प्लास्टिक के स्ट्रॉ दुनियाभर में प्लास्टिक से होने वाले प्रदूषण का एक बड़ा कारण हैं. इसी सोच के साथ पिछले कुछ सालों में कई लोगों ने प्लास्टिक के बजाए कागज के स्ट्रॉ पर स्विच कर लिया है. लोगों को लगता है कि ऐसा हेल्थ और पर्यावरण दोनों के लिए ही फायदेमंद साबित होगा. यही वजह है कि आजकल जूस-कॉर्नर से लेकर बड़े-बड़े फूड चेन तक, कॉल्ड कॉफी या शेक पीने के लिए प्लास्टिक के बजाए कागज के स्ट्रॉ इस्तेमाल कर रहे हैं. लेकिन दक्षिण कोरिया की एक नई स्टडी कुछ और ही कहती है. इस नए अध्ययन में सामने आया कि कागज के स्ट्रॉ का इस्तेमाल करना पर्यावरण के लिए उतना फायदेमंद नहीं है, जितना हम समझ रहे हैं.
दक्षिण कोरिया के जलवायु, ऊर्जा और पर्यावरण मंत्रालय के कहने पर की गई इस स्टडी में पाया गया कि कागज के स्ट्रॉ का कैंसर पैदा करने वाला प्रभाव पुरानी प्लास्टिक स्ट्रॉ की तुलना में 6.33 गुना ज्यादा था. इनमें पर्यावरणीय अम्लीकरण (environmental acidification) का प्रभाव भी 2.04 गुना अधिक पाया गया. पर्यावरणीय अम्लीकरण से मिट्टी और पानी ज्यादा अम्लीय हो सकते हैं, जिससे पौधों, जानवरों और इकोसिस्टम को नुकसान पहुंच सकता है.
इस स्टडी में क्या पाया गया?
शोधकर्ताओं ने पारंपरिक प्लास्टिक स्ट्रॉ, जो पॉलीप्रोपाइलीन (PP) से बनाए जाते हैं, कागज के स्ट्रॉ, बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक स्ट्रॉ और नॉन-बायोडिग्रेडेबल बायो-बेस्ड पॉलीथीन (bio-PE) स्ट्रॉ के पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों की आपस में तुलना की. मई 2025 से अप्रैल 2026 तक किए गए इस आकलन में स्ट्रॉ की चार किस्मों के पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों की 16 कैटेगिरी में जांच की गई. पारंपरिक प्लास्टिक स्ट्रॉ का पर्यावरणीय प्रभाव 16 में से 10 कैटेगिरी में कम पाया गया. इनमें जलवायु परिवर्तन, वायु प्रदूषण और इंसानों पर पड़ने वाले जहरीले पदार्थों के प्रभाव जैसी श्रेणियां शामिल थीं. वहीं, कागज के स्ट्रॉ का कैंसर पैदा करने वाले प्रभाव और पर्यावरणीय अम्लीकरण जैसी श्रेणियों में प्रदर्शन खराब रहा.
इस बीच, बायो-पीई स्ट्रॉ का 10 श्रेणियों में सबसे ज्यादा पर्यावरणीय प्रभाव पाया गया. इनमें ओजोन परत का क्षरण, पर्यावरणीय अम्लीकरण और स्मॉग बनने जैसी श्रेणियां शामिल थीं. इन नतीजों से पता चलता है कि रोजमर्रा की चीजों का पर्यावरण पर पड़ने वाला प्रभाव इस बात पर निर्भर करता है कि उन्हें किस मैटेरियल से बनाया गया है. साथ ही इन्हें कैसे बनाया जा रहा है और इस्तेमाल करने के बाद इनका निपटान कैसे किया जा रहा है.
पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन कैसे किया गया?
