पंजाब में पहली बार एशियाई हॉकी चैंपियनशिप का आगाज, 6 देशों के कप्तानों को सम्मानित कर सीएम मान ने क्या कहा?

पंजाब में पहली बार एशियाई हॉकी चैंपियनशिप का आगाज, 6 देशों के कप्तानों को सम्मानित कर सीएम मान ने क्या कहा?


जालंधर: पंजाब ने पहली बार एशियाई हॉकी चैंपियनशिप की मेजबानी कर अपने खेल इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया है. जालंधर स्थित ओलंपियन सुरजीत सिंह हॉकी स्टेडियम में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने ‘हीरो एशियन चैंपियंस ट्रॉफी पंजाब-2026’ का उद्घाटन किया. इस टूर्नामेंट के शुरू होने से पंजाब के खिलाड़ियों का घरेलू मैदान पर अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने का सपना साकार हुआ है. प्रतियोगिता में भारत के अलावा बांग्लादेश, चीन, जापान, कोरिया और मलेशिया की टीमें भाग ले रही हैं. मुख्यमंत्री ने सभी छह टीमों के कप्तानों का स्वागत कर उन्हें सम्मानित किया. उन्होंने कहा कि पंजाब विश्व स्तर पर अपना पुराना गौरव हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है.

टूर्नामेंट के आयोजन को लेकर खेल विभाग ने पुख्ता इंतजाम किए हैं. चैंपियनशिप के सभी लीग मुकाबले जालंधर के ओलंपियन सुरजीत सिंह हॉकी स्टेडियम में खेले जाएंगे. इसके बाद सेमीफाइनल और फाइनल मैच मोहाली के ओलंपियन बलबीर सिंह सीनियर अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम में होंगे. मुख्यमंत्री ने कहा कि इस स्तर की अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता की मेजबानी करना पूरे राज्य के लिए गर्व की बात है. इससे हमारे खेल ढांचे, मेहमाननवाजी और सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी. स्टेडियम में ओलंपियन सुरजीत सिंह की एक प्रतिमा भी स्थापित की गई है.

भारतीय हॉकी में पंजाब के ऐतिहासिक योगदान को लेकर सीएम मान ने क्या कहा?

मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब और हॉकी का रिश्ता अटूट है. वर्ष 1928 के एम्स्टर्डम ओलंपिक से लेकर 2024 के पेरिस ओलंपिक तक पंजाब ने देश को 77 हॉकी ओलंपियन दिए हैं. इनमें से 48 खिलाड़ियों ने देश के लिए ओलंपिक पदक जीते हैं. पंजाबी खिलाड़ियों ने 10 बार ओलंपिक में भारतीय टीम की कप्तानी भी की है. टोक्यो और पेरिस ओलंपिक में भारतीय पुरुष टीम ने लगातार कांस्य पदक जीते. इससे पहले भारत को लगातार दो ओलंपिक में पदक 52 साल पहले मिले थे. मौजूदा भारतीय टीम के कप्तान हरमनप्रीत सिंह सहित आठ खिलाड़ी पंजाब से ही हैं.

संसारपुर और मिट्ठापुर जैसे गांवों ने कैसे तैयार किए दर्जनों ओलंपियन?

मुख्यमंत्री ने जालंधर और आसपास के गांवों की खेल परंपरा को याद किया. उन्होंने बताया कि संसारपुर, खुसरोपुर और मिट्ठापुर जैसे गांवों ने देश को 20 से अधिक ओलंपियन दिए हैं. इन इलाकों में हॉकी केवल एक खेल नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा है. वर्ष 1975 में भारत की विश्व कप विजेता टीम के कप्तान अजीत पाल सिंह थे. वर्ष 2001 में गगन अजीत सिंह और 2016 में हरजीत सिंह की कप्तानी में भारत ने जूनियर विश्व कप जीता था. इन सभी जीतों में राज्य के खिलाड़ियों की मुख्य भूमिका रही है.

राज्य में खेल ढांचे को मजबूत करने के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए?

पंजाब सरकार ने खेल ढांचे को मजबूत करने के लिए वर्ष 2023 में नई खेल नीति लागू की थी. इसके तहत खेलों के लिए 1,744 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है. राज्य में हॉकी के छह नए एस्ट्रो-टर्फ मैदान तैयार किए जा चुके हैं, जबकि दो अन्य पर काम चल रहा है. इसके अलावा जमीनी स्तर पर 18 छह-ए-साइड एस्ट्रो-टर्फ मैदान भी बनाए गए हैं. ‘खेडां वतन पंजाब दियां’ के चौथे सीजन में छह लाख से अधिक युवाओं ने पंजीकरण कराया है. राज्य भर में 3,000 से अधिक खेल मैदान विकसित किए जा रहे हैं.

क्या 2030 के हॉकी विश्व कप की मेजबानी करने के लिए तैयार है पंजाब?

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब वर्ष 2030 में हॉकी विश्व कप की मेजबानी करने की तैयारी कर रहा है. यह एशियाई चैंपियनशिप राज्य की आयोजन क्षमता को साबित करने का बड़ा मौका है. इस आयोजन से खेल पर्यटन, होटल कारोबार और खेल उद्योग को बड़ा फायदा मिलेगा. इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी बनेंगे. उद्घाटन समारोह में कैबिनेट मंत्री मोहिंदर भगत, खेल प्रमुख सचिव वरुण रूजम, खेल निदेशक अभिजीत कपलिश, हॉकी पंजाब के अध्यक्ष नितिन कोहली और हॉकी इंडिया के महासचिव भोला नाथ सहित कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं.



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