Ayushmann Khurrana Life Lessons : जिंदगी में आगे बढ़ना है, तो सिर्फ सफलता का इंतजार करने से काम नहीं चलेगा. कभी तारीफ मिलेगी, तो कभी मेहनत के बावजूद निराशा हाथ लगेगी. ऐसे में जरूरी है कि हम खुद पर भरोसा बनाए रखें और अपनी गलतियों से सीखते रहें. लेकिन ऐसा करना हमेशा आसान नहीं होता. खासकर तब, जब लगातार मिल रही नाकामयाबी हमारे आत्मविश्वास को कमजोर करने लगे. बॉलीवुड अभिनेता और गायक आयुष्मान खुराना भी अपने करियर में ऐसे दौर से गुजर चुके हैं. उनकी पहली फिल्म ‘विकी डोनर’ सफल रही, लेकिन इसके बाद उनकी लगातार तीन फिल्में बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाईं थी. इस मुश्किल दौर से मिली सीख के बारे में उन्होंने कई इंटरव्यू में खुलकर बात की है. तो चलिए उनके अनुभवों से सीखते हैं जिंदगी जीने के 7 नियम, जो आपको भी सफलता का रास्ता दिखा सकती है.(All Image Credit: Instagram-Ayushmann Khurrana)
1.कुछ अलग करना है तो कंफर्ट जोन से बाहर निकलें
हम सभी को वही काम करना अच्छा लगता है, जिसमें हम सहज महसूस करते हैं. लेकिन हमेशा जाने-पहचाने रास्ते पर चलते रहने से नई संभावनाओं को आजमाने का मौका कम हो जाता है. चाहे करियर में बदलाव करना हो, कोई नया हुनर सीखना हो या अपने लिए कोई बड़ा फैसला लेना हो, शुरुआत में थोड़ी घबराहट होना स्वाभाविक है. आयुष्मान ने अपने करियर में कई ऐसे किरदार चुने, जो आम हीरो की छवि से अलग थे. उनके सफर से यह सीख मिलती है कि आगे बढ़ने के लिए कभी-कभी जोखिम लेना और नई चीजों को आजमाना जरूरी होता है.
2.असफलता से डरें नहीं, उससे सीखें
आयुष्मान खुराना का मानना है कि सफलता अच्छी शिक्षक नहीं होती, जबकि असफलता आपकी दोस्त, दार्शनिक और मार्गदर्शक बन सकती है. “Success is a very lousy teacher and your failures are your friends, philosophers and guides.” उनका कहना है कि नाकामयाबी आपको अपनी गलतियां समझने का मौका देती है. इसका मतलब यह है कि किसी परीक्षा, नौकरी या काम में असफल होने पर खुद को कमतर समझने के बजाय यह सोचें कि गलती कहां हुई. एक खराब अनुभव आपको अगली कोशिश के लिए बेहतर तरीके से तैयार होनेमें मदद करता है.
3.खुद को मोटिवेट करना भी सीखें-
हम चाहते हैं कि परिवार, दोस्त और करीबी लोग हमारे सपनों को समझें और मुश्किल समय में हमारा साथ दें. लेकिन हर बार ऐसा हो, यह जरूरी नहीं.दूसरों से प्रोत्साहन मिलना अच्छी बात है, लेकिन अपनी कोशिशों की जिम्मेदारी खुद लेना भी जरूरी है. जब मन न हो, निराशा हो, हौसला कम लगे तब भी छोटे-छोटे कदम उठाना आपको अपने लक्ष्य पहुंचाने में मदद करता है. इसलिए खुद को मोटिवेट करने के लिए हर संभव प्रयास करें.
4.अपने हुनर पर लगातार काम करें-
आयुष्मान ने 2018 में इंटरव्यू में बताया था कि ऑडिशन और रियलिटी शो के दौरान उन्हें कई बार रिजेक्शन का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार मानने के बारे में नहीं सोचा. उन्होंने अपने हुनर को निखारते रहने पर जोर दिया था. अगर आप भी किसी मुकाम पर पहुंचना चाहते हैं, तो सिर्फ अपनी प्रतिभा के भरोसे न बैठें. रोज कुछ नया सीखें, अभ्यास करें और अपनी कमियों को सुधारें. लगातार की गई मेहनत ही आपकी क्षमता को मजबूत बनाती है.
