US mid term election: डोनाल्ड ट्रंप को उनको गढ़ में ही लग सकता है झटका, जिनके दम पर बने राष्ट्रपति वही करने लगे तौबा, क्या डेमोक्रेट्स की लगेगी लॉटरी

US mid term election: डोनाल्ड ट्रंप को उनको गढ़ में ही लग सकता है झटका, जिनके दम पर बने राष्ट्रपति वही करने लगे तौबा, क्या डेमोक्रेट्स की लगेगी लॉटरी


टैक्‍सास, जिसे ट्रंप का गढ़ माना जाता है, वहां भी उनकी पार्टी के ल‍िए खुशखबरी के बजाए च‍िंता की खबर ही आ रही है. ट्रंप का टैरिफ टशन हो या फ‍िर ईरान के साथ युद्ध का फैसला, लोग नाराज हैं और वोटर्स कुछ और ही मन बना रहे हैं. ‘नेशनल हेराल्‍ड’ की र‍िपोर्ट बताती है कि चुनावों का व‍िश्‍लेषण करने वाले ज्यादातर बड़े संस्थानों का अनुमान है कि डेमोक्रेटिक पार्टी प्रतिनिधि सभा में फिर से बहुमत हासिल कर सकती है. हालांकि अभी सीनेट की स्‍थ‍िति क्‍या होगी, साफ नहीं है.

ट्रंप ने इस चुनाव प्रचार के दौरान अपने समर्थकों में उत्साह बढ़ाने के लिए कई वादे किए हैं और रैलियां की हैं. ट्रंप ने तो मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के जीतने पर हर अमेरिकी वयस्क को 5,000 डॉलर देने का एलान भी क‍िया है. इन चुनावों में ट्रंप अपनी सख्‍त नीतियों से पिघलते और यह वादा करते हुए भी नजर आए कि वह रूस पर लगे प्रतिबंधों में ढील दे सकते हैं और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ डीजल खरीदने का समझौता करने की इच्छा रखते हैं.

पुराने गढ़ों पर ट्रंप का न‍िशाना
ट्रंप ने अब उन राज्यों पर ज्यादा ध्यान देना शुरू कर दिया है, जहां 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में उन्हें निर्णायक जीत मिली थी. उनकी कोशिश है कि रिपब्लिकन पार्टी के समर्थन में और गिरावट न आए. हाल के दिनों में उनकी रैलियों को ‘ट्रंपापालूजा’ नाम दिया गया है. ऐसा ही गढ़ है टेक्‍सास. राष्ट्रपति चुनाव में उन्होंने यह राज्य 14 प्रतिशत अंकों के अंतर से जीता था. इसके बावजूद, रिपोर्ट के मुताबिक, रिपब्लिकन उम्मीदवार केन पैक्सटन सीनेट की दौड़ में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जेम्स तालारिको से 1.5 प्रतिशत अंकों से पीछे चल रहे हैं. टेक्सास जैसे राज्य में यह बदलाव काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि यहां पहले रिपब्लिकन पार्टी का दबदबा रहा है.

अपने समर्थकों के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप. फोटो- रायटर

ट्रंप ने सोमवार को मिसिसिपी में रैली की. 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में उन्होंने यह राज्य 24 प्रतिशत अंकों के अंतर से जीता था. रविवार को वह मिशिगन पहुंचे थे, जहां उनकी जीत का अंतर काफी कम था. इससे पहले वह फ्लोरिडा और आयोवा में भी रैलियां कर चुके हैं. इन दोनों राज्यों में उन्होंने 2024 का राष्ट्रपति चुनाव करीब 13 प्रतिशत अंकों के अंतर से जीता था.

महंगाई बन गई है बड़ी मुसीबत
इन मिडटर्म चुनावों में अगर डेमोक्रेटिक पार्टी प्रतिनिधि सभा पर हावी हो जाती है तो ये अमेरिकी पॉल‍िट‍िक्‍स के पुराने पैटर्न जैसा ही होगा. इतिहास बताता है कि मिडटर्म चुनावों में अक्सर राष्ट्रपति की पार्टी को सीटों का नुकसान होता है. ओपिनियन पोल के आंकड़ों को एक जगह जुटाने वाली वेबसाइट रियल क्लियर पॉलिटिक्स के मुताबिक, ट्रंप के कामकाज को 38.2 फीसदी लोग मंजूरी दे रहे हैं, जबकि 60.2 फीसदी लोग उनके प्रदर्शन से असंतुष्ट हैं. सर्वे का एक और अहम निष्कर्ष यह है कि 57 फीसदी मतदाताओं का कहना है कि ट्रंप की नीतियों ने उनकी आर्थिक स्थिति पहले से खराब कर दी है. चुनाव प्रचार में अर्थव्यवस्था सबसे बड़े मुद्दों में से एक बन गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, महंगाई की दर पिछले महीने बढ़कर 3.7 फीसदी हो गई, जबकि अगस्त में यह 3.4 फीसदी थी. ईंधन की बढ़ती कीमतों और आयात शुल्क ने भी आम परिवारों के बजट पर दबाव बढ़ाया है. पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी ट्रंप के लिए खास तौर पर नुकसानदेह साबित हो सकती है.

ईंधन महंगा होने का असर सिर्फ वाहन चलाने वालों तक सीमित नहीं रहता. इससे सामान ढोने, खाद्य पदार्थों की सप्लाई और रोजमर्रा की दूसरी सेवाओं की लागत भी बढ़ जाती है. इस तरह आम लोगों पर महंगाई का बोझ और बढ़ता है. वहीं, आयात शुल्क के कारण उपभोक्ता सामान भी महंगे हो सकते हैं.

क्‍या कहते हैं सीटों के आंकड़े
रियल क्लियर पॉलिटिक्स के अनुमान के मुताबिक, डेमोक्रेटिक पार्टी प्रतिनिधि सभा की कुल 435 सीटों में से 227 सीटें जीत सकती है. इनमें 25 सीटों पर मुकाबला बेहद करीबी माना गया है. कुक पॉलिटिकल रिपोर्ट का अनुमान है कि डेमोक्रेट्स को 220 सीटें मिल सकती हैं, जबकि 17 सीटों पर मुकाबला इतना कड़ा है कि अभी किसी की जीत का अनुमान लगाना मुश्किल है. वहीं सीबीएस न्यूज का अंदाजा है कि डेमोक्रेट्स को 229 और रिपब्लिकन पार्टी को 206 सीटें मिल सकती हैं. सीनेट की तस्वीर इससे ज्यादा अस्पष्ट है. इस साल सीनेट की 100 सीटों में से केवल 35 सीटों पर चुनाव हो रहा है. इसकी वजह यह है कि सीनेटर छह साल के कार्यकाल के लिए चुने जाते हैं और सभी सीटों पर एक साथ चुनाव नहीं होता. सीबीएस न्यूज के आकलन के मुताबिक, जिन सीटों पर इस बार चुनाव नहीं हो रहा है, उनमें डेमोक्रेट्स के पास 46 और रिपब्लिकन पार्टी के पास 44 सीटें हैं. बाकी 10 सीटों पर मुकाबला कड़ा माना जा रहा है. प्रतिस्पर्धी राज्यों में मौजूदा रुझानों के आधार पर नेटवर्क ने सीनेट में डेमोक्रेट्स को 52 और रिपब्लिकन पार्टी को 48 सीटें मिलने की संभावना जताई है.

राष्ट्रपति चुनाव में उन्होंने टैक्‍सास 14 प्रतिशत अंकों के अंतर से जीता था.
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