6 फीट लंबा और 3 फीट चौड़ा कैमरा, लंदन जाती थी फिल्म, 6 माह में मिलती थी फोटो; 100 साल पहले ऐसे होती थी फोटोग्राफी

6 फीट लंबा और 3 फीट चौड़ा कैमरा, लंदन जाती थी फिल्म, 6 माह में मिलती थी फोटो; 100 साल पहले ऐसे होती थी फोटोग्राफी


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100 साल पुराना 6 फीट लंबा कैमरा, लंदन जाती थी फिल्म, 6 माह में मिलती थी फोटो

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आज एक क्लिक में फोटो मिल जाती है. लेकिन सौ साल पहले ऐसा नहीं था. दिल्ली में एक ऐसा अनोखा कैमरा मिला है जो छह फीट लंबा है. इसकी एक फिल्म का वजन साढ़े सात किलो है. इस कैमरे से फोटो खींचने के बाद उसे डेवलप होने के लिए लंदन भेजा जाता था. फोटो आने में छह महीने लगते थे.

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नई दिल्लीः आज के वक्त में एक फोटो खींचकर उसे दुनिया भर में शेयर करना चंद सेकंड का काम है, लेकिन आज से करीब 100 साल पहले एक फोटो खींचना और उस फोटो को हासिल करने में ही 6 महीने का वक्त लग जाता था. आज से 100 साल पहले फोटो खींचना कितना मुश्किल काम होता था, यह तब पता चला जब दिल्ली के बाली नगर में रहने वाले डॉ. आदित्य विज के घर पर 100 साल पुराना फील्ड कैमरा मिला. यह कैमरा 6 फीट लंबा और 3 फीट चौड़ा है. यह किसी अजूबे से कम नहीं है. यह देखने में इतना भारी है जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि इससे फोटो खींचना कितना मुश्किल काम होता होगा. हमने डॉ. आदित्य विज से खास बातचीत की.

1930 का है यह फील्ड कैमरा
डॉ. आदित्य विज ने बताया कि इस कैमरे का नाम फील्ड कैमरा है. इसे फील्ड कैमरा कहते हैं. यह 1930 का है और यह है पूरी तरह से मेड इन लंदन है. उन्होंने बताया कि आज से करीब 100 साल पहले जब किसी महल को बनाना होता था या फिर कोई बड़ा डैम या इमारत को बनाना होता था तब इस कैमरे का इस्तेमाल किया जाता था ताकि एक पूरी बड़ी फोटो ली जा सके. इसका जो लेंस है उसे भी खिंचा जाता था और कैमरे के पीछे चैनल लगा हुआ है जिस पर खड़े होकर कैमरे को आगे पीछे किया जाता था. इसमें जो लेंस है वह जर्मन मेड लेंस है. उस लेंस को भी बदल सकते थे. इसके बाद कैमरे की फिल्म एक बड़े से लकड़ी के बॉक्स में ली जाती थी जिसके ढक्कन को हटाया जाता था. फिर उसके अंदर पेपर चिपकाया जाता था. फिर उसे कैमरे के पीछे फिट कर दिया जाता था. फिल्म फिट हो जाती थी. इसके बाद बैक साइड से शटर को खोल देते थे और फोटो उस पर आ जाती थी.

फोटो डेवलप के लिए भेजा जाता था लंदन
डॉ. आदित्य विज ने बताया कि ऐसी ही 5 से 6 फोटो ले ली जाती थी. फिर उसे डेवलप होने के लिए लंदन भेजा जाता था. फोटो को वापस आने में 6 से 7 महीने का वक्त लग जाता था. जब फोटो आ जाती थी उसके बाद ही उसके ऊपर चर्चा होती थी. उन्होंने बताया कि कैमरे का वजन कितना है यह कह पाना मुश्किल है लेकिन इसकी एक फिल्म का जो वजन है वह साढ़े सात किलो है. फिलहाल कैमरे की कीमत के बारे में भी कुछ भी नहीं कहा जा सकता. उन्होंने बताया कि जोधपुर में आज भी जो बड़े-बड़े महल है वहां पर ऐसी बड़ी फोटो आज भी लगी हुई हैं जो बहुत कम देखने के लिए मिलती हैं.



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