़ता है.
शोधकर्ताओं के मुताबिक, ट्रांसजेंडर लोगों, खासकर बच्चों और किशोरों, को लेकर जब सामाजिक और राजनीतिक बहस तेज होती है, तो यह समझना जरूरी हो जाता है कि इसका असर किन लोगों पर पड़ रहा है और उनकी मानसिक सेहत को किस तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है.