इंदौर से ‘बिजली’ पहुंची कानपुर Zoo, दिखाई ऐसी अकड़ लग गई माथे पर चोट, अब शेरों संग दहाड़ेगी

इंदौर से ‘बिजली’ पहुंची कानपुर Zoo, दिखाई ऐसी अकड़ लग गई माथे पर चोट, अब शेरों संग दहाड़ेगी


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Kanpur Zoo : शेरनी बिजली 60 घंटे पहले इंदौर से कानपुर पहुंची थी. लंबा सफर तय करने के बाद उसे चिड़ियाघर में पशु चिकित्सकों की निगरानी में रखा गया. यात्रा के दौरान पिंजड़े से बाहर निकलने की कोशिश में उसके माथे पर हल्की चोट लगने की जानकारी सामने आई है.

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इंदौर चिड़ियाघर से शेरनी बिजली कानपुर पहुंची.

कानपुर : कानपुर ZOO में वन्यजीव प्रेमियों के लिए खुशखबरी है. मध्य प्रदेश के इंदौर चिड़ियाघर से शेरनी बिजली कानपुर पहुंच गई है. लंबे समय से शेरनी के आगमन का इंतजार कर रहे चिड़ियाघर प्रशासन ने उसके स्वागत की तैयारियां पूरी कर ली हैं. वन्यजीव विनिमय कार्यक्रम के तहत शेरनी बिजली को कानपुर लाया गया है.

स्वास्थ्य परीक्षण के बाद बाड़े में शिफ्ट हुई बिजली
सूत्रों के मुताबिक, शेरनी बिजली 60 घंटे पहले इंदौर से कानपुर पहुंची थी. लंबा सफर तय करने के बाद उसे चिड़ियाघर में पशु चिकित्सकों की निगरानी में रखा गया. यात्रा के दौरान पिंजड़े से बाहर निकलने की कोशिश में उसके माथे पर हल्की चोट लगने की जानकारी सामने आई है. हालांकि, चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे स्वस्थ पाया. इसके बाद बिजली को बब्बर शेर के बाड़े के हाउस में शिफ्ट कर दिया गया. चिड़ियाघर प्रशासन उसके स्वास्थ्य और व्यवहार पर नजर रख रहा है.

शेरों के प्रजनन कार्यक्रम को आगे बढ़ाने की उम्मीद

शेरनी बिजली के कानपुर पहुंचने से चिड़ियाघर में शेरों के प्रजनन कार्यक्रम को आगे बढ़ाने की उम्मीद है. रिपोर्टों के अनुसार, यहां मौजूद बब्बर शेर शंकर के साथ बिजली की जोड़ी बनाने की योजना है. चिड़ियाघर प्रशासन का प्रयास है कि वन्यजीवों को अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराते हुए उनके संरक्षण और वंशवृद्धि की संभावनाओं को बेहतर किया जाए.

इसलिए लिया फैसला

कानपुर Zoo में शेरों का कुनबा बढ़ाने की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी. ऐसे में बिजली के आने से वन्यजीव संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. शेरों के बीच मेल-जोल और प्रजनन की प्रक्रिया विशेषज्ञों की निगरानी में ही आगे बढ़ाई जाएगी. वन्यजीव विनिमय कार्यक्रम के जरिए अलग-अलग चिड़ियाघरों में वन्यजीवों की उपलब्धता, प्रबंधन और प्रजनन संबंधी जरूरतों को पूरा करने का प्रयास किया जाता है. कानपुर में बिजली के आने से शेरों के संरक्षण कार्यक्रम को नई दिशा मिलने की उम्मीद है,

अब सभी की नजरें बिजली के नए वातावरण में ढलने और शंकर के साथ उसकी जोड़ी बनाए जाने की प्रक्रिया पर रहेंगी. चिड़ियाघर प्रशासन की निगरानी में आगे की गतिविधियां तय की जाएंगी.



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