5.सीखने की आदत कभी न छोड़ें-
रोज कुछ नया सीखना और खूब पढ़ना कभी बेकार नहीं जाता. यह बात सिर्फ कलाकारों के लिए नहीं है. चाहे आप नौकरी करते हों, अपना कारोबार चलाते हों या घर संभालते हों, नई चीजें सीखना आपके नजरिए को बेहतर बनाता है. इसलिए उम्र या जिम्मेदारियों को सीखने के रास्ते में बाधा न बनने दें.
6.दूसरों की सफलता से प्रेरणा लें
जब हमारे आसपास कोई आगे बढ़ता है, तो कभी-कभी अपनी उपलब्धियां छोटी लगने लगती हैं. लेकिन दूसरों की सफलता को खुद से तुलना करने की बजाय उससे सीखने की कोशिश की जा सकती है. आयुष्मान के इंटरव्यू में भी इस बात का जिक्र मिलता है कि सफल लोगों के बीच रहकर व्यक्ति या तो हीनभावना महसूस कर सकता है या उनसे प्रेरणा ले सकता है. यह चुनाव काफी हद तक हमारी अपनी सोच पर निर्भर करता है. मेहनत करें और सही मौके के लिए तैयार रहें. अगर आप करियर बदलना चाहते हैं, कोई परीक्षा पास करना चाहते हैं या नया काम शुरू करने की सोच रहे हैं, तो आज से ही तैयारी करें. हो सकता है कि मनचाहा अवसर तुरंत न मिले, लेकिन आपकी मेहनत आपको उसके लिए तैयार रखेगी.
एक बात याद रखें: जिंदगी में हर दिन आपके मन मुताबिक नहीं होगा. कभी चीजें जल्दी बनेंगी, तो कभी लंबा इंतजार करना पड़ेगा. ऐसे समय में अपनी गलतियों से सीखना, खुद को प्रेरित रखना और कोशिश जारी रखना सबसे ज्यादा मायने रखता है. आयुष्मान खुराना के करियर का एक बड़ा सबक भी यही है कि असफलता सफर का अंत नहीं, बल्कि खुद को बेहतर बनाने का एक मौका हो सकती है.
बता दें कि 14 सितंबर 1984 को चंडीगढ़ में जन्मे आयुष्मान ने अपने करियर की शुरुआत रेडियो और टेलीविजन से की थी. वह एमटीवी के शो रोडीज के दूसरे सीजन के विजेता भी रहे. इसके बाद उन्होंने अभिनय की दुनिया में कदम रखा और 2012 में फिल्म विकी डोनर से बॉलीवुड में अपनी पहचान बनाई. इस फिल्म की सफलता के बाद भी उनका सफर आसान नहीं रहा और उन्हें करियर में कई उतार-चढ़ाव देखने पड़े.
लेकिन उन्होंने पारंपरिक हीरो की छवि में बंधने के बजाय अलग विषयों और चुनौतीपूर्ण किरदारों को चुना. दम लगा के हईशा, बरेली की बर्फी, शुभ मंगल सावधान और अंधाधुन जैसी फिल्मों ने उनकी अलग पहचान मजबूत की. आयुष्मान का करियर यह सीख देता है कि अपनी खूबियों पर भरोसा करना, नए प्रयोग करने का साहस रखना और असफलताओं से सीखते हुए आगे बढ़ना सफलता की राह में अहम भूमिका निभाता है.
डिस्क्लेमर: इस लेख में दिए गए विचार आयुष्मान खुराना के प्रकाशित इंटरव्यू और उनके करियर के अनुभवों से प्रेरित हैं. इन्हें उनके शब्दशः उद्धरण के रूप में न लिया जाए. लेख का उद्देश्य पाठकों को जीवन में सकारात्मक सोच रखने, असफलताओं से सीखने और अपने लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना है.