यूरोप के डिफेंस मार्केट में एक ऐसी खबर से हड़कंप मच गया है, जिसे सुनकर बड़े-बड़े डिफेंस एक्सपर्ट्स भी हैरान हैं! अपनी जबरदस्त इंजीनियरिंग और अत्याधुनिक हथियारों के लिए मशहूर जर्मनी अब अमेरिका की नहीं, बल्कि यूक्रेन की बनाई मिसाइल खरीदने जा रहा है. ‘फाइनेंशियल टाइम्स’ का दावा है कि जर्मन सेना पहली बार यूक्रेन की ‘बार्स’ मिसाइल का टेस्ट करने की तैयारी में है. अगर यह दांव सही बैठा, तो जर्मनी ऐसी सैकड़ों मिसाइलों का बड़ा ऑर्डर ठोकेगा. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर दुनिया की सबसे ताकतवर सेनाओं में शुमार जर्मनी को यूक्रेन के इस ‘गाण्डीव’ की जरूरत क्यों पड़ गई?
क्या है पूरा सौदा? जर्मनी की नई रणनीति
जर्मनी की सरकार आने वाले कुछ हफ्तों में यूक्रेन की बार्स मिसाइल के पहले बैच को खरीदने के लिए एक बड़े समझौते पर दस्तखत करने की तैयारी में है. इन मिसाइलों का इस्तेमाल सबसे पहले जर्मन सेना अपनी तकनीकी और टेस्टिंग के लिए करेगीय
अगर अगले साल की शुरुआत में होने वाले परीक्षण सफल रहते हैं, तो जर्मनी सैकड़ों मिसाइलों का बड़ा ऑर्डर दे सकता है. ये कदम केवल हथियार खरीद नहीं है, बल्कि रूस के खिलाफ यूरोप की अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की एक बहुत बड़ी और सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है.
कितनी पावरफुल है ‘बार्स’ मिसाइल?
यूक्रेन में ‘बार्स’ को ड्रोन मिसाइल भी कहा जाता है, लेकिन तकनीकी रूप से जर्मन सेना इसे एक ‘लो-कॉस्ट क्रूज मिसाइल’ मानती है. ये जेट इंजन से चलने वाला एक बेहद घातक हथियार है.
- 1000 किमी की लंबी रेंज: ये मिसाइल 1000 किलोमीटर तक की दूरी पर मौजूद दुश्मन के ठिकानों को सटीकता से अपना शिकार बना सकती है.
- घातक पेलोड क्षमता: अलग-अलग मॉडिफिकेशन के हिसाब से ये मिसाइल 105 किलोग्राम तक का बारूद ले जाने में सक्षम है.
- जेट-पावर्ड स्पीड: जेट इंजन से लैस होने के कारण इसकी रफ्तार सामान्य ड्रोन के मुकाबले काफी तेज होती है, जिससे एयर डिफेंस सिस्टम के लिए इसे पकड़ना मुश्किल होता है.
- बेहद कम लागत: अमेरिका की प्रसिद्ध टॉमाहॉक जैसी मिसाइलों की तुलना में ‘बार्स’ बेहद सस्ती है, जिससे कम बजट में ज्यादा मात्रा में हमला करने की क्षमता मिलती है.
- कम दूरी से सटीक निशाना: ये मिसाइल कम ऊंचाई पर उड़कर दुश्मन के रडार से बचते हुए अपने टारगेट पर सटीक प्रहार कर सकती है.
‘मेक इन जर्मनी’ और खुफिया प्रोडक्शन
इस सौदे का सबसे दिलचस्प पहलू ये है कि बार्स मिसाइलें सिर्फ यूक्रेन में नहीं बन रही हैं. पिछले कुछ महीनों से जर्मनी के अंदर ही एक संयुक्त यूक्रेनी-जर्मन कंपनी इस मिसाइल का निर्माण कर रही है. हालांकि सुरक्षा कारणों से इस पूरी ऑपरेशनल प्रॉसेस को बेहद सीक्रेट रखा गया है.
जर्मनी द्वारा फंडेड इस मेक-इन-जर्मनी बार्स मिसाइल का पहला बैच अक्टूबर में यूक्रेन को सौंपा भी जा चुका है. अब यही जॉइंट वेंचर जर्मन सेना के अपने इस्तेमाल के लिए उत्पादन शुरू करेगा. ये जर्मन रक्षा इतिहास में पहली बार हो रहा है जब बुंडेसवेहर अपनी जरूरतों के लिए यूक्रेन में विकसित किसी आक्रामक हथियार सिस्टम को खरीद रहा है.
अमेरिका की टॉमहॉक से भी सस्ता विकल्प
जर्मनी सिर्फ बार्स मिसाइल पर ही दांव नहीं लगा रहा है. इसके साथ ही जर्मन सेना अमेरिकी स्टार्टअप ‘कोवेनेंट’ की बनाई ‘एंथम’ क्रूज मिसाइल के एक छोटे बैच का भी टेस्ट करने वाली है.
अगर आंकड़ों की बात करें तो अमेरिका की टॉमहॉक मिसाइल की कीमत लगभग 40 लाख से 60 लाख डॉलर के बीच होती है. एंथम मिसाइल की कीमत टॉमहॉक के मुकाबले दसवां हिस्सा है. लेकिन डिफेंस सूत्रों की मानें तो यूक्रेन की ‘बार्स’ मिसाइल एंथम से भी सस्ती है. यही वजह है कि बजट और कार्यकुशलता के बीच संतुलन बनाने के लिए जर्मनी इन दोनों प्रणालियों को अपनाने के लिए तैयार है. फिलहाल यूक्रेन की ‘फ्लेमिंगो’ क्रूज मिसाइल की खरीद को टाल दिया गया है.
क्यों मजबूरी बना ये सौदा? जर्मन सेना का मिसाइल संकट
जर्मनी के इस फैसले से साफ पता चलता है कि उनके अपने हथियारों का जखीरा अब कम पड़ने लगा है. फिलहाल जर्मन सेना के पास सिर्फ ‘टॉरस’ क्रूज मिसाइल ही है, जो हवा से दागी जाती है और इसकी मारक क्षमता भी सिर्फ 500 किलोमीटर के आसपास ही है.
जर्मनी ने अमेरिका की रेथियॉन कंपनी से ताकतवर BGM-109 टोमाहॉक मिसाइलें और टाइफॉन ग्राउंड-बेस्ड लॉन्चर खरीदने का प्लान तो बना लिया है, लेकिन पंगा ये है कि इनकी डिलीवरी मिलने में 5 साल तक की लंबी देरी हो सकती है. रूस के साथ बढ़ते तनाव और यूरोप पर मंडराते सुरक्षा संकट को देखते हुए जर्मनी के पास इतना लंबा इंतजार करने का वक्त बिल्कुल नहीं है.
12 अरब यूरो का नया रक्षा बजट
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूस के खतरे से निपटने के लिए जर्मन सरकार लंबी दूरी के हथियारों का नया जखीरा तैयार करने जा रही है. इस पर करीब 12 अरब यूरो खर्च किए जाएंगे. इसी होड़ में डेनमार्क ने भी अपने इतिहास में पहली बार लंबी दूरी की सटीक मिसाइलें खरीदने के लिए अरबों डॉलर के सौदे का ऐलान कर दिया है. यूक्रेन की ‘बार्स’ मिसाइल का ये सौदा इस बात का सबूत है कि जंग के मैदान में आजमाई गई और सस्ते में सटीक वार करने वाली तकनीक ही आने वाले समय में रक्षा सौदों की असली ताकत बनने वाली है.