नई दिल्ली. शेयर बाजार के निवेशकों को टैक्स मोर्चे पर बड़ी राहत मिल सकती है. केंद्र सरकार इक्विटी पर लगने वाले लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स में बदालव कर सकती है. एलटीसीजी टैक्स की दर घटाने से लेकर इसे पूरी तरह खत्म करने जैसे विकल्पों पर विचार-विमर्श हो रहा है. अमेरिका, ब्रिटेन, सिंगापुर, हांगकांग, UAE, जापान और कनाडा जैसी अर्थव्यवस्थाओं में कुछ शर्तों के तहत इक्विटी कैपिटल गेन्स पर टैक्स नहीं लगता. चीन में कुछ शेयरों को टैक्स से छूट मिली हुई है, जबकि अन्य पर 10% टैक्स लगाया जाता है. अगर सरकार भारत में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स हटा देती है तो इसका क्या फायदा होगा? क्या ऐसा होने पर शेयर बाजार में तेजी आएगी? ये वो दो अहम सवाल हैं, जिनका जवाब हर कोई जानना चाहता है.
शेयर बाजार जानकारों का कहना है कि एलटीसीजी टैक्स हटने से निवेशकों को सीधा फायदा होगा. निवेशकों की कमाई पर टैक्स का बोझ घटने से स्टॉक मार्केट में पैसा लगाने को लोग प्रोत्साहित होंगे, इसमें कोई दो राय नहीं है. यदि टैक्स में राहत मिलती है तो भारत विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के लिए अधिक आकर्षक बन सकता है. इससे विदेशी निवेश बाजार में बढ़ेगा. भारत से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) द्वारा बड़े पैमाने पर निकासी की जा रही है. रुपया भी बहुत कमजोर हो चुका है. ऐसे समय में भारतीय पूंजी बाजार को विदेशी निवेशकों के लिए प्रतिस्पर्धी बनाए रखने में एलटीसीजी टैक्स हटाना एक गेमचेंजर साबित हो सकता है.
टैक्स का बड़ा असर
मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के अनुसार, टैक्स मामलों के विशेषज्ञ तेजस देसाई का कहना है कि विदेशी निवेशकों के निवेश संबंधी फैसलों पर वैश्विक परिस्थितियों, शेयरों के तुलनात्मक मूल्यांकन और कंपनियों की कमाई का बड़ा असर पड़ता है. कैपिटल गेन्स टैक्स और सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स भारतीय शेयर बाजार के आकर्षण को प्रभावित करता है. इसलिए भारत को विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों पर लगने वाले टैक्स के बोझ की समीक्षा करनी चाहिए.
निवेशकों का तर्क है कि जब शेयरों की खरीद-फरोख्त पर पहले से ही एसटीटी वसूला जा रहा है, तो फिर मुनाफे पर दोबारा टैक्स लगाना उनके रिटर्न में सीधी सेंध लगाने जैसा है. यह उन पर दोहरी मार है. इसलिए एलटीसीजी टैकस को हटाना चाहिए.
एलटीसीजी में बदलाव पर विचार-विमर्श शुरू
मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट में एक सरकारी अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि एलटीसीजी टैक्स पर जल्द ही फैसला होने की उम्मीद है. अधिकारी ने कहा कि सरकार भारत की टैक्स दर की तुलना विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में लागू दरों से कर रही है. वर्तमान में लिस्टेड इक्विटी शेयरों से एक वित्त वर्ष में ₹1.25 लाख से अधिक मुनाफे पर 12.5% LTCG टैक्स लागू होता है. इस पर इंडेक्सेशन का लाभ नहीं मिलता.
संबंधित पक्षों से हो रही है चर्चा
केंद्र सरकार LTCG टैक्स व्यवस्था और पूंजी प्रवाह पर इसके प्रभावों को जानने के लिए उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI), केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT), बैंकों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ कई बैठकें कर चुकी है. एक वरिष्ठ बैंकिंग अधिकारी ने बताया कि सरकार के भीतर यह समझ बन रही है कि भारतीय शेयर बाजार की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने और उसे विदेशी निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक बनाने के लिए टैक्स ढांचे की समीक्षा जरूरी है.अधिकारी ने कहा कि सरकार LTCG से संबंधित विभिन्न प्रस्तावों की जांच कर रही है.
SBI ने की होल्डिंग पीरियड बढ़ाने या टैक्स घटाने की सिफारिश
टैक्स खत्म करने के इस सुझाव को देश के सबसे बड़े बैंक से भी समर्थन मिला है. भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने 12 अक्टूबर की अपनी Ecowrap रिसर्च रिपोर्ट में सुझाव दिया है सरकार को शेयरों पर एलटीसीजी टैक्स पूरी तरह समाप्त करने पर विचार करना चाहिए.
एसबीआई ने इक्विटी निवेश के लिए न्यूनतम होल्डिंग अवधि को बढ़ाकर दो या तीन साल करने और इस पर टैक्स हटाने का सुझाव दिया है. एसबीआई के मुख्य अर्थशास्त्री सौम्य कांति घोष के अनुसार, बार-बार होने वाले पूंजी आउटफ्लो (outflows) को स्थिर करने और एआई जैसी अगली वैश्विक निवेश लहर को आकर्षित करने के लिए नीतिगत स्थिरता जरूरी है.
डॉलर आधारित टैक्स गणना पर भी मंथन
सरकार विदेशी निवेशकों के मुनाफे की गणना रुपये के बजाय डॉलर में करने पर भी विचार कर रही है. वर्तमान में, यदि शेयर 10% बढ़ते हैं लेकिन डॉलर के मुकाबले रुपया 10% गिर जाता है, तो विदेशी निवेशक का वास्तविक रिटर्न शून्य होने के बावजूद उसे रुपये में दिखे मुनाफे पर टैक्स चुकाना पड़ता है. डॉलर में गणना करने से यह विसंगति दूर हो सकती है.