Kapil Sibal on I-PAC offices raid case in Supreme Court। ममता CM नहीं, काहे का डर… ED की याचिका और SC में कपिल सिब्‍बल की जोरदार दलील

Kapil Sibal on I-PAC offices raid case in Supreme Court। ममता CM नहीं, काहे का डर… ED की याचिका और SC में कपिल सिब्‍बल की जोरदार दलील


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ममता CM नहीं, काहे का डर… ED की याचिका और SC में कपिल सिब्‍बल की जोरदार दलील

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सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी के खिलाफ ED की याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है. I-PAC दफ्तरों पर छापेमारी में बाधा के मामले में सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने दलील दी कि अब राज्य में दूसरी पार्टी की सरकार है और ममता सीएम नहीं हैं, इसलिए कोर्ट के आदेश की जरूरत नहीं है. अब कोर्ट तय करेगा कि मामले की जांच CBI को सौंपी जाए या राज्य सरकार को.

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कोर्ट ने आदेश सुरक्षित रख लिया है.

सुप्रीम कोर्ट में इस वक्त जो पॉलिटिकल ड्रामा चल रहा है, उसने सचमुच सबका दिमाग घुमा दिया है. पश्चिम बंगाल की पूर्व सीएम ममता बनर्जी के खिलाफ ईडी की याचिका पर जब सुनवाई हुई तो कपिल सिब्बल ने अदालत में गजब का दांव खेला. सिब्बल साहब ने सीधा और दो टूक कह दिया, भाई अब ममता बनर्जी मुख्यमंत्री थोड़ी हैं, और बंगाल में सरकार भी दूसरी पार्टी की है, तो फिर सुप्रीम कोर्ट के आदेश की क्या तुक बनती है? वे खुद जांच कराने के लिए आजाद हैं. दूसरी तरफ, I-PAC दफ्तरों में छापेमारी के विवाद पर कोर्ट का रुख भी काफी सख्त और दिलचस्प बना हुआ है. अब देखना ये है कि सुप्रीम कोर्ट इस केस की कमान सीबीआई को सौंपता है या गेंद नई सरकार के पाले में डालता है.

क्या है पूरा माजरा और I-PAC विवाद?
यह पूरा मामला तृणमूल कांग्रेस (TMC) की राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म I-PAC के दफ्तरों में ईडी की छापेमारी के दौरान हुई कथित रुकावट और बवाल से जुड़ा है. ईडी चाहती थी कि इस मामले में ममता बनर्जी और कुछ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कड़ी जांच की जाए. जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच के सामने जब इस पर बहस छिड़ी, तो सबकी निगाहें इसी बात पर टिकी थीं कि कोर्ट अब क्या रुख अपनाएगा. फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने इस सीमित मुद्दे पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है कि इस केस की जांच सीबीआई (CBI) को सौंपी जाए या इसे नई राज्य सरकार के हवाले किया जाए.

सरकार बदली, तो फिर कोर्ट के आदेश की क्या तुक?
कोर्ट में सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने अपनी दलीलें रखनी. सिब्बल ने बड़े बेबाक अंदाज में अदालत से कहा कि अब सिनेरियो पूरी तरह बदल चुका है. उनके शब्दों में कहें तो, “अब ममता बनर्जी मुख्यमंत्री नहीं हैं, इसलिए कोई बाधा नहीं है. अब राज्य सरकार किसी दूसरी राजनीतिक पार्टी के हाथों में है.” सिब्बल ने आगे यह भी तर्क दिया कि जब मौजूदा सरकार किसी और पार्टी की है, तो वे किसी भी मामले को स्वतंत्र रूप से जांचने या सीबीआई को भेजने के लिए पूरी तरह आजाद हैं. उनके रास्ते में कोई रुकावट नहीं आ सकती. ऐसे में उन्होंने तंज कसते हुए सवाल उठाया कि “फिर अदालत को इस पर कोई आदेश पारित करने की जरूरत ही क्यों है?”

अब फैसले पर टिकी हैं सबकी नजरें
कपिल सिब्बल के इस तीखे और रणनीतिक वार के बाद अब हर किसी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट के आने वाले फैसले पर टिकी हैं. अदालत यह तय करेगी कि बंगाल के इस हाई-प्रोफाइल मामले की कमान केंद्रीय एजेंसी सीबीआई को मिलेगी या गेंद नई राज्य सरकार के पाले में डाली जाएगी.



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