शोधकर्ताओं ने हर तरह के स्ट्रॉ के पूरे जीवन चक्र का देखा. इसमें कच्चे माल के उत्पादन और स्ट्रॉ बनाने से लेकर इस्तेमाल के बाद उनके निपटान तक की प्रक्रिया शामिल थी. द कोरिया हेराल्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, इस विश्लेषण में यह माना गया कि फेंके गए स्ट्रॉ में से लगभग 74% को जलाकर नष्ट किया जाएगा, जबकि बाकी 26% को लैंडफिल यानी कचरा भरने वाली जगहों पर डाला जाएगा. नतीजों से पता चला कि कई पर्यावरणीय श्रेणियों में पारंपरिक प्लास्टिक स्ट्रॉ का प्रदर्शन स्ट्रॉ के दूसरे विकल्पों से बेहतर था. हालांकि, यह अध्ययन यह भी नहीं बताता कि हर लिहाज से प्लास्टिक स्ट्रॉ ही पर्यावरण के लिए सबसे अच्छा विकल्प हैं.
कागज के स्ट्रॉ को रीसाइकिल करना मुश्किल क्यों है?
प्लास्टिक के विकल्प के तौर पर प्रचारित किए जाने के बावजूद, कागज के स्ट्रॉ को वास्तव में रीसाइकिल करना मुश्किल हो सकता है. इनका आकार छोटा होने के कारण रीसाइक्लिंग केंद्रों में इन्हें दूसरे कचरे से अलग करना कठिन होता है. इसके अलावा, इन्हें बनाने में इस्तेमाल होने वाली कोटिंग और चिपकाने वाले पदार्थ भी रीसाइक्लिंग की प्रक्रिया को मुश्किल बनाते हैं.
प्लास्टिक प्रदूषण को लेकर लोगों की चिंता बढ़ने के बाद होटल, बार और फास्ट-फूड आउटलेट में कागज के स्ट्रॉ का इस्तेमाल आम हो गया है. हालांकि, कागज आमतौर पर पारंपरिक प्लास्टिक की तुलना में जल्दी खत्म हो जाता है, लेकिन पर्यावरण पर इसका कुल प्रभाव कई बातों पर निर्भर करता है. इसमें इनका प्रोडक्शन और रिसाइकिलिंग भी शामिल है.
कागज के स्ट्रॉ में ज्यादा हो सकते हैं ‘फॉरएवर केमिकल्स’
बेल्जियम की यूनिवर्सिटी ऑफ एंटवर्प के शोधकर्ताओं की एक पिछली स्टडी में पाया गया था कि प्लास्टिक के स्ट्रॉ की तुलना में कागज के स्ट्रॉ के भीतर और उसके ऊपर पॉलीफ्लोरोएल्किल सब्सटेंस (PFAS) ज्यादा बार पाए गए. इन रसायनों को आमतौर पर ‘फॉरएवर केमिकल्स’ कहा जाता है, क्योंकि ये पर्यावरण में दशकों तक बने रह सकते हैं. ये पानी की आपूर्ति को दूषित कर सकते हैं और कई स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़े हुए हैं.
अमेरिका में कागज के स्ट्रॉ को हटाने की दिशा में कदम बढ़ाया
मार्च 2025 में ट्रंप प्रशासन ने सरकारी कामकाज में कागज के स्ट्रॉ का इस्तेमाल धीरे-धीरे खत्म करने की दिशा में एक पहल शुरू की. इसके तहत व्हाइट हाउस ने नेशनल स्ट्रैटेजी टू एंड द यूज ऑफ पेपर स्ट्रॉज नाम से एक रिपोर्ट जारी की. इस रिपोर्ट में तर्क दिया गया कि कागज के स्ट्रॉ पारंपरिक प्लास्टिक स्ट्रॉ की तुलना में महंगे, कम प्रभावी और संभावित रूप से ज्यादा नुकसानदायक हैं. डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कागज के स्ट्रॉ को “लुगदी जैसा, गीला और खराब” बताते हुए इनकी आलोचना की. उन्होंने PFAS की मौजूदगी को लेकर भी चिंता जताई. ये ऐसे रसायन हैं जो कैंसर और स्वास्थ्य से जुड़ी दूसरी समस्याओं से जुड़े हुए हैं.