कोर्ट को बेड़ियां लगाना चाहते थे मुनीर-शहबाज, अचानक जज ने मार दिया ऐसा ‘हथौड़ा’, हिल गया पूरा पाकिस्तान!

कोर्ट को बेड़ियां लगाना चाहते थे मुनीर-शहबाज, अचानक जज ने मार दिया ऐसा ‘हथौड़ा’, हिल गया पूरा पाकिस्तान!


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लाहौर हाईकोर्ट के सीनियर जज न्यायमूर्ति मोहसिन अख्तर कयानी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने 26वें और 27वें संविधान संशोधन के जरिए न्यायपालिका पर बढ़ते सरकारी और सैन्य नियंत्रण के खिलाफ बगावत कर दी है. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर पर अदालतों को अपने इशारों पर नचाने के गंभीर आरोप लगे हैं. इस बड़े इस्तीफे के बाद पाकिस्तान के लोकतंत्र और न्याय व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.

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कोर्ट को अपना गुलाम बनाने की साजिश में जुटे मुनीर और शहबाज को लाहौर हाईकोर्ट ने तगड़ा जवाब दिया है. (Image: AI)

Pakistan News: पाकिस्तान में इन दिनों सत्ता के गलियारों से लेकर अदालतों तक एक ऐसा भूचाल आया है, जिसने पूरे मुल्क को हिलाकर रख दिया है. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर की जोड़ी पाकिस्तान की न्यायपालिका को अपने इशारों पर नचाने और अदालतों को जंजीरों में जकड़ने की पूरी साजिश रच ली थी. लेकिन, तभी लाहौर हाईकोर्ट के एक जज ने ऐसा ‘हथौड़ा’ मारा कि हुक्मरानों के पैरों तले जमीन खिसक गई है. लाहौर हाईकोर्ट के सीनियर जज न्यायमूर्ति मोहसिन अख्तर कयानी ने राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी को अपना इस्तीफा भेजकर पाकिस्तान के हुक्मरानों को खुली चुनौती दे डाली है.

इस पूरे विवाद की जड़ में वे 26वां और 27वां संवैधानिक संशोधन है, जिन्हें मुनीर-शहबाज की जोड़ी जबरन थोपना चाहती है. इन संशोधनों का मकसद पाकिस्तान की स्वतंत्र न्यायपालिका का गला घोंट कर सारी ताकतों को अपनी मुट्ठी में कैद करना है. इमरान खान की पार्टी पीटीआई लंबे समय से न केवल इन संशोधनों का विरोध कर रही है, बल्कि बार-बार यह कह रही है कि मुनीर और शहबाज का यह गठजोड़ देश में अघोशित तानाशाही चलाना चाहता है. वे जजों के तबादलों और उनकी नियुक्तियों की चाबी अपने हाथ में रखना चाहते है, ताकि कोई भी अदालत उनके काले कारनामों के खिलाफ एक लफ्ज भी न बोल सके.

हुक्मरानों के मुंह पर मारा तमाचा
न्यायमूर्ति कयानी ने अपने इस्तीफे के जरिए पाकिस्तानी हुक्मरानों के मंसूबों पर पानी फेर दिया. उन्होंने अपने त्यागपत्र में बिना किसी डर के साफ लिख दिया कि इन संशोधनों ने अदालतों की स्वतंत्रता और रीढ़ को तोड़ दिया है. उन्होंने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार और सेना का दखल इस हद तक बढ़ चुका है कि अब निष्पक्ष न्याय की उम्मीद करना बेईमानी है. इस एक कदम ने पाकिस्तान की न्याय व्यवस्था की सच्चाई पूरी दुनिया के सामने बेनकाब कर दी है.

यह चौथे जज का है इस्‍तीफ
न्यायमूर्ति कयानी के इस्‍तीफे का यह इकलौता मामला नहीं है. मुनीर-शहबाज की इस तानाशाही के खिलाफ इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट के सीनियर जज न्यायमूर्ति सैयद मंसूर अली शाह, न्यायमूर्ति अतहर मिनाल्लाह और लाहौर हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति शम्स महमूद मिर्जा जैसे दिग्गज न्यायूर्ति अपने पदों को ठोकर मार चुके हैं. न्यायमूर्ति कयानी ने अपने पद से इस्‍तीफा देकर साफ कह दिया है कि पाकिस्तान का लोकतंत्र अब दम तोड़ रहा है. जो जज ‘एस्टेब्लिशमेंट’ यानी सेना और खुफिया तंत्र के इशारों पर नाचने से इनकार करते हैं, उन्हें अप्रैल महीने की तरह जबरन ट्रांसफर के जरिए प्रताड़ित किया जाता है.



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