फैज की शायरी और नवाजुद्दीन सिद्दीकी की जादुई आवाज…दुनियाभर में छाई ‘एक सफा’

फैज की शायरी और नवाजुद्दीन सिद्दीकी की जादुई आवाज…दुनियाभर में छाई ‘एक सफा’


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फैज अहमद फैज की शायरी पर बनी शॉर्ट फिल्म ‘एक सफा’ को ग्लोबल फिल्म फेस्टिवल में पहचान मिल रही है. यह उज्जैन में 24–25 अक्टूबर को होने वाले फिल्म फेस्टिवल में भी शामिल हुई. फिल्म ‘एक सफा’ एक ऐसा सिनेमाई विस्तार है, जहां साहित्य सिर्फ पढ़ने या सुनने तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि उसे सीन, आवाज और भावनाओं के जरिये अनुभव करने की कोशिश की गई है. नवाजुद्दीन सिद्दीकी की आवाज और फैज अहमद फैज की शायरी के सहारे ‘एक सफा’ प्रेम और बिछड़ने की एक निजी कहानी को मानवीय अनुभव में बदलने की कोशिश करती है.

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फिल्म, सिनेमा और साहित्य का खूबसूरत मिलाप है.

नई दिल्ली: एक्टर नवाजुद्दीन सिद्दीकी की आवाज, मशहूर शायर फैज अहमद फैज की शायरी और लेखक-निर्देशक शादाब सिद्दीकी की सिनेमाई सोच से बनी शॉर्ट फिल्म ‘एक सफा’ इन दिनों ग्लोबल फिल्म फेस्टिवल सर्किट में अपनी पहचान बना रही है. जम्मू-कश्मीर से शुरू हुआ फिल्म का सफर अब लेबनान और यूक्रेन तक पहुंच चुका है. फिल्म में प्रेम, जुदाई, खामोशी और यादों को शायरी के जरिये पर्दे पर उतारा गया है. शादाब सिद्दीकी द्वारा लिखित और निर्देशित ‘एक सफा’ को ‘इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ जम्मू एंड कश्मीर 2026’ में ऑफिशियल चयन मिला. फिल्म की स्क्रीनिंग कश्मीर में हुई. फिल्म की संवेदनशील कहानी और फैज की शायरी को सिनेमाई रूप देने की कोशिश से खास पहचान मिली है.

‘एक सफा’ की सबसे खास विशेषताओं में से एक नवाजुद्दीन सिद्दीकी की आवाज में किया गया कविता-पाठ है. उनकी आवाज फिल्म के इमोशनल वर्ल्ड को एक अलग गहराई देती है. फिल्म में कविता केवल डायलॉग या बैकग्राउंड का हिस्सा नहीं है, बल्कि कहानी को महसूस कराने का एक अहम जरिया है. फिल्म में प्रीति सूद और नसीम मुगल भी अहम भूमिकाओं में हैं. दोनों कलाकारों के जरिये प्रेम और बिछड़ने की भावनाओं को सीन में उतारा गया है. फैज अहमद फैज की शायरी इस कहानी की आत्मा है, जो शब्दों, आवाज, अभिनय और सीन्स को एक-साथ जोड़ती है.

फिल्म में प्रीति सूद और नसीम मुगल भी अहम भूमिकाओं में हैं.

कश्मीर से लेबनान तक पहुंची फिल्म
कश्मीर में परफॉर्मेंस के बाद ‘एक सफा’ ने ग्लोबल मंचों की ओर कदम बढ़ाया. फिल्म को ‘लेबनान इंटरनेशनल शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल 2026’ में शामिल किया गया, जिसका आयोजन बेरूत में 11 से 13 अक्टूबर के बीच हुआ. फिल्म की टीम के लिए लेबनान की सेरेमनी में भागीदारी एक अहम पड़ाव रही. टीम अब सेरेमनी से जुड़ी ऑफिशियल तस्वीरों, अवॉर्ड कॉन्टेंट और प्रमोशनल डॉक्युमेंट को भारतीय दर्शकों तक पहुंचाने की दिशा में भी काम कर रही है, ताकि फिल्म की अचीवमेंट को बड़े लेवल पर बयां किया जा सके. साथ ही, ‘एक सफा’ यूक्रेन के ‘मॉर्फ फिल्म फेस्टिवल’ में भी अपनी ग्लोबल जर्नी जारी रखी. फिल्म की टीम की मानें, तो यह सफर भारतीय साहित्य और कविता से जुड़ी कहानी को अलग-अलग कल्चरल बैकग्राउंड के दर्शकों तक ले जाने का अवसर है. इससे, फिल्म को भारतीय दर्शकों के बीच अपनी साहित्यिक और इमोशनल कहानी आगे ले जाने का एक और अवसर मिलेगा. शादाब सिद्दीकी साल 2006 से भारतीय फिल्म और एंटरटेनमेंट जगत में सक्रिय हैं.



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