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Saudi Arabia Offers Deal to Houthi: सऊदी अरब और हूतियों के बीच जो संघर्ष चल रहा था, उसे अब खत्म करने के लिए सऊदी अरब ऐसे प्लान के साथ सामने आया है, जो ईरान को खुश कर देगा. भले ही वो हूतियों को अपने कंट्रोल में नहीं मानता लेकिन सऊदी-हूतियों के बीच डील कराने के लिए तेहरान आगे आया और सऊदी प्लेन में भरकर पैसा लेकर पहुंचा.
सऊदी अरब ने ईरान से मांगी मदद.
Saudi Arabia Offers Deal to Houthi: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब के रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान की ईरान यात्रा को लेकर कई अहम दावे सामने आए हैं. खाड़ी क्षेत्र के राजनयिक सूत्रों के मुताबिक इस अचानक हुई यात्रा का उद्देश्य यमन के हूती विद्रोहियों के साथ युद्धविराम का रास्ता तलाशना था. इजरायल हायोम की रिपोर्ट के सऊदी अरब ने ईरान के माध्यम से हूती विद्रोहियों को एक अरब डॉलर देने के संभावित समझौते पर चर्चा होने का दावा किया गया है. हालांकि इस रकम को देने का दावा सार्वजनिक तौर पर पुष्ट नहीं हुआ है.
रिपोर्ट के में कहा गया है कि सऊदी रक्षा मंत्री अपने साथ मिलिट्री विमान में यह रकम भरकर ले आए थे. हालांकि सऊदी अधिकारियों ने पैसे को देने की जानकारी नहीं दी है, लेकिन दावा किया जा रहा है कि मक्का पैक्ट के तहत वो तुर्की के इंटेलिजेंस चीफ और पाकिस्तान के फील्ड मार्शल असीम मुनीर के साथ वो इसी डील के लिए तेहरान पहुंचे थे. अगर ये बात पुष्ट होती है तो ये ईरान की बड़ी कूटनीतिक जीत साबित होगी और अमेरिका के लिए शर्मनाक बात.
क्यों हूतियों-सऊदी अरब के बीच हुआ संघर्ष?
- विवाद की जड़ करीब तीन साल पहले हुए समझौतों से जुड़ी बताई जा रही है. उन समझौतों के तहत सऊदी अरब को हूती-नियंत्रित क्षेत्रों में सरकारी कर्मचारियों के वेतन और नागरिक बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण के लिए आर्थिक सहायता देनी थी. बदले में हूती विद्रोहियों से युद्धविराम बनाए रखने और सऊदी अरब पर हमले रोकने की अपेक्षा थी.
- हाल के महीनों में हूतियों ने आरोप लगाया कि सऊदी अरब ने इन समझौतों को लागू नहीं किया. दूसरी ओर सऊदी अरब का आधिकारिक रुख रहा है कि वह सैन्य दबाव में आकर कोई नया समझौता नहीं करेगा और पहले कब्जे वाले क्षेत्रों से हूतियों की वापसी चाहता है.
मक्का पैक्ट रक्षा कराएगा या समझौता?
इस बैठक में तुर्की की खुफिया एजेंसी के प्रमुख इब्राहिम कालिन और पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर भी शामिल हुए. रिपोर्ट के मु्तबिक मक्का रक्षा समझौते के बावजूद पाकिस्तान और तुर्की ने सऊदी अरब को सीमित सहायता दी है. उन्होंने अतिरिक्त सैनिक भेजने के बजाय सैन्य सलाहकार उपलब्ध कराए. ईरान की ओर से राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान, सुरक्षा परिषद के प्रमुख मोहसिन रेजाई और रिवोल्यूशनरी गार्ड के वरिष्ठ अधिकारी बातचीत में शामिल हुए. ईरान ने सऊदी अरब और हूतियों के बीच मध्यस्थता करने की पेशकश भी की.
ईरान की कूटनीतिक जीत कैसे?
सऊदी अरब के तेल ठिकानों पर हूतियों के हमलों और होर्मुज में तेल परिवहन प्रभावित होने से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा है. ऐसे में युद्धविराम की कोशिश सऊदी अरब के लिए आर्थिक नुकसान कम करने का रास्ता हो सकती है. ईरान के लिए यह बैठक कूटनीतिक अवसर है. वह क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था में अपनी भूमिका बढ़ाना और अमेरिका तथा इजरायल के हस्तक्षेप को सीमित करने की बात आगे बढ़ाना चाहता है. दिलचस्प ये भी है कि अमेरिका अब तक खुद को खाड़ी देशों का रक्षक बताता रहा है और जब सऊदी अरब जैसे सहयोगी पर ताबड़तोड़ हमले होने लगे, तो अमेरिका कहीं नहीं दिखा. खुद ही सऊदी को इस समस्या का समाधान ढूंढना पड़ा.