India Bangladesh Relations : चीन को खूब तेल लगाया लेकिन काम भारत ही आया, ढाका से 10000 करोड़ की मेगा डील, बनेगी पहली अंडरग्राउंड मेट्रो

India Bangladesh Relations : चीन को खूब तेल लगाया लेकिन काम भारत ही आया, ढाका से 10000 करोड़ की मेगा डील, बनेगी पहली अंडरग्राउंड मेट्रो


ढाका: बांग्लादेश ने चीन को खुश करने के लिए उसे तमाम प्रोजेक्ट्स देने और खूब ‘तेल लगाने’ की कोशिश की, ताकि ड्रैगन उनकी नैया पार लगा सके. लेकिन जब बात भरोसेमंद काम की आई, तो बांग्लादेश के पाले में भी ये बात अच्छे से समझ आ गई कि संकट या बड़े विकास कार्यों में चीन के खोखले वादे नहीं, बल्कि भारत की तकनीकी ताकत ही काम आती है. तभी तो ढाका ने अपनी पहली अंडरग्राउंड मेट्रो रेल प्रोजेक्ट के लिए चीन को दरकिनार करते हुए भारत की दिग्गज इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (L&T) पर भरोसा जताया है. भारतीय कंपनी को ढाका से 10,000 करोड़ रुपये तक का एक बहुत बड़ा मेगा ऑर्डर मिला है.

कौन-कौन से पैकेज मिले हैं L&T को?

ढाका मास ट्रांजिट कंपनी लिमिटेड (DMTCL) द्वारा दिए गए इस मेगा प्रोजेक्ट में L&T दो मुख्य कांट्रैक्ट पैकेजों पर काम करने जा रही है. ये दोनों पैकेज मेट्रो के मुख्य ऑपरेशनल और तकनीकी सिस्टम का आधार हैं.

पहला कॉन्ट्रैक्ट पैकेज CP09 – ट्रैक वर्क्स और इलेक्ट्रिकल सिस्टम : इस पैकेज के तहत L&T अपने जापानी पार्टनर सुमितोमो कॉर्पोरेशन के साथ मिलकर काम करेगी. इसमें 4 बड़े काम शामिल हैं.

  1. पूरे 31 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर में आधुनिक ट्रैक बिछाना.
  2. पावर सप्लाई और इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम तैयार करना.
  3. ट्रैक्शन सब-स्टेशन और ओवरहेड केटेनरी सिस्टम (OCS) बनाना, जिससे मेट्रो को सुचारू रूप से बिजली मिल सके.
  4. प्रोजेक्ट से जुड़ी तमाम इलेक्ट्रिकल सुविधाओं का डिजाइन, खरीद, इंस्टालेशन और टेस्टिंग करना.

दूसरा कॉन्ट्रैक्ट पैकेज CP10 – सिग्नलिंग, टेलीकम्युनिकेशन और प्लेटफॉर्म स्क्रीन डोर्स (PSD), इस पैकेज का पूरा जिम्मा L&T खुद अपने दम पर संभालेगी. इसके तहत 3 बड़े काम शामिल हैं.

  1. अत्याधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम: ताकि ट्रेनें बिना किसी हादसे के सही दूरी और रफ्तार पर दौड़ सकें.
  2. टेलीकम्युनिकेशन नेटवर्क: जिससे कंट्रोल रूम, स्टेशन और ड्राइवरों के बीच आपस में निर्बाध बातचीत हो सके.
  3. प्लेटफॉर्म स्क्रीन डोर्स (PSD): ये यात्रियों की सुरक्षा के लिए प्लेटफॉर्म पर लगाए जाने वाले कांच के ऑटोमैटिक दरवाजे होते हैं, जो केवल मेट्रो ट्रेन आने पर ही खुलते हैं. अंडरग्राउंड स्टेशनों की सुरक्षा के लिए ये बेहद जरूरी माने जाते हैं.

क्या है ‘ढाका मेट्रो लाइन-1’ प्रोजेक्ट और कितना बड़ा है इसका नेटवर्क?

ढाका दुनिया के सबसे घने और ट्रैफिक जाम से जूझते शहरों में से एक है. इस शहर को भारी ट्रैफिक से मुक्ति दिलाने और आधुनिक परिवहन साधन मुहैया कराने के लिए जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) इस प्रोजेक्ट के लिए फंडिंग मुहैया करा रही है. इस प्रोजेक्ट के दो मुख्य रूट्स हैं.

  1. एयरपोर्ट रूट : कमलापुर से शुरू होकर ढाका एयरपोर्ट तक जाएगा. ये मुख्य रूप से अंडरग्राउंड सेक्शन होगा.
  2. पूर्बाचल रूट : नतुन बाजार से पूर्बाचल टर्मिनल तक जाएगा, जो एलिवेटेड (ओवरग्राउंड) रहेगा.

