मासूम बच्चों की क्या गलती? सामाजिक बहिष्कार से परिवार का जीना मुश्किल, कलेक्टर से न्याय की गुहार

मासूम बच्चों की क्या गलती? सामाजिक बहिष्कार से परिवार का जीना मुश्किल, कलेक्टर से न्याय की गुहार


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Bilaspur News: बिलासपुर के तखतपुर ब्लॉक के लाखासार में एक परिवार ने सामाजिक बहिष्कार का आरोप लगाया है. परिवार का दावा है कि कोरोना काल में मृत्युभोज को लेकर हुए विवाद के बाद उनका हुक्का-पानी बंद कर दिया गया था. बच्चों को आंगनबाड़ी से भगाने और पूजा-पाठ से रोकने का भी आरोप लगाया गया. पीड़ित परिवार ने कलेक्टर जनदर्शन में आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई है.

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बिलासपुर. अपने ही गांव में रहकर भी अगर समाज के लोग आपसे दूरी बना लें, सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल होने से रोकें और पूजा-पाठ तक करने न दें, तो जिंदगी कितनी मुश्किल हो सकती है. ऐसा ही आरोप छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के तखतपुर ब्लॉक के ग्राम लाखासार के एक परिवार ने लगाया है. परिवार का दावा है कि कोरोना काल में चाचा की मृत्यु के बाद दोबारा दशगात्र और मृत्युभोज कराने के दबाव का विरोध करने पर उन्हें सतनामी समाज से बहिष्कृत कर दिया गया. उनका आरोप है कि इसके बाद उनका हुक्का-पानी बंद कर दिया गया और सामाजिक मेलजोल भी खत्म हो गया. परिवार ने बच्चों को आंगनबाड़ी से भगाने, पूजा-पाठ में शामिल नहीं होने देने और दुकान में आग लगाने की धमकी मिलने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए हैं. करीब 25 साल से दुकान चलाकर परिवार का पालन-पोषण करने वाले रमेश चंदेल का कहना है कि सामाजिक बहिष्कार के साथ अब उनकी आजीविका पर भी संकट मंडरा रहा है. इसी मामले को लेकर परिवार के सदस्य बिलासपुर पहुंचे और कलेक्टर जनदर्शन में आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई है.

रमेश कुमार चंदेल के मुताबिक, वर्ष 2020 में कोरोना संक्रमण के दौरान उनके चाचा पंचराम का निधन हो गया था. उस समय देश में लॉकडाउन लागू था. परिवार का कहना है कि तत्कालीन परिस्थितियों और लागू प्रतिबंधों को ध्यान में रखते हुए सीमित लोगों की मौजूदगी में अंतिम संस्कार से संबंधित कार्यक्रम किया गया था. आरोप है कि इसके बाद समाज के कुछ लोगों ने दोबारा दशगात्र कार्यक्रम और मृत्युभोज कराने का दबाव बनाया. रमेश चंदेल और उनके परिवार ने इसका विरोध किया, जिसके बाद विवाद बढ़ गया.

विरोध करने पर समाज से बहिष्कृत करने का आरोप
रमेश चंदेल का आरोप है कि मृत्युभोज को लेकर हुए विवाद के बाद उन्हें और उनके परिवार को सामाजिक रूप से बहिष्कृत कर दिया गया. उनका कहना है कि समाज के लोगों ने उनसे मेलजोल बंद कर दिया और हुक्का-पानी भी बंद कर दिया. परिवार के मुताबिक, इस फैसले का असर उनके रोजमर्रा के जीवन पर पड़ा है. वे लोग अपने ही गांव में सामाजिक गतिविधियों से अलग-थलग महसूस कर रहे हैं और दूसरे ग्रामीणों के सहयोग से जीवनयापन कर रहे हैं.

पूजा-पाठ और सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल होने से रोका
लक्ष्मी प्रसाद चंदेल ने आरोप लगाया कि पहले उनका परिवार सतनाम भवन और जैतखाम में पूजा-पाठ करता था. वे नियमित रूप से अगरबत्ती जलाने के बाद अपनी दुकान खोलते थे लेकिन अब उन्हें वहां जाकर पूजा करने की अनुमति नहीं दी जा रही है. परिवार का कहना है कि सामाजिक बहिष्कार के कारण धार्मिक और सामुदायिक गतिविधियों में भाग लेना भी मुश्किल हो गया है. उनका आरोप है कि उन्हें अपने ही समाज के लोगों से अलग कर दिया गया है.

बच्चों को आंगनबाड़ी से भगाने का आरोप
परिवार की दशोदा बाई ने आरोप लगाया कि सामाजिक विवाद का असर उनके छोटे बच्चों पर भी पड़ रहा है. उनका कहना है कि आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों के साथ ठीक व्यवहार नहीं किया जाता और उन्हें वहां से भगा दिया जाता है. परिवार का दावा है कि इससे बच्चों की देखभाल और पढ़ाई प्रभावित हो रही है. आवेदन में आंगनबाड़ी सहायिका पर धमकी देने के आरोप भी लगाए गए हैं. हालांकि इन आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्ष का बयान सामने आना बाकी है.

सामाजिक बहिष्कार के साथ दुकान-मकान का विवाद भी
रमेश चंदेल के मुताबिक, वह ग्राम लाखासार में शासकीय भूमि के खसरा नंबर 1331/2 के एक हिस्से पर करीब 25 वर्षों से टिन शेड लगाकर दुकान संचालित कर रहे हैं. इसके पास उनका मकान भी है. परिवार का आरोप है कि सामाजिक विवाद के बाद दुकान और मकान हटवाने के लिए शिकायत की गई और तहसीलदार तखतपुर की ओर से बेदखली का आदेश जारी किया गया. वहीं आवेदन में यह भी उल्लेख है कि सतनामी समाज के लोगों ने शिकायत की थी कि संबंधित भूमि पर दुकान और मकान होने से सतनाम भवन एवं जैतखाम में सामाजिक कार्यक्रम आयोजित करने में असुविधा होती है. ऐसे में मामले में सामाजिक बहिष्कार के आरोपों के साथ शासकीय भूमि पर निर्माण और बेदखली की कार्रवाई का विवाद भी जुड़ा हुआ है.

कलेक्टर जनदर्शन में लगाई न्याय की गुहार
परिवार ने कलेक्टर जनदर्शन में आवेदन देकर सामाजिक बहिष्कार के आरोपों की जांच कराने और अपनी समस्याओं का समाधान करने की मांग की है. आवेदन में धमकी देने और दुकान-मकान हटाने की कार्रवाई को लेकर भी शिकायत की गई है. परिवार का कहना है कि सामाजिक बहिष्कार के कारण उन्हें मानसिक और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. अब इस मामले में प्रशासन की जांच अहम होगी. सामाजिक बहिष्कार के आरोपों, बच्चों से जुड़े दावों और दुकान-मकान की बेदखली से संबंधित विवाद की जांच के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी. फिलहाल परिवार ने प्रशासन से न्याय और सुरक्षा की मांग की है.



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