लद्दाख में -55 डिग्री से लेकर कच्छ के 55 डिग्री वाले दलदल में भी दौड़ेगा, सेना के नए ‘सिंधु’ से कांपेंगे चीन और पाकिस्तान

लद्दाख में -55 डिग्री से लेकर कच्छ के 55 डिग्री वाले दलदल में भी दौड़ेगा, सेना के नए ‘सिंधु’ से कांपेंगे चीन और पाकिस्तान


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-55 डिग्री की बर्फ से 55 डिग्री की आग तक, ‘सिंधु’ से कांपेंगे चीन और पाकिस्तान

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BVS 10 Sindhu ATV: लार्सन एंड टुब्रो और बीएई सिस्टम्स ने आर्टिकुलेटेड ऑल-टेरेन व्हीकल बीवीएस 10 सिंधु का प्रोडक्शन शुरू कर दिया है. भारतीय सेना ने इन अत्याधुनिक वाहनों की 18 यूनिट्स का ऑर्डर दिया है. यह वाहन वैश्विक स्तर पर कई युद्धों में अपनी मजबूत क्षमता साबित कर चुका है. अब इसे भारतीय सेना की खास सामरिक जरूरतों के हिसाब से देश में ही तैयार किया जा रहा है. यह बख्तरबंद गाड़ी देश की उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर सुरक्षा तंत्र को मजबूत करेगी. लद्दाख के बर्फीले पहाड़ों से लेकर गुजरात में कच्छ के तपते रेगिस्तान तक यह वाहन जवानों को हर परिस्थिति में बढ़त दिलाएगा. आइए जानें, बीवीएस 10 सिंधु की खासियतें. (All Photos : ANI)

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बीवीएस 10 सिंधु एक आधुनिक आर्टीकुलेटेड ऑल-टेरेन व्हीकल है, जो दो अलग-अलग हिस्सों में जुड़ा होता है. इसके दोनों हिस्से मजबूत रबर ट्रैक्स पर चलते हैं, जिससे यह बिना फंसे किसी भी दुर्गम सतह पर आगे बढ़ सकता है. हजीरा में तैयार हो रहे इस वाहन का डिजाइन ऐसा है कि यह खड़ी चढ़ाई और तीखे मोड़ों पर भी अपना संतुलन बनाए रखता है.

इसके अगले केबिन में ड्राइवर और कमांडर बैठते हैं, जबकि पिछले केबिन में हथियारों से लैस जवान बैठ सकते हैं. इसके पिछले हिस्से में जवानों की सुविधा के लिए आपातकालीन मेडिकल किट और खास सीटें लगाई गई हैं. यह गाड़ी दलदल, गहरे कीचड़, रेत और बर्फ में भी समान रफ्तार से आगे बढ़ती है.

भारतीय सेना इस वाहन को लद्दाख में 18 हजार फीट की अत्यधिक ऊंचाई वाले इलाकों में तैनात करेगी. पूर्वी लद्दाख में सर्दियों के दौरान तापमान गिरकर माइनस 55 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है. ऐसे मौसम में भारी बर्फबारी के चलते पहियों वाले सामान्य वाहन बेअसर हो जाते हैं.

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बीवीएस 10 सिंधु को खास तौर पर इन बर्फीले हालात में ऑपरेशन्स जारी रखने के लिए तैयार किया गया है. यह कड़ाके की ठंड में भी जवानों को त्वरित गति से एक अग्रिम चौकी से दूसरी चौकी तक पहुंचा सकता है. जरूरत पड़ने पर यह बर्फीले इलाकों में भारी हथियार और रसद सामग्री पहुंचाने का काम भी आसानी से करेगा.

पाकिस्तान से सटी पश्चिमी सीमा पर इस वाहन की तैनाती गुजरात के कच्छ इलाके में की जाएगी. कच्छ का इलाका अपने विशाल दलदली क्षेत्रों, नमक के मैदानों और रेतीले धोरों के लिए जाना जाता है. गर्मियों के दिनों में यहां का तापमान 55 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है. ऐसे गर्म मौसम और फिसलन भरे दलदल में गश्त करना जवानों के लिए एक कठिन काम होता है.

बीवीएस 10 सिंधु 55 डिग्री की गर्मी में भी बिना किसी तकनीकी खराबी के लगातार पेट्रोलिंग कर सकता है. यह दलदली और उथले पानी वाले क्षेत्रों में आसानी से निकल जाता है. इससे सीमा पार से होने वाली किसी भी हरकत पर नजर रखना आसान हो जाएगा.

सूरत के हजीरा में इस वाहन का निर्माण शुरू होना देश में रक्षा विनिर्माण के लिए एक मजबूत संदेश है. लार्सन एंड टुब्रो और अंतरराष्ट्रीय रक्षा कंपनी बीएई सिस्टम्स का यह प्रयास रक्षा क्षेत्र में निर्माण को गति देगा. दुनिया भर के युद्धों में परखे जा चुके इस प्लेटफॉर्म का भारत में बनना भविष्य की जरूरतों के रास्ते खोलेगा.

भारतीय सेना को मिलने वाले ये 18 वाहन दो बिल्कुल विपरीत मोर्चों पर तैनात होंगे. एक तरफ माइनस 55 डिग्री का बर्फीला लद्दाख होगा, तो दूसरी तरफ 55 डिग्री का तपता कच्छ का रेगिस्तान होगा. यह आधुनिक तकनीक सेना के मूवमेंट को नई रफ्तार और मजबूती प्रदान करेगी.



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