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Inspiring Story of Rajkumar Bhaskar: पिलानी के योगाचार्य राजकुमार भास्कर 16 सालों से बिना किसी फीस के लोगों को नि:शुल्क योग सिखा रहे हैं. वर्ष 2008 में खुद कई बीमारियों से परेशान होकर उन्होंने योग अपनाया और पूर्णतः स्वस्थ हुए. इसके बाद उन्होंने समाज को निरोगी बनाने का संकल्प लिया और ‘योग मंदिर ट्रस्ट’ की स्थापना की. आज वे हर उम्र के लोगों को योग, प्राणायाम और अनुशासित जीवन शैली का पाठ पढ़ा रहे हैं. उनका उद्देश्य योग को हर घर तक पहुंचाना और लोगों को स्वस्थ जीवन देना है.
Jhunjhunun: जिंदगी में जब विपरीत परिस्थितियां आती हैं, तो वे कभी-कभी इंसान के जीवन का उद्देश्य ही बदल देती हैं. राजस्थान के पिलानी के निवासी योगाचार्य राजकुमार भास्कर की कहानी भी कुछ ऐसी ही प्रेरणादायक है. एक समय था जब वे खुद कई गंभीर शारीरिक बीमारियों और तनाव से जूझ रहे थे. डॉक्टरी इलाज और ढेरों दवाइयों के बावजूद जब उन्हें सेहत में अपेक्षित सुधार नजर नहीं आया, तो उन्होंने योग और प्राणायाम की शरण ली. धीरे-धीरे योग अभ्यास से उनकी सेहत में चमत्कारिक सुधार हुआ और वे पूरी तरह स्वस्थ हो गए. स्वयं के इस अनुभव ने उन्हें योग की असीम शक्ति का अहसास कराया. जिस राह ने उन्हें निरोगी जीवन दिया, उसी राह पर अब वे पिछले 16 वर्षों से लगातार हजारों लोगों को चलना सिखा रहे हैं और स्वस्थ जीवन जीने की प्रेरणा दे रहे हैं.
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, लगातार बढ़ते मानसिक तनाव और बिगड़ती दिनचर्या का सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है. ऐसे समय में राजकुमार भास्कर योग को हर व्यक्ति के जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने के अभियान में जुटे हैं. उनका मानना है कि योग केवल कुछ लोगों या वर्ग तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि यह हर घर और हर उम्र के व्यक्ति की दैनिक दिनचर्या में शामिल होना चाहिए. इसी पुनीत सोच के साथ उन्होंने पिलानी में ‘योग मंदिर ट्रस्ट’ (Yoga Mandir Trust) की स्थापना की. इस केंद्र में प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग आते हैं, जिन्हें योग, ध्यान और प्राणायाम का गहन अभ्यास कराया जाता है. खास बात यह है कि इस सेवा के बदले किसी से भी कोई शुल्क या फीस नहीं ली जाती है.
2008 से लगातार जारी है नि:शुल्क योग सेवा
राजकुमार भास्कर की यह योग यात्रा वर्ष 2008 में शुरू हुई थी. उस दौर में बीमारियों से परेशान होकर उन्होंने टीवी पर स्वामी रामदेव के योग कार्यक्रमों को देखना और नियमित अभ्यास करना शुरू किया था. स्वास्थ्य में सुधार मिलने के बाद उन्होंने ठान लिया कि वे इस विद्या का लाभ समाज के अन्य लोगों तक भी पहुंचाएंगे. शुरुआत में उन्होंने छोटे स्तर पर लोगों को योग सिखाना शुरू किया, लेकिन देखते ही देखते लोग उनसे जुड़ते चले गए. आज पिछले 16 वर्षों से वे बिना रुके, बिना थके समाज सेवा के इस कार्य में समर्पित हैं. उनका स्पष्ट कहना है कि आर्थिक स्थिति चाहे जैसी भी हो, पैसों की वजह से कोई भी व्यक्ति योग और बेहतर स्वास्थ्य के लाभ से वंचित नहीं रहना चाहिए.
अनुशासन और सही जीवन शैली पर विशेष जोर
योग मंदिर ट्रस्ट के माध्यम से राजकुमार भास्कर केवल आसन और प्राणायाम सिखाने तक ही सीमित नहीं रहते, बल्कि वे लोगों को अनुशासित जीवनशैली अपनाने के लिए भी प्रेरित करते हैं. उनका मानना है कि स्वस्थ और सुखी रहने के लिए केवल व्यायाम काफी नहीं है, बल्कि सही खान-पान, समय पर सोना-जागना और नियमित अभ्यास बेहद जरूरी है. वे लोगों को समझाते हैं कि बीमारी होने के बाद इलाज ढूंढने से बेहतर है कि इंसान पहले से ही अपने शरीर और दिनचर्या का ध्यान रखे. उनके लिए यह कार्य किसी भी तरह की कमाई का जरिया नहीं, बल्कि समाज के प्रति अपनी नैतिक जिम्मेदारी और सेवा भाव है.
समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बने राजकुमार भास्कर
राजकुमार भास्कर का जीवन और उनका 16 वर्षों का नि:शुल्क योग अभियान इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि व्यक्तिगत संकट भी समाज कल्याण की बहुत बड़ी प्रेरणा बन सकता है. जो व्यक्ति कभी अपनी सेहत सुधारने के लिए संघर्ष कर रहा था, आज वह अनगिनत लोगों को निरोगी और खुशहाल जीवन जीने की राह दिखा रहा है. बिना किसी आर्थिक लाभ की लालसा के लगातार 16 वर्षों से समाज सेवा में जुटे रहना उनके दृढ़ निश्चय और निस्वार्थ भावना को दर्शाता है. उनके लिए सबसे बड़ा पुरस्कार और उपलब्धि यही है कि लोग योग के प्रति जागरूक हों और स्वस्थ जीवन अपनाएं.