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Kanpur Zoo : कानपुर प्राणी उद्यान का दरियाई घोड़ा सतीश वन्यजीवों की अदला-बदली के तहत इंदौर के चिड़ियाघर के लिए रवाना कर दिया गया है. करीब 800 किलोमीटर के इस सफर में उसकी नमी बनाए रखने के लिए 20 हजार लीटर पानी का इंतजाम किया गया है. लोकल 18 से कानपुर प्राणी उद्यान के रेंजर फिरोज खान बताते हैं कि सतीश के सफर को सुरक्षित बनाने के लिए ऐसा पिंजड़ा तैयार किया गया है, जिसमें जरूरत पड़ने पर उसके शरीर पर पानी डाला जा सके. रास्ते में जरूरत के मुताबिक वाहन रोककर सतीश को नहलाया जाएगा. कानपुर प्राणी उद्यान में जन्मा सतीश अब तक यहीं के माहौल में रहा है. ऐसे में दूसरे शहर और नए बाड़े में पहुंचने के बाद उसे वहां के वातावरण के अनुकूल ढालना होगा.
कानपुर. यूपी के कानपुर प्राणी उद्यान में जन्मा दरियाई घोड़ा सतीश अब इंदौर के चिड़ियाघर में नया ठिकाना बनाएगा. सतीश को विशेष इंतजामों के साथ इंदौर के लिए रवाना कर दिया गया. करीब 800 किलोमीटर के इस सफर को पूरा करने में दो से तीन दिन लगने की उम्मीद है. सतीश को सिर्फ एक वाहन में बैठाकर नहीं ले जाया जा रहा, बल्कि उसकी सेहत और शरीर की नमी का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा. इसके लिए पूरे रास्ते में करीब 20 हजार लीटर पानी का इंतजाम किया गया है. यात्रा के दौरान जगह-जगह वाहन रोककर उसे नहलाया जाएगा, ताकि लंबा सफर उसके लिए परेशानी भरा न हो. लोकल 18 से कानपुर प्राणी उद्यान के रेंजर फिरोज खान ने बताया कि सतीश को इंदौर ले जाने के लिए काफी समय से तैयारी चल रही थी. उसे विशेष पिंजड़े में ले जाने के लिए कई बार कोशिश की गई, लेकिन वह शुरुआत में अंदर जाने से बचता रहा. बाद में जब सतीश पिंजड़े में जाने लगा, तो इंदौर चिड़ियाघर की टीम को इसकी सूचना दी गई. इसके बाद इंदौर के चिड़ियाघर के निदेशक और उनकी टीम कानपुर पहुंची. टीम ने कानपुर प्राणी उद्यान के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ मिलकर सतीश को रवाना करने की तैयारी पूरी की.
इतने पानी की जरूरत क्यों
सतीश के सफर को सुरक्षित बनाने के लिए विशेष पिंजड़ा तैयार किया गया है. इसमें ऐसी व्यवस्था की गई है, जिससे जरूरत पड़ने पर रास्ते में उसके शरीर पर पानी डाला जा सके. दरियाई घोड़ा अपना काफी समय पानी में बिताता है. पानी उसके शरीर को ठंडा रखने और त्वचा की नमी बनाए रखने में मदद करता है. ऐसे में लंबे सफर के दौरान पानी की व्यवस्था बेहद जरूरी है. इसी को ध्यान में रखते हुए करीब 20 हजार लीटर पानी का इंतजाम किया गया है. रास्ते में जरूरत के मुताबिक वाहन रोककर सतीश को नहलाया जाएगा. अधिकारियों की कोशिश है कि सफर के दौरान उसे गर्मी और दूसरी परेशानियों से बचाया जा सके.
कानपुर और इंदौर चिड़ियाघर के बीच वन्यजीवों की अदला-बदली के तहत यह व्यवस्था की गई है. इसके तहत इंदौर से शेरनी बिजली को कानपुर लाया गया है, जबकि कानपुर से सतीश को इंदौर भेजा जा रहा है. शेरनी बिजली के कानपुर पहुंचने के बाद उसकी सेहत की जांच की गई और फिर उसे चिड़ियाघर में रखा गया. इस तरह के वन्यजीव विनिमय कार्यक्रम का उद्देश्य चिड़ियाघरों में अलग-अलग प्रजातियों के वन्यजीवों की संख्या बढ़ाना और उनके प्रजनन की संभावनाओं को बेहतर बनाना है.
नए माहौल में ढलने की चुनौती
कानपुर प्राणी उद्यान में जन्मा सतीश अब तक यहीं के माहौल में रहा है. ऐसे में दूसरे शहर और नए बाड़े में पहुंचने के बाद उसे वहां के वातावरण के अनुकूल ढालना जरूरी होगा. इंदौर पहुंचने पर उसकी सेहत, खानपान और व्यवहार पर नजर रखी जाएगी. सफर के दौरान भी उसके आराम और पानी का विशेष ध्यान रखा जाएगा. कानपुर प्राणी उद्यान के कर्मचारियों के लिए सतीश को विदा करना भावुक पल है. अब सभी की नजरें उसके सुरक्षित इंदौर पहुंचने पर टिकी हैं.