पिता को लकवा हुआ तो बेटी ने लिया फिजियोथेरेपिस्ट बनने का फैसला, बुरहानपुर में क्लीनिक खोलकर कर रहीं मरीजों की सेवा

पिता को लकवा हुआ तो बेटी ने लिया फिजियोथेरेपिस्ट बनने का फैसला, बुरहानपुर में क्लीनिक खोलकर कर रहीं मरीजों की सेवा


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डॉक्टर दामिनी जांगड़े बताती हैं कि जब उनके पिता को लकवे की समस्या हुई तब परिवार को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा. पिता के उपचार और उनकी देखभाल के दौरान उन्होंने फिजियोथेरेपी की अहमियत को करीब से समझा. उन्होंने महसूस किया कि मरीजों को बेहतर उपचार के साथ नियमित फिजियोथेरेपी की भी जरूरत होती है.

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जीवन में कई बार कठिन परिस्थितियां ही हमें आगे बढ़ने की नई राह दिखाती हैं. परिवार में किसी अपने की बीमारी भी जिंदगी का उद्देश्य बदल सकती है. ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी बुरहानपुर की दामिनी जांगड़े की है जिन्होंने अपने पिता को लकवे की समस्या से जूझते देखा तो फिजियोथेरेपिस्ट बनने का फैसला कर लिया. आज दामिनी फिजियोथेरेपी की पढ़ाई पूरी करने के बाद अपने ही शहर में क्लीनिक संचालित कर मरीजों की सेवा कर रही हैं.

डॉक्टर दामिनी जांगड़े बताती हैं कि जब उनके पिता को लकवे की समस्या हुई तब परिवार को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा. पिता के उपचार और उनकी देखभाल के दौरान उन्होंने फिजियोथेरेपी की अहमियत को करीब से समझा. उन्होंने महसूस किया कि मरीजों को बेहतर उपचार के साथ नियमित फिजियोथेरेपी की भी जरूरत होती है. इसी अनुभव ने उनके मन में इस क्षेत्र में करियर बनाने की इच्छा पैदा की.

डॉक्टर बेटी ने दी जानकारी

पिता की बीमारी से मिली प्रेरणा को दामिनी ने अपने लक्ष्य में बदल दिया. उन्होंने फिजियोथेरेपी की पढ़ाई करने का निर्णय लिया और मेहनत के साथ अपनी शिक्षा पूरी की. पढ़ाई पूरी होने के बाद उनके सामने दूसरे शहर में नौकरी करने का विकल्प भी था लेकिन उन्होंने अपने ही शहर बुरहानपुर में रहकर लोगों की सेवा करने का फैसला किया. इसके बाद उन्होंने यहां अपना क्लीनिक शुरू किया और मरीजों का उपचार करना प्रारंभ किया.

लक्ष्य लोगों की सेवा करना

दामिनी का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल पैसा कमाना नहीं बल्कि जरूरतमंद लोगों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराना है. इसी सोच के साथ वे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों से आने वाले मरीजों का कम शुल्क में इलाज करती हैं. ताकि आर्थिक परेशानी के कारण किसी को उपचार से वंचित न रहना पड़े. दामिनी जांगड़े की कहानी बताती है कि परिवार की मुश्किलें भी जीवन में सकारात्मक बदलाव का कारण बन सकती हैं. पिता की बीमारी से शुरू हुआ उनका सफर आज दूसरों की मदद करने के संकल्प में बदल चुका है. अपने शहर में रहकर मरीजों की सेवा करने वाली दामिनी उन युवाओं के लिए प्रेरणा हैं जो अपनी शिक्षा और हुनर के माध्यम से समाज में बदलाव लाना चाहते हैं.



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