CA बनने के लिए मुंबई पहुंचे थे अभिजीत भट्टाचार्य, स्टूडियो के बाहर काटते थे चक्कर, जानें कैसे बने सुपरहिट सिंगर

CA बनने के लिए मुंबई पहुंचे थे अभिजीत भट्टाचार्य, स्टूडियो के बाहर काटते थे चक्कर, जानें कैसे बने सुपरहिट सिंगर


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बॉलीवुड को ‘तुम दिल की धड़कन में’ और ‘बड़ी मुश्किल है’ जैसे अनगिनत सुपरहिट गाने देने वाले मशहूर प्लेबैक सिंगर अभिजीत भट्टाचार्य का जीवन संघर्ष और सफलता की एक बेहतरीन मिसाल है. आज अपना जन्मदिन मना रहे अभिजीत चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने का सपना लेकर मुंबई आए थे, लेकिन किस्मत उन्हें संगीत की दुनिया में ले आई. आर्थिक तंगी, क्लर्क की नौकरी और स्टूडियो के बाहर चक्कर काटने के बाद उन्हें आरडी बर्मन की फिल्म से पहला ब्रेक मिला, जिसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा.

नई दिल्ली. मशहूर प्लेबैक सिंगर अभिजीत भट्टाचार्य की म्यूजिक जर्नी बेहद दिलचस्प रही है. उन्होंने बॉलीवुड को ‘तुम दिल की धड़कन में’, ‘मैं कोई ऐसा गीत गाऊं’ और ‘बड़ी मुश्किल है’ जैसे ढेरों सदाबहार नगमे दिए हैं. 90 के दशक में अपनी सुरीली आवाज से लाखों दिलों पर राज करने वाले अभिजीत शुरुआत में चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने की ख्वाइश लिए मुंबई पहुंचे थे. लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था और उनकी गायकी ने उन्हें इंडस्ट्री के सबसे सफल गायकों की कतार में ला खड़ा किया. आज अभिजीत भट्टाचार्य का जन्मदिन है और इस खास मौके पर हम आपको उनकी म्यूजिक इंडस्ट्री में जर्नी के बारे में बताते हैं. (फोटो: Instagram@abhijeetbhattacharya)

30 अक्टूबर 1958 में कानपुर के एक बंगाली परिवार में जन्मे अभिजीत शुरुआत से ही पढ़ाई में दिलचस्पी रखते थे और सीए बनना चाहते थे, जिसके लिए वह क्राइस्ट चर्च कॉलेज से बी.कॉम की पढ़ाई पूरी करने के बाद साल 1981 में चार्टर्ड अकाउंटेंसी का कोर्स करने मुंबई आए थे. हालांकि, उनके दिल में संगीत बसता था, इसलिए उन्होंने सीए की पढ़ाई बीच में ही छोड़कर प्लेबैक सिंगिंग में हाथ आजमाने का फैसला किया. (फोटो: Instagram@abhijeetbhattacharya)

दरअसल, मुंबई आने के बाद उनका पूरा ध्यान और दिल संगीत की तरफ खिंचता चला गया. उन्हें एहसास हुआ कि उनका असली सपना प्लेबैक सिंगिंग है, जिसके बाद उन्होंने सीए की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी और अपना पूरा वक्त गायकी के संघर्ष में लगा दिया. हालांकि, मुंबई आने के बाद गायक को आर्थिक तंगी का सामना इस कदर करना पड़ा कि उन्हें छोटे गेस्ट हाउस और तंग कमरों में रहना पड़ा. (फोटो: Instagram@abhijeetbhattacharya)

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मुंबई में अपना खर्च चलाने के लिए अभिजीत भट्टाचार्य ने क्लर्क से लेकर कई छोटी-मोटी नौकरियां भी कीं. वह कई बार निराश होकर कानपुर लौट जाते थे. लेकिन संगीत का आकर्षण उन्हें दोबारा मुंबई खींच लाता था. इस दौरान वह आरडी बर्मन, बप्पी लहरी और राजेश रोशन जैसे संगीतकारों से मिलने के लिए उनके घरों के बजाय सीधे रिकॉर्डिंग स्टूडियो के चक्कर काटा करते थे और बाहर घंटों इंतजार करते थे. (फोटो: Instagram@abhijeetbhattacharya)

इसी बीच संगीतकार रविंद्र जैन ने उन्हें अपने साथ रहने की जगह दी, जिससे बॉलीवुड इंडस्ट्री से उनकी नजदीकी थोड़ी बढ़ी. इसके बाद उन्हें राजेश रोशन और जगजीत सिंह जैसे दिग्गजों के गानों में बतौर कोरस सिंगर का काम मिलने लगा. दो साल के कड़े संघर्ष के बाद संगीत निर्देशक आरडी बर्मन ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें देव आनंद के बेटे सुनील आनंद की डेब्यू फिल्म ‘आनंद और आनंद’ (1984) में पहला बड़ा ब्रेक दिया. (फोटो: Instagram@abhijeetbhattacharya)

इस फिल्म में अभिजीत को किशोर कुमार, लता मंगेशकर और आशा भोसले जैसे महान गायकों के साथ गाने का मौका मिला. अभिजीत को लगा कि उनका करियर अब चल पड़ेगा लेकिन दुर्भाग्य से यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप हो गई और उनके पास आ रहा काम अचानक बंद हो गया. (फोटो: Instagram@abhijeetbhattacharya)

अभिजीत भट्टाचार्य का करियर शुरू होने से पहले ही दोबारा अधर में लटक गया. 6 से 7 साल के लंबे संघर्ष के बाद सिंगर ने गुलशन कुमार और टी-सीरीज के लिए किशोर कुमार के गानों के कवर वर्जन रिकॉर्ड किए. दूरदर्शन के शोज में किशोर कुमार के गीतों को गाकर उन्होंने भारतीय घरों में अपनी थोड़ी पहचान बनाई. (फोटो: Instagram@abhijeetbhattacharya)

साल 1990 में संगीतकार जोड़ी आनंद-मिलिंद ने उन्हें सलमान खान स्टारर फिल्म ‘बागी’ में गाने का मौका दिया. इस फिल्म का गाना ‘एक चंचल शोख हसीना’ और ‘चांदनी रात है’ ब्लॉकबस्टर साबित हुए. इन गानों की सफलता ने अभिजीत को रातोंरात स्टार बना दिया और उनके 9 साल के लंबे संघर्ष का अंत हुआ. (फोटो: Instagram@abhijeetbhattacharya)

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