पूरा ढाका मेट्रो लाइन-1 नेटवर्क लगभग 31 किलोमीटर लंबा होगा. इसमें कुल 19 स्टेशन्स होंगे और पीतलगंज में एक विशाल मेट्रो डिपो बनाया जाएगा. जब ये लाइन बनकर तैयार होगी, तो ये ढाका की आम जनता के लिए बेहद सुरक्षित, टिकाऊ और तेज रफ्तार सफर का बेहतरीन माध्यम बनेगी.

चीन के झांसे से दूर, भारत पर क्यों जताया भरोसा?

पिछले कुछ सालों में बांग्लादेश की पिछली सरकारों ने चीन को लुभाने के लिए कई इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स सौंपे थे. लेकिन चीन की ‘डेढ़-पूरी चाल’ और उसके कई प्रोजेक्ट्स की सुस्त रफ्तार या खराब गुणवत्ता से बांग्लादेशी हुक्मरान भी अच्छी तरह वाकिफ हो चुके हैं. जब देश की सबसे अहम और पहली अंडरग्राउंड मेट्रो बनाने की बारी आई, तो उन्होंने चीन के बजाय भारत की उस कंपनी को चुना जिसका ट्रैक रिकॉर्ड पूरी दुनिया में बेदाग है.

L&T का ढाका मेट्रो के साथ पुराना और शानदार नाता रहा है. कंपनी ने इससे पहले ढाका मेट्रो लाइन-6 का काम संभाला था, जो बांग्लादेश के इतिहास की सबसे पहली मेट्रो रेल थी. L&T ने उसके लिए इंटीग्रेटेड रेलवे सिस्टम का पूरा काम समय पर और बेहतरीन क्वालिटी के साथ पूरा किया था. आज लाइन-6 पर रोजाना लाखों लोग बिना किसी रुकावट के सफर कर रहे हैं.

इसी भरोसेमंद ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए ढाका मास ट्रांजिट कंपनी ने एक बार फिर L&T पर भरोसा जताया है. सिर्फ बांग्लादेश ही नहीं, बल्कि L&T इंडोनेशिया में जकार्ता मेट्रो के लिए भी ईएंडएम (E&M) सिस्टम पर शानदार काम कर रही है. घरेलू स्तर पर भारत के लगभग हर बड़े शहर की मेट्रो और देश की पहली हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में भी L&T की प्रमुख हिस्सेदारी रही है.

भारत-बांग्लादेश के रिश्तों के लिए क्या हैं मायने?

L&T को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 5,000 से 10,000 करोड़ रुपये का ये मेगा ऑर्डर मिलना कंपनी के लिए बड़ी डील तो है ही लेकिन इसके मायने दोनों देशों के रिश्तों के लिए भी बेहद खास हैं.

  1. ‘मेक इन इंडिया’ और इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट को बढ़ावा: भारत की कंपनियां अब ये साबित कर रही हैं कि वो ग्लोबल मार्केट में चीन या पश्चिमी देशों की कंपनियों को कड़ी टक्कर दे सकती हैं.
  2. रेवेन्यू और शेयर बाजार पर उछाल: इस बड़े ऑर्डर से L&T की ऑर्डर बुक और अधिक मजबूत होगी, जिससे कंपनी का रेवेन्यू और मुनाफा आने वाले समय में तेजी से बढ़ेगा.
  3. जापानी कंपनियों के साथ दमदार साझेदारी: जापानी एजेंसी JICA द्वारा फंडेड इस प्रोजेक्ट में जापानी दिग्गज सुमितोमो के साथ L&T की पार्टनरशिप ये दिखाती है कि भारतीय कंपनियों के सेफ्टी स्टैंडर्ड्स और काम करने की क्षमता वर्ल्ड-क्लास है.

कंपनी ने क्या कहा?

इस बड़ी कामयाबी और ऑर्डर मिलने पर खुशी जाहिर करते हुए L&T के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और ट्रांसपोर्टेशन इंफ्रास्ट्रक्चर के हेड रामकुमार एस ने कहा ‘DMTCL से दोबारा मिला ये ऑर्डर वैश्विक स्तर पर बड़े पैमाने के अर्बन ट्रांजिट प्रोजेक्ट्स को पूरा करने की L&T की क्षमता का प्रमाण है. ढाका मेट्रो लाइन-6 और हाल ही में जकार्ता मेट्रो में काम करने का हमारा अनुभव हमें इस प्रोजेक्ट को भी बाकी स्टेकहोल्डर्स और ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स (OEMs) के साथ तालमेल बिठाकर समय पर पूरा करने में मदद करेगा’.



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