पटना: बहुचर्चित पटना स्नातक विधान परिषद सीट पर जनता दल युनाइटेड (जेडीयू) के प्रत्याशी नीरज कुमार ने लगातार चौथी बार जीत दर्ज की है. इस सीट पर नीरज कुमार ने प्रमुख प्रत्याशी आरजेडी के दिलीप कुमार पटेल और जनसुराज के उम्मीदवार अनुज सिंह को हराया है. हालांकि अभी फाइनल वोटों के आंकड़े आने बाकी हैं कि किस प्रत्याशी को कितने वोट मिले. पटना स्नातक सीट पर जीत मिलने के बाद नीरज कुमार ने पहली बार बाहुबली अनंत सिंह पर तंज कसते हुए कहा- ‘कहां है रे गुंजन, ले जा मिठाइयां’. दरअसल, चुनाव में जब अनंत सिंह ने जेडीयू विधायक होते हुए भी अपनी पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार नीरज कुमार का विरोध शुरू किया तब लोक गायक गुंजन सिंह ने खुलकर अनंत सिंह का समर्थन किया था. अनंत सिंह जिस अंदाज में बातें करते हैं, उसी को कॉपी करते हुए नीरज कुमार ने तंज कसा है.
पटना स्नातक सीट क्यों बना रहा नाक का सवाल
दरअसल, सत्ताधारी जेडीयू ने जैसे ही लगातार चौथी बार नीरज कुमार को पटना स्नातक एमएलसी चुनाव में बतौर प्रत्याशी उतारने की घोषणा की वैसे ही इसी पार्टी के बाहुबली विधायक अनंत सिंह ने इसका विरोध शुरू कर दिया. अनंत सिंह ने आरोप लगाया कि जेडीयू में रहते हुए नीरज कुमार ने उन्हें पिछले चुनावों में हराने के लिए हर तरह की रणनीति अपनाई. यह भी आरोप लगाया कि जब पार्टी के वरिष्ठ नेता ललन सिंह मुंगेर से लोकसभा चुनाव लड़ रहे थे तब भी नीरज कुमार ने उनके खिलाफ काम किया.
जेडीयू की तरफ से अनंत सिंह को शांत करने की पूरी कोशिश हुई, लेकिन सब बेकार साबित हुई. अनंत सिंह ने नीरज कुमार के खिलाफ नाराजगी जाहिर करने के लिए जनसुराज के प्रत्याशी अनुज सिंह के लिए प्रचार शुरू किया. यहां तक की अनुज सिंह के नॉमिनेशन में भी अनंत सिंह पूरे गाजे बाजे के साथ पहुंचे थे. कार्यकर्ता मन से अनुज सिंह के लिए काम कर सके इसलिए अनंत सिंह ने भारी संख्या में रसगुल्ला बनवाकर बांटे. 23 अक्टूबर को वोटिंग संपन्न होने के बाद अनंत सिंह और उनकी पत्नी और पूर्व विधायक नीलम देवी को पार्टी से छह साल के लिए निकाल दिया गया. अनंत सिंह बार-बार कहते रहे कि उन्होंने पार्टी के खिलाफ कभी कोई बयानबाजी नहीं की है, लेकिन नीरज कुमार के प्रति उनकी नाराजगी बरकरार रहेगी.
पहली ही परीक्षा में पास हुए निशांत
अनंत सिंह के खुले बगावत के बाद जेडीयू के लिए पटना स्नातक एमएलसी नाक का सवाल बन चुका था. दरअसल, नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद छोड़ने और करीब-करीब सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने के बाद उनके बेटे निशांत कुमार को राजनीति में लॉन्च किया गया है. कहा जाता है कि निशांत कुमार को पार्टी नेताओं के दबाव में पिता नीतीश कुमार राजनीति में आने दिए हैं. जेडीयू में आने के बाद निशांत कुमार के सामने पहले एमएलसी चुनाव पहली परीक्षा थी. खासकर पटना स्नातक सीट को जितना निशांत कुमार के लिए बड़ी चुनौती थी. निशांत कुमार ने भी उस चुनौती को स्वीकार और आगे बढ़कर पूरे एमएलसी चुनाव प्रबंधन की बागडोर अपने हाथों में ली.
नीरज कुमार के समर्थन में निशांत कुमार ने जन संवाद और सभाएं भी की. माना जा रहा है कि निशांत कुमार ने जब नीरज कुमार के लिए प्रचार शुरू कर दिया, वैसे ही अनंत सिंह जनता के बीच डाउन पड़ गए. वोटरों को समझ में आ गया कि जब नीतीश कुमार के बेटे नीरज कुमार के साथ हैं तो अनंत सिंह पर किस लिहाज से भरोसा किया जाए.
अनंत सिंह को बाहर कर निशांत ने दिया पार्टी में अनुशासन का संदेश
इतना ही नहीं, कई बार समझाने के बाद भी जब मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह जेडीयू के उम्मीदवार नीरज कुमार के खिलाफ प्रचार करते रहे तब निशांत कुमार ने उन्हें अनुशासन सिखाने का काम किया. एमएलसी चुनाव में वोटिंग संपन्न होने के साथ ही जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने अनंत सिंह और उनकी पत्नी और पूर्व विधायक नीलम देवी को छह साल के लिए पार्टी से बाहर कर दिया. इसके अलावा अनंत सिंह को सपोर्ट करने वाले छोटू सिंह को भी जेडीयू से निकाल दिया गया. यानी निशांत कुमार ने दिखा दिया कि अनुशासन के मामले में वह भी अपने पिता की ही तरह हैं. भले ही अनंत सिंह पांच बार के विधायक हैं, लेकिन अगर वह पार्टी का अनुशासन तोड़ेंगे तो उनपर भी ऐक्शन लेने में देरी नहीं की जाएगी.
पूरे चुनाव के दौरान निशांत कुमार बेहद छोटी-छोटी सभाएं भी करते दिखे. यूं कहें कि जिस तरह से उनके पिता नीतीश कुमार शुरुआती दिनों में गांव-गांव में छोटे मोटे स्टजे लगाकर भी अपनी बात जनता के सामने रखा करते थे. यानी एमएलसी चुनाव और खासकर पटना स्नातक सीट पर चुनाव प्रबंधन करने में निशांत कुमार ने बता दिया कि वह अपने पिता नीतीश कुमार से किसी मायने में पीछे नहीं हैं.
जेडीयू में निशांत युग की शुरुआत
पटना स्नातक सीट पर जीत दर्ज करने के बाद नीरज कुमार ने कहा- ‘इस जीत के साथ ही निशांत कुमार की राजनीति स्थापित हुई है.’ वहीं जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने भी कहा कि पटना स्नातक सीट पर मिली जीत सामान्य बात नहीं है. देखना दिलचस्प होगा कि एमएलसी चुनाव में निशांत कुमार की साहसिक प्लानिंग से मिली जीत के बाद पार्टी उन्हें आगे क्या जिम्मेदारी सौंपती है.