रिलायंस इंडस्ट्रीज की जियो प्लेटफॉर्म्स कंपनी के शेयर 28 अक्टूबर को एनएसई और बीएसई पर लिस्ट होने जा रहे हैं. कंपनी के करीब 30,200 करोड़ रुपये के आईपीओ को निवेशकों का जबरदस्त रिस्पांस मिला था. अब जिन निवेशकों को शेयर अलॉट हुए हैं, उनकी नजर लिस्टिंग परफॉर्मेंस और मुनाफे पर टिकी हुई है. हालांकि, मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि निवेशकों को सिर्फ लिस्टिंग के दिन होने वाले फायदे पर ध्यान देने के बजाय कंपनी की लंबी अवधि की संभावनाओं को भी समझना चाहिए.
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जियो की डिजिटल सर्विसेस में मजबूत पकड़, तकनीक और कमाई बढ़ाने की कैपेसिटी इसे लंबी अवधि के निवेश के लिए वैल्युएबल बना सकती है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), एंटरप्राइज डिजिटल सर्विसेज और फिक्स्ड ब्रॉडबैंड जैसे सेक्टर्स में भी कंपनी के पास आगे बढ़ने के अवसर हैं. हालांकि, निवेश से पहले कंपनी की वैल्यूएशन और टेलीकॉम सेक्टर से जुड़े रिस्क को समझना भी जरूरी है.
100 मिनट में पूरा सब्सक्राइब हुआ IPO
जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ खुलने के महज 100 मिनट के अंदर ही पूरी तरह सब्सक्राइब हो गया था. भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में इतनी तेजी से पूरा सब्सक्राइब होने वाले पब्लिक इश्यू के रूप में इसने खास पहचान बनाई. आईपीओ में क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित करीब 5,500 करोड़ रुपये का हिस्सा भी शुरुआती 10 मिनट में पूरी तरह सब्सक्राइब हो गया था. बिडिंग खत्म होने तक आईपीओ कुल 22.2 गुना सब्सक्राइब हुआ. पब्लिक इश्यू और एंकर निवेशकों की ओर से कुल मांग 7.4 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा रही. आईपीओ के अंतिम इश्यू प्राइस के आधार पर कंपनी का मार्केट प्राइस करीब 10.3 लाख करोड़ रुपये आंका गया है.
जियो शेयरों को होल्ड करने की सलाह क्यों?
हालांकि, आईपीओ के इश्यू प्राइस पर कंपनी का वित्त वर्ष 2026 के अनुमानित मुनाफे के मुकाबले प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेश्यो 34.3 गुना और एंटरप्राइज वैल्यू-टू-EBITDA अनुपात 14.8 गुना है. ऐसे में निवेशकों को कंपनी की कीमत और भविष्य में कमाई बढ़ने की संभावनाओं का एनालिसिस करना चाहिए.
मंगल केशव फाइनेंशियल सर्विसेज के चेयरमैन परेश भगत के मुताबिक, जियो के IPO को निवेशकों का शानदार रिस्पॉन्स मिला और यह करीब 22.2 गुना सब्सक्राइब हुआ. इससे कंपनी के टेलीकॉम कारोबार और डिजिटल ग्रोथ की संभावनाओं पर निवेशकों का भरोसा दिखता है. हालांकि, ₹1,119 के ऊपरी इश्यू प्राइस पर कंपनी की वैल्यूएशन काफी ऊंची है और भविष्य में कमाई बढ़ने की उम्मीदें भी इसमें काफी हद तक शामिल हैं. अगर किसी ने सिर्फ लिस्टिंग पर मुनाफा कमाने के लिए निवेश किया है, तो शेयर की लिस्टिंग के बाद भाव देखकर कुछ शेयर बेचकर मुनाफा बुक करने पर विचार कर सकता है. वहीं, लंबे समय के निवेशक टेलीकॉम कारोबार में जियो की मजबूत स्थिति, प्रति ग्राहक औसत कमाई (ARPU) बढ़ने, 5G से कमाई और डिजिटल कारोबार के विस्तार की संभावनाओं को देखते हुए निवेश बनाए रखने पर विचार कर सकते हैं. हालांकि, आगे मिलने वाला रिटर्न कंपनी की कमाई, नकदी जुटाने की क्षमता और पूंजी के सही इस्तेमाल पर निर्भर करेगा.
मजबूत मुनाफे पर नजर
कांतिलाल छगनलाल सिक्योरिटीज के रिसर्च एंड बिजनेस डेवलपमेंट उपाध्यक्ष महेश एम. ओझा का कहना है कि जियो की टेक्निकल कैपेसिटी उसकी बड़ी ताकत है. कंपनी के पास 7,220 से ज्यादा पेटेंट आवेदन हैं. अपना टेक्नोलॉजी स्टैक होने से कंपनी को तीसरे पक्ष के वेंडरों पर निर्भरता और उनसे जुड़ी लागत कम करने में मदद मिल सकती है.
ओझा के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 में कंपनी का नेट लेवरेज घटकर 0.36 गुना रह गया. इससे संकेत मिलता है कि कंपनी भारी इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश के दौर से आगे बढ़कर फ्री कैश फ्लो बढ़ाने पर ध्यान दे रही है. कंपनी का EBITDA मार्जिन भी 51.91% रहा है, जो उसके मजबूत ऑपरेशन को दिखाता है.
AI और ब्रॉडबैंड से ग्रोथ
आने वाले समय में जियो की कमाई बढ़ाने में टैरिफ में संभावित बढ़ोतरी, प्रति ग्राहक डेटा इस्तेमाल में वृद्धि और जियोफाइबर व जियोएयरफाइबर जैसी फिक्स्ड ब्रॉडबैंड सर्विसेस की भूमिका अहम हो सकती है. इसके अलावा, AI और एंटरप्राइज डिजिटल सर्विसेस में विस्तार से भी नए अवसर पैदा हो सकते हैं. हालांकि, टेलीकॉम नियमों में बदलाव, स्पेक्ट्रम खरीदने की जरूरत, नई तकनीकों से पैदा होने वाले कॉम्टिशन और साइबर सुरक्षा से जुड़े रिस्क कंपनी के कारोबार को प्रभावित कर सकते हैं.
(डिस्क्लेमर- नेटवर्क18 और टीवी18 कंपनियां चैनल/वेबसाइट का संचालन करती हैं, जिनका नियंत्रण इंडिपेंडेट मीडिया ट्रस्ट करता है, जिसमें रिलायंस इंडस्ट्रीज एकमात्र लाभार्थी